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स्वीडन से आई गुहार, जमीन से लाल झंडा हटवाए सरकार:बिहार में मखाना उगाना भी कितनी बड़ी चुनौती... एक महिला प्रोफेसर ने सोशल मीडिया पर लिखा

पटना2 महीने पहले
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स्वाति पराशर ने बिहार के CM व अन्य नेताओं से सोशल मीडिया पर की है शिकायत। - Dainik Bhaskar
स्वाति पराशर ने बिहार के CM व अन्य नेताओं से सोशल मीडिया पर की है शिकायत।
  • जमीन पर लाल झंडा गाड़ कर भाई को मखाना की खेती से रोक रहे हैं दबंग

बिहार में अपना रोजगार खड़ा करना कितना मुश्किल है, यह पहले भी सामने आता रहा है। इस बार आवाज विदेश से आई है। मधुबनी के पंडौल की रहनेवाली स्वाति पराशर स्वीडन के गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मदद की गुहार लगाई है। कहा है कि उनकी जमीन पर लाल झंडे लिए कुछ लोगों ने जबर्दस्ती कब्जा कर लिया है। जब पुलिस उन्हें हटाने पहुंची तो पुलिस पर पत्थर और लाठी से हमला किया गया।

आरोप है कि अतिक्रमण हटाने गई पुलिस पर हमला भी हुआ।
आरोप है कि अतिक्रमण हटाने गई पुलिस पर हमला भी हुआ।

सोशल मीडिया पर पोस्ट देख मंत्री ने लिया संज्ञान

स्वाति पराशर की इस गुहार का संज्ञान बिहार सरकार के जल संसाधन और सूचना जनसंपर्क मंत्री संजय कुमार झा ने लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर स्वाति पराशर को भरोसा दिलाया है कि उन्हें न्याय दिलाएंगे। झा ने मधुबनी के डीएम को पूरे मामले को देखने का निर्देश भी दिया है।

स्वाति की शिकायत पर मंत्री संजय झा ने दिया जवाब।
स्वाति की शिकायत पर मंत्री संजय झा ने दिया जवाब।

पिता 40 वर्षों तक प्रशासनिक सेवा में रहे

प्रो. स्वाति पराशर के पिता अरविंद झा 40 वर्षों तक प्रशासनिक सेवा में योगदान देते हुए झारखंड सरकार में डिप्टी सेक्रेटरी के पद से रिटायर हुए हैं। रांची से अपने गांव डीह टोला अभी कुछ दिन पहले ही आए हैं। उनके पुत्र दिल्ली में एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करते थे। वे भी नौकरी छोड़ गांव लौटे हैं। पुश्तैनी जमीन पर ऑर्गेनिक फार्मिंग और मखाने का कारोबार शुरू करना चाह रहे हैं।

स्वाति ने पोस्ट में विस्तार से लिखी समस्या

अरविंद झा की बेटी स्वाति पराशर ने लिखा है कि - मेरा परिवार बिहार में मधुबनी जिले के पंडौल से आता है। यह मेरा जन्म स्थान भी है। काम की तलाश में बड़े शहरों में जाने वाले गरीब प्रवासियों के लिए बिहार जाना जाता रहा है। अभी भी सभी विकास सूचकांकों पर बहुत कम आंकड़े दर्ज कर पाते हैं। औपनिवेशिक काल के दौरान बिहार फिजी और दूसरे देशों के लिए गिरमिटिया मजदूर सप्लाई का स्रोत था। इस लिहाज से मैं भी एक प्रवासी हूं। मैं अपने साथ वह पहचान रखती हूं। जहां भी जाती हूं मेरा परिवार अपनी मिट्टी से गहराई से जुड़ा होता है और हम स्थानीय भागीदारी से विकास कार्य करने के लिए अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं।

प्रो. स्वाति ने बताया है कि हाल के दिनों में मेरा भाई गांव शिफ्ट हुआ है। दरभंगा में उसने मखाना की खेती की प्रशिक्षण भी लिया है। अपनी जमीन पर मखाना प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की कोशिश कर रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर 100 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। यह सब लिखते हुए प्रो. स्वाति ने पिता और भाई को सुरक्षा की मांग की है।

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