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नवादा वन प्रमंडल में करप्शन पर सरकार को नोटिस:पटना हाईकोर्ट ने PIL पर 4 हफ्ते में बिहार सरकार से जवाब मांगा; RTI करने वाले पर केस कर DFO ने भिजवाया था जेल

पटना3 महीने पहले
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चीफ जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एम कुमार ने यह नोटिस जारी किया है। - Dainik Bhaskar
चीफ जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एम कुमार ने यह नोटिस जारी किया है।

नवादा और कौआकोल में बड़े पैमाने पर जंगलों की अवैध कटाई के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर बिहार सरकार से चार हफ्ते में जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि नवादा वन प्रमंडल और कौआकोल में बड़े पैमाने पर अवैध कटाई के साथ ही विभाग में भ्रष्टाचार हो रहा है। नवादा से इस मामले में आवाज उठाने वाले सुशील कुमार पर DFO द्वारा कई केस दर्ज कर दिया गया है। इसके बाद हाईकोर्ट के वकील प्रभात भारद्वाज ने इसी मामले में PMO तक को पत्र लिख इसकी जानकारी दी है। उनके द्वारा ही दायर जनहित याचिका पर आज चीफ जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एम कुमार ने यह नोटिस जारी किया है।

क्या है मामला

नवादा वन प्रमंडल में वनों के क्षेत्रीय प्रभारी अवधेश झा पर पूर्व में ही आय से अधिक सम्पति को लेकर विजिलेंस केस संख्या 1/2017 (स्पेशल केस नम्बर 16/2017) दर्ज है, जिसमें उन्हें अंतरिम राहत मिली हुई है। उनको लेकर कई शिकायतें होती रही हैं, मगर कोई कार्रवाई या जांच फाइनल स्टेज तक नहीं पहुंच सकी।

नवादा के ही रहने वाले सुशील कुमार ने जब इस मामले की शिकायत जब तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सह वन एवं पर्यावरण मंत्री से की और सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी, तब DFO नवादा द्वारा एक दर्जन मुकदमे कर सुशील को जेल भिजवा दिया गया। सुशील कुमार द्वारा दर्ज शिकायत पर 12 जून 2020 को राकेश कुमार, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (कैम्पा) सह नोडल पदाधिकारी, वन संरक्षण, बिहार द्वारा जानकारी एफिडेविट के साथ मांगी गई।

इसी बीच सरकार के संयुक्त सचिव कन्हैया प्रसाद श्रीवास्तव द्वारा भी 17 जून 2020 को शपथ पत्र के साथ जानकारी मांगी गई। 22 जून 2020 को सुशील कुमार द्वारा शपथ पत्र उपलब्ध करा दिया गया। इसके बाद वन विभाग के वरीय अधिकारियों के नेतृत्व में एक जांच दल ने लगाए गए आरोपो के बिंदुवार जांच के लिए नवादा वन प्रमंडल का निरीक्षण किया, किंतु जांच में क्या आया इसको सार्वजनिक नही किया गया, न ही कोई संतोषप्रद जबाब दिया गया। इसी बीच सुशील कुमार जेल चले गए और मामला दब गया।

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