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कोरोना पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई:जज ने अधिकारियों से कहा - तैयारी के सरकारी आंकड़े अपने पास रखिए, हमें इनपर भरोसा नहीं

पटना6 महीने पहले
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गुरुवार को पटना हाईकोर्ट में सरकार के बड़े अधिकारियों की काफी फजीहत हुई। बिहार में कोरोना के बढ़ते खतरों और उनपर काबू किए जाने के सरकारी दावों के संबंध में दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई चल रही थी। इसपर जवाब देने के लिए पहले स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव, DGP आदि को तलब किया गया था। बाद में राज्य सरकार के वकील भी बुलाए गए। राज्य सरकार की तरफ से जब अधिकारियों ने सरकारी तैयारी का आंकड़ा दिखाया तो कोर्ट ने कहा कि इन्हें आप अपने पास ही रखिए। हमें आपके आंकड़ों पर भरोसा नहीं है। कोर्ट खुद के कड़वे अनुभव से आपके आंकड़े को गलत करार दे सकती है। कोर्ट ने इन्हें राज्य के अस्पतालों में ऑक्सीजन, दवाइयों की लगातार आपूर्ति पर पूरी जानकारी देने को कहा था।

दिन में दो बार हुई थी सुनवाई

हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह व न्यायमूर्ति मोहित शाह की खंडपीठ एक लॉ छात्रा शिवानी कौशिक की चिट्ठी पर स्वतः दायर हुई जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। मामले में पहली बार दोपहर बारह बजे स्वास्थ्य महकमे के प्रधान सचिव, DGP सहित अन्य आला अफसरों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर तलब किया गया। कोर्ट ने अधिकारियों को शाम पांच बजे तक वस्तुस्थिति से अवगत कराने का निर्देश दिया। कोर्ट ने इनसे कई मुश्किल सवाल पूछे जो राज्य में तेजी से फैल रहे कोरोना महामारी की तुलना में सरकार की मंद तैयारी को लेकर थी। कोर्ट के सवालों से हलकान हुए अफसरों को फौरन एक उच्च स्तरीय कमिटी गठित करने का निर्देश दिया गया जो इस आपात स्थिति से निपटने में सरकार की तरफ से सभी शक्तियों का इस्तेमाल करने में सामर्थ्यवान हो।

शाम 5 बजे फिर शुरू हुई सुनवाई 7:30 तक चली

दूसरी बार की सुनवाई में केंद्र व राज्य सरकार के वकील मौजूद थे। राज्य सरकार की तरफ से जब आला अफसर कोर्ट को सरकारी तैयारी का आंकड़ा दिखाने लगे तो खंडपीठ ने तल्खी से कहा कि हमें आपके आंकड़ों पर भरोसा नहीं है। कोर्ट खुद के कड़वे अनुभव से आपके आंकड़े को गलत करार दे सकती है, इसलिए आप आंकड़े अपने पास ही रखें तो बेहतर होगा।

ऑक्सीजन सप्लाई पर सवाल-जवाब
कोर्ट ने आदेश दिया कि राज्य के किसी भी अस्पताल व स्वास्थ्य संस्थानों में ऑक्सीजन की आपूर्ति किसी भी सूरत में बाधित न हो। इस क्रम में राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट को आश्वासन दिया गया कि राज्य के अस्पतालों में नियमित तौर पर जरूरत के अनुसार ऑक्सीजन की आपूर्ति निर्बाध रुप से की जाएगी। कोर्ट को बताया गया कि वर्तमान में ऑक्सीजन की आपूर्ति बोकारो, जमशेदपुर (दोनों झारखंड) और कोलकाता (पश्चिम बंगाल) से हो रही है।रोजाना ऑक्सीजन लाने के लिए सुधा दूध के भारी वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

बेड की कमी पर सवाल-जवाब
बेड की कमी पर भी कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि पटना के मेदांता अस्पताल और बिहटा के कोविड अस्पताल को युद्ध स्तर पर 24 घण्टे के अंदर तैयार किया जाए। इसी तरह हर जिलों व सदर अस्पतालों में भी कोरोना मरीजों के लिए बेड बढ़ाने की रिपोर्ट रोजाना कोर्ट में पेश की जाए।

बीते साल दाखिल हुई थी PIL, अगली सुनवाई 17 को

लॉ छात्रा द्वारा इस जनहित याचिका को पिछले साल ही दायर किया गया था। अब एक बार फिर सूबे में कोरोना के बढ़ते कहर और चरमराती स्वास्थ सेवाओं पर छपी खबरों के मद्देनजर कोर्ट ने इस मामले में आपात तौर पर गुरुवार को सुनवाई की। अगली सुनवाई 17 अप्रैल यानी शनिवार को शाम चार बजे होगी। आज ही एक अन्य जनहित याचिका दायर हुई, जिसमें सभी DM और सिविल सर्जन को भी प्रतिवादी बनाया गया है। दोनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई।

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