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ये आराम का दर्द है:राजगीर की वादियों में पालकी पड़ी है, कंधे इंतजार कर रहे, मगर लोग नहीं आ रहे

नालंदा2 वर्ष पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद
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  • राजगीर में जनवरी के महीने में तो फुर्सत नहीं रहती थी, लेकिन इस बार सिर्फ दर्द है
  • लोगों के दिल और दिमाग से अभी कोरोना का भय नहीं निकला है

राजगीर में चंद्रवंशी जाति के 190 लोग कंधे के दर्द से परेशान हैं। दर्द की वजह मेहनत नहीं, बल्कि आराम है। पर्यटकों को पालकी से राजगीर की ऊंची पहाड़ियों पर ले जाने वाले उनके कंधे खाली हैं। काम ही नहीं मिल रहा है। कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन ने उन्हें यह दर्द दिया है। बेकार बैठे-बैठे उनके कंधे और घुटनें जकड़ गये हैं। शारीरिक के अलावा परेशानी मानसिक भी है। जिस पालकी से उनके बच्चे पलते थे, घर में दो वक्त की रोटी आती थी, वह पड़ी-पड़ी धूल फांक रही है। आराम के इस दर्द ने पूरे समुदाय का भविष्य मुश्किल में डाल दिया है।

कहारों की परेशानी, उन्हीं की जुबानी

कहार महादेव चंद्रवंशी ।
कहार महादेव चंद्रवंशी ।

कमाई का कोई दूसरा साधन नहीं : महादेव चंद्रवंशी की उम्र 63 साल है। उनके सामने रोजी-रोटी की समस्या है वे हर दिन आनंदा बीबी जैन सनातन धर्मशाला के पास पहुंचते हैं, लेकिन पालकी से पहाड़ों की सैर करने वाला कोई पर्यटक आता ही नहीं। वे बताते हैं कि कंधे में दर्द हो रहा है, पैर और कमर में भी दर्द है। वे कहते हैं कि 10-11 माह से हम बैठे हुए हैं। कमाई का कोई दूसरा साधन नहीं है। थोड़ी बहुत खेती है उसी से परिवार किसी तरह चल रहा है। महादेव चंद्रवंशी बताते हैं कि हमलोग 190 की संख्या में हैं, जो पालकी उठाकर लोगों को पहाड़-पहाड़ घुमाते हैं। अब तो पहाड़ पर आगे जाने की सुविधा है, पहले तो काफी दिक्कत होती थी।

नहीं खत्म हुआ कोरोना का डर
कई सालों से राजगीर के ये 190 लोग हर दिन देशी- विदेशी पर्यटकों को यहां की पांच पहाड़ियों की सैर पालकी से कराते हैं, लेकिन पिछले 22 मई से वैसे पर्यटक ही नहीं आ रहे, जो पहाड़ों की सैर करने की इच्छा रखते हैं। कोरोना का भय लोगों के अंदर से अभी तक नहीं निकला है। नतीजा पालकी ढ़ोने वालों को आराम का दर्द होने लगा है।

कैसे चलता था पहले कारोबार
पालकी से पर्यटकों को पहाड़ों की सैर कराने के लिए वजन के हिसाब से रुपए लिए जाते हैं। कोई 100 किलो वजन का पर्यटक है तो उसे पालकी से ले जाने के लिए चार लोगों की जरूरत होगी। सामान्य पालकी में 75 किलो वजन के व्यक्ति को ले जाया जाता है। इससे ज्यादा वजन के व्यक्ति को ले जाने के लिए कुर्सी पालकी तैयार की जाती है। 50 किलो वजन के व्यक्ति को दो पहाड़ घुमाने के लिए 900 रुपए लगते हैं। 10 किलो वजन बढ़ने पर 100 रुपए बढ़ता जाएगा। पर्यटकों को पहाड़ पर चाय-पानी भी मिलता है। हर साल अक्टूबर से मार्च तक काफी पर्यटक आते हैं, लेकिन इस बार क्या होगा पता नहीं। जनवरी के महीने में तो फुर्सत नहीं रहती थी, लेकिन इस बार सिर्फ दर्द है।

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