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पटना हाई कोर्ट की नाराजगी कायम:जजों ने कहा- हम शर्मिंदा हैं, पहले कड़े फैसले लेते तो जानें बच जाती, 48 घंटे में स्थिति सुधारें वरना सेना उतारें

पटना7 दिन पहले
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पटना हाईकोर्ट ने बीते 16 अप्रैल को इस मामले में सुनवाई शुरू की थी। - Dainik Bhaskar
पटना हाईकोर्ट ने बीते 16 अप्रैल को इस मामले में सुनवाई शुरू की थी।

बिहार सरकार के कोरोना नियंत्रण के उपायों पर सुनवाई कर रही पटना हाई कोर्ट ने मंगलवार को बेहद सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने बिहार सरकार को 48 घंटे की 'अंतिम मोहलत' देते हुए कहा है कि ऑक्सीजन-बेड की व्यवस्था सुधारें। ऐसा नहीं हुआ तो कोर्ट को सेना की मदद लेने का निर्देश देना होगा। इससे पहले बिहार सरकार के वकील ने जानकारी दी कि बुधवार से राज्य में लॉकडाउन लगाने का फैसला कर लिया गया है। हालांकि यह जानकारी मिलने के बावजूद कोर्ट ने सरकार के रवैए पर नाराजगी जताई।

'हम शर्मिंदा हैं, कड़े फैसले लेने चाहिए थे'

पटना हाई कोर्ट में जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह व जस्टिस मोहित कुमार शाह की खंडपीठ लॉ स्टूडेंट की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने आज इसी क्रम में सुनवाई के दौरान कई सख्त टिप्पणियां की। कहा कि यह कोर्ट शर्मिंदा है, उसने शुरू में सरकार के आंकड़ों व दिलासे पर विश्वास किया। अगर शुरू में ही 'कड़े निर्देश' देते तो शायद अधिकतर लोगों को उनके जीवन जीने के मौलिक अधिकार से वंचित नहीं होना पड़ता।

सरकार के वकील ने मांगा अंतिम मौका

कोर्ट द्वारा सेना की मदद लेने वाले बयान पर बिहार सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता ललित किशोर ने आपत्ति जताई। उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार इस महामारी से युद्ध स्तर पर निपट रही है। हर दिन और हर हफ्ते सरकार कोविड मरीजों के लिए ऑक्सीजन व बेड बढ़ाने में लगी है। उन्होंने महाराष्ट्र और केरल में कोरोना संक्रमण और उससे हुई मौतों की तुलना बिहार से की और कहा कि उन दोनों राज्यों में अधिक संसाधन होते हुए भी बिहार से ज्यादा मौतें हुई हैं।

इस पर खंडपीठ ने क्रोधित होते हुए कहा कि नागरिकों की मौत की कोई तुलना नहीं हो सकती। महाधिवक्ता ने कहा कि नागरिकों की मौत का उन्हें भी दुख है, तो कोर्ट ने कहा, 'आप को दुखी अवश्य होना चाहिए। लेकिन इस बात पर भी दुखी होइए कि जैसा कोर्ट ने जैसा निर्देश दिया, वैसा काम सरकार नहीं कर सकी। गंभीर होते हालात पर जितना जल्दी रिस्पॉन्स मिलना चाहिए था, उतना नहीं हुआ। नतीजतन दिन बीतते गए और सूबे में कोविड संक्रमण और उससे हुई मौतों ने भयावह रूप ले लिया।

इसके बाद ललित किशोर ने कोर्ट से एक अंतिम अवसर मांगते हुए कहा कि गुरुवार तक कुछ कोविड डेडिकेटेड अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट काम करने लगेगा। अगले 48 घंटे में बेड और ऑक्सीजन की आपूर्ति ज़रूर बढ़ेगी। हाई कोर्ट ने सरकार को अंतिम अवसर देते हुए मामले की सुनवाई को 6 मई के लिए मुल्तवी किया। अगली सुनवाई गुरुवार को 11 बजे होगी।

16 अप्रैल से हाईकोर्ट में सुनवाई जारी

बीते 16 अप्रैल को पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई शुरू की थी। एक लॉ छात्रा द्वारा जनहित याचिका को पिछले साल ही दायर किया गया था। अब एक बार फिर सूबे में कोरोना के बढ़ते कहर और चरमराती स्वास्थ सेवाओं पर छपी खबरों के मद्देनजर कोर्ट ने इस मामले में आपात तौर पर सुनवाई की। कोर्ट ने आदेश दिया था कि राज्य के किसी भी अस्पताल व स्वास्थ्य संस्थानों में ऑक्सीजन की आपूर्ति किसी भी सूरत में बाधित न हो। इसी तरह हर जिलों व सदर अस्पतालों में भी कोरोना मरीजों के लिए बेड बढ़ाने की रिपोर्ट रोजाना कोर्ट में पेश की जाए।

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