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गया की मां मंगलागौरी मंदिर का जानिए इतिहास, Video:10 हजार साल पुराना है मंदिर का इतिहास, प्राचिन काल से गर्भगृह में जल रही ज्योत; गुरु वशिष्ठ और विश्वामित्र से भी जुड़ी है कहानी

गया2 महीने पहले
मंदिर में प्राचीन काल से माता की ज्योत जल रही है, जो आज भी प्रज्जवलित है।

नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार से हो गई है। इस मौके पर गया के प्रसिद्ध पालन सिद्ध पीठ मां मंगलागौरी मंदिर भी श्रद्धालुओं की काफी भीड़ जुट रही है। यह मंदिर घनी आबादी के बीच भस्मकूट पर्वत पर स्थित है। यह मंदिर करीब 10 हजार साल पूर्व का माना जाता है। साथ ही यह भी मान्यता है कि माता सती का एक अंग यहां भी गिरा था। मंदिर के पुजारी विपिन बिहारी गिरी बताते हैं कि पूर्वजों के अनुसार, गुरु वशिष्ठ और विश्वामित्र ने भी यहां साधना की है। मंदिर में प्राचीन काल से माता की ज्योत जल रही है, जो आज भी प्रज्ज्वलित है।

परिसर में स्थित मौल श्री के वृक्ष पर नहीं पड़ता पतझड़ का प्रभाव

मंदिर परिसर में एक मौल श्री का वृक्ष है, जो कितना पुराना है, इसका कोई प्रमाण नहीं है। लोग इस पेड़ को काफी दिनों से देख रहे हैं। पुजारी विपिन बिहारी गिरी के अनुसार, खास बात यह है कि इस वृक्ष पर पतझड़ का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। यहां बैठने मात्र से श्रद्धालुओं को शांति मिलती है। अब भी यहां साधक आते हैं और माता का दर्शन कर चले जाते हैं। पुजारी विपिन बिहारी गिरी का कहना है कि मां मंगला गौरी का वर्णन विभिन्न पुराणों में है।

माना जाता है कि मंदिर परिसर में बैठने मात्र से श्रद्धालुओं को एक शांति मिलती है।
माना जाता है कि मंदिर परिसर में बैठने मात्र से श्रद्धालुओं को एक शांति मिलती है।

हजारों साल से जल रहा अखंड ज्योत

मां मंगला गौरी मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना है। यहां के पुजारियों की मानें तो देश भर में माता सती के अंग विभिन्न पर्वतों पर गिरे थे। उस 108 अंग में से एक अंग यहां भी गिरा था। जो कि पालन पीठ के रूप में है। इसलिए यह माना जाता है कि यहां माता अपने भक्तों का पालन करती हैं। पुजारियों की मानें तो 10 हजार साल पूर्व इस मंदिर का निर्माण दंडी स्वामी ने कराया था। उन्होंने माता के गर्भ गृह में अपनी साधना से अखंड ज्योत जलाई थी, जो तब से लेकर अब तक प्रज्ज्वलित है। यहां सच्चे मन से आने वाले भक्तों की हर मन्नतें पूरी होती है।

गर्भ गृह में एक बार में 5 श्रद्धालुओं का प्रवेश नहीं

मां मंगला गौरी मंदिर समिति का कहना है- 'कोरोना महामारी देखते हुए श्रद्धालुओं को सोशल डिस्टेंसिंग के तहत कतारबद्ध तरीके से ही माता के दर्शन कराने की योजना है। साथ ही मास्क अनिवार्य है। गर्भ गृह में एक बार में 5 श्रद्धालुओं से अधिक काे प्रवेश नहीं दिया जा रहा। मंदिर परिसर में हैंड सैनिटाइजर की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा मंदिर परिसर काे दिन में तीन बार सैनिटाइज किया जाएगा।'

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