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वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व के बाघों का VIDEO देखिए:15 अक्टूबर के बाद खुल सकता है VTR, अब 40 तक हुए बाघ; 2018 के सर्वे में PMO ने Very Good कहा था, इस बार कोरोना की वजह से नहीं आई टीम

बगहा5 महीने पहले

बिहार के इकलौते वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) में नौ साल में बाघों की संख्या 5 गुना हो गई है। बाघों की संख्या 40 तक हो सकती है, वहीं शावकों की संख्या बढ़कर 8 से 10 हो सकती है। बाघों को गिनने के लिए कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों से रिकॉर्ड किए गए वीडियो फुटेज देहरादून भेजे गए हैं। इस आधार पर बाघों की संख्या 40 होने की संभावना है। हालांकि अभी आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है। 15 अक्टूबर के बाद वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) की खुलने की संभावना है।

वन अनुसंधान संस्थान द्वारा हर चार साल पर देश के टाइगर रिजर्वों का सर्वे किया जाता है। कोरोना के चलते इस बार नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) की टीम समय से नहीं पहुंची है। NTCA की रिपोर्ट को प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने पेश किया जाता है। 2018-19 में वीटीआर को वेरी गुड का दर्जा दिया गया था।

VTR में मादा बाघिन के साथ खेलते उसके शावक।
VTR में मादा बाघिन के साथ खेलते उसके शावक।

मानसून सीजन के बाद खुलेगा VTR

कोरोना काल शुरू होते ही मार्च से जून तक औऱ फिर मानसून सीजन के कारण VTR बंद था, जिससे काफी नुकसान का सामना करना पड़ा। हालांकि प्रोटोकॉल का पालन करते हुए पिछले वर्ष इसे फिर से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया था। लेकिन पुनः कोरोना की दूसरी लहर में बंद कर दिया गया था।

आधुनिक सुविधाओं से लैस लक्जरी रिसॉर्ट बन रहा

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक हेमकांत ने बताया कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बिहार सरकार सैलानियों के लिए एक लक्जरी रिसॉर्ट बनवा रही है। गंडक नदी के किनारे प्रकृति के बीच 5 एकड़ भूमि पर आधुनिक सुविधाओं से लैस रिसॉर्ट निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

बिहार पर्यटन निगम के कार्यपालक अभियंता कमलेश शर्मा, सहायक अभियंता अमरेंद्र अजय और वास्तुविद अभिषेक की टीम ने स्थल का दौरा कर डिजाइन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

990 वर्ग किलोमीटर में फैला है VTR

बेतिया जिले में स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व 990 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यहां बाघ के दीदार के साथ ही प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता है। गंडक नदी की खूबसूरती पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है तो वहीं ऐतिहासिक, धार्मिक व पौराणिक स्थलों को अपने आप में समेटे वाल्मीकि नगर हर वक्त पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है।

यहां नेपाल की पहाडिय़ों से निकलकर वाल्मीकि नगर के मैदानी इलाके तक बहने वाली गंडक नदी में नौका विहार, पक्षियों का कलरव, खुले जंगल में भ्रमण के दौरान बाघ व अन्य वन्य जीवों का दीदार सैलानियों के लिए अत्यन्त रोमांचकारी होता है।

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