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पटना हाई कोर्ट में पाटलिपुत्र स्टेशन मामले में हुई सुनवाई:राज्य सरकार और रेलवे को प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश, हलफनामा दायर करने का भी आदेश

पटना8 दिन पहले
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पटना हाई कोर्ट ने पाटलिपुत्र रेल स्टेशन को सभी ओर से जोड़ने वाली सड़कों के निर्माण के मामलें पर मंगलवार को सुनवाई करते राज्य सरकार व रेलवे को प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। भरत प्रसाद सिंह की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल व न्यायमूर्ति एस कुमार की खंडपीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य सरकार और रेलवे को हलफनामा दायर कर यह बताने को कहा कि पाटलीपुत्र रेलवे स्टेशन को जोड़ने वाली सड़कों के निर्माण को लेकर अभी तक क्या कार्रवाई की गई है।

यात्रियों को होगी सुविधा
कोर्ट को रेलवे की ओर से बताया गया कि सड़क निर्माण के लागत में खर्च होने वाली 50 फ़ीसदी धनराशि की स्वीकृति के संबंध में रेलवे बोर्ड के समक्ष मामला लंबित है। पिछ्ली सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने सभी सम्बंधित अधिकारियों की बैठक बुलाई व पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन को चारों ओर से जोड़ने की योजना पर विचार किया। इन सड़कों के निर्माण का कार्य पूरा होने पर सभी ओर से यात्रियों को स्टेशन आने में सुविधा हो जाएगी। सुनवाई के क्रम में कोर्ट को बताया गया कि एन टी पी सी रोड से पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन तक जोड़ने की योजना बनायीं गयी है। इस सड़क की लम्बाई 600 मीटर और चौडाई 22 मीटर होगी।

एलिवेटेड रोड भी स्टेशन तक लाने की योजना
आशियाना नगर कॉलोनी मोड, रामनगरी मोड और मजिस्ट्रेट कॉलोनी रोड शामिल है। इसमें 76.47 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसमें भूमि अधिग्रहण का व्यय भी शामिल हैं। इसके साथ ही पटना एम्स के एलिवेटेड रोड को पाटलीपुत्र रेलवे स्टेशन तक ले जाने की योजना भी है, ताकि यात्री सीधे स्टेशन पहुंच सके। इसमें 94.52 करोड़ रुपये का व्यय होगा। यह नेहरू पथ और पाटलीपुत्र रेलवे स्टेशन को मिलाएगा।

पश्चिम की तरफ से दानापुर और गोला रोड की ओर से आने वाले यात्रियों के लिए नहर की सड़क को चौड़ा किये जाने और फुट ओवर ब्रिज बनाने की योजना हैं। इसमें 10.86 करोड़ रूपये खर्च होंगे। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सत्यम शिवम सुंदरम ने बताया कि पाटलिपुत्र स्टेशन का निर्माण तो काफी पहले ही हो गया था, लेकिन वहां तक सभी ओर से पहुंचने के लिए सड़कें नहीं होने के कारण यात्रियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले पर तीन सप्ताह बाद पुनः सुनवाई की जाएगी

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