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'19 लाख रोजगार पर युवाओं से विश्वासघात कर रही सरकार':भाकपा-माले ने कहा-अनुदान और लोन योजना स्थायी रोजगार का विकल्प हो ही नहीं सकती

पटना5 महीने पहले
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भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल - Dainik Bhaskar
भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल

भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने बिहार सरकार द्वारा युवा व महिलाओं को 5 लाख अनुदान और 5 लाख लोन देने की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में जनता से किए गए 19 लाख स्थायी रोजगार का यह विकल्प नहीं हो सकता है। BJP-JDU सरकार अपने चरित्र के मुताबिक बिहार के युवाओं से एक बार फिर विश्वासघात कर रही है। सम्मानजनक और स्थायी रोजगार को लेकर हमारी लड़ाई जारी रहेगी।

इसका जवाब मुख्यमत्री दें
माले राज्य सचिव ने कहा कि बड़े तामझाम के साथ नीतीश कुमार इस योजना की चर्चा कर रहे हैं, लेकिन पहले वे ये बताएं कि अब तक स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं महिलाओं का कर्जा माफ क्यों नहीं हुआ है, जबकि कई राज्य सरकारों ने यह कर्जा माफ कर दिया है। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं सरकार से कलस्टर बनाने की लगातार मांग करती रही हैं, ताकि वे अपने उत्पादों को बेच सकें, लेकिन सरकार ने आज तक ऐसा नहीं किया। अब जो यह 10 लाख का अनुदान व लोन दिया जा रहा है, इसकी क्या गारंटी है कि इस पैसे से युवा-महिलाओं द्वारा शुरू किए गए किसी उद्यम से उत्पादित सामानों की सरकार खरीद की गारंटी करेगी? बिहार में ऐसा डोमेस्टिक मार्केट भी नहीं है, जहां वे अपने उत्पादों को बेच सकें।

इस सरकार में एक-एक कर सारे उद्योग बंद हो गए
माले राज्य सचिव ने आगे कहा कि दरअसल BJP-JDU शासन में एक-एक कर सारे उद्योग बंद ही होते गए। ऐसे में युवाओं को रोजगार कहां मिलेगा? खेती का हाल चौपट ही है। धान हो या गेहूं, किसान अपना अनाज औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं। चीनी मिलें भी लगातार बंद हो रही हैं। किसानों का लाखों रुपए का बकाया है। सरकार के पास बिहार में उद्योगों को बढ़ावा देने का न तो कोई ब्लूप्रिंट है और न इच्छाशक्ति। विडंबना यह कि उद्योग के नाम पर खाद्य पदार्थों से भी एथेनॉल बनाने का खेल शुरू हो चुका है।

19 लाख स्थायी रोजगार के वादे से पीछे नहीं भागने देंगे
माले राज्य सचिव ने कहा कि भाकपा-माले मांग करती है कि बिहार में कृषि आधारित उद्योगों के विकास पर सरकार जोर दे, ताकि बड़े पैमाने पर युवाओं-महिलाओं को रोजगार मिल सके। लाखों खाली पड़े पदों पर तत्काल स्थायी बहाली करे, आशा-रसोइया व सभी स्कीम वर्करों को न्यूनतम मानदेय दे और स्वयं सहायता समूह के कर्जों को माफ कर उनके उत्पादों की बिक्री के लिए सरकार कलस्टरों का निर्माण करवाए। कहा कि हम बिहार सरकार को 19 लाख स्थायी रोजगार के वादे से पीछे नहीं भागने देंगे।

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