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माता के अनूठे भक्त, अब खुद श्रद्धा का केंद्र बने:पटना का एक मंदिर, जहां भक्त के दर्शन करने आते हैं दर्शनार्थी, छाती पर 21 कलश रख नवरात्र में 25 साल से कर रहे पूजा

पटनाएक महीने पहले
9 दिन निर्जला व्रत का पालन करने के लिए बाबा नागेश्वर बाबा नवरात्र शुरू होने के 2 दिन पहले खाना-पानी छोड़ देते हैं।

शारदीय नवरात्र का आज आखिरी दिन नवमी है। भगवान के भक्तों की भक्ति का तरीका भी अलग-अलग होता है। नवरात्र में लोग अलग-अलग तरह से अनुष्ठान करते हैं। घरों में कलश स्‍थापना होती है। कुछ लोग पूरे नौ दिन, तो कुछ लोग चढ़ती-उतरती यानी पहली और अष्टमी को उपवास रखते हैं, लेकिन पटना में एक भक्त ने नवरात्र को अपनी पूरी जिंदगी दे दी है।

9 दिन के व्रत के लिए 11 दिन रहते हैं निर्जला
पटना के न्यू सचिवालय के पास है माता का नौलखा मंदिर। इस मंदिर में हर साल दुर्गा पूजा के समय भक्तों की खूब भीड़ लगती है। वजह माता की मूर्ति नहीं, भक्त के दर्शन करना होता है। ये भक्त हैं, बाबा नागेश्वर। छाती पर 21 कलश लिए पूरे नौ दिन तक जमीन पर लेट कर बाबा नागेश्वर नवरात्र में मां की आराधना 25 साल से कर रहे हैं।

बाबा नागेश्वर अब खुद भक्तों की आस्था के केंद्र बन गए हैं।
बाबा नागेश्वर अब खुद भक्तों की आस्था के केंद्र बन गए हैं।

9 दिन निर्जला व्रत का पालन करने के लिए ये नवरात्र शुरू होने के 2 दिन पहले खाना-पानी छोड़ देते हैं। उपवास खत्म होने के बाद भी बाबा नागेश्वर को सामान्य खान-पान पर लौटने में कई दिन लग जाते हैं। बाबा नागेश्वर की मानें तो नवरात्र ने उनका पूरा जीवन बदल दिया। उपवास में परेशानी न हो, इसके लिए वो पिछले कई सालों से हमेशा के लिए एक वक्त का खाना खा रहे हैं।

कभी मंदिर के आस-पास की दुकानों में बांटते थे पानी
जमीन पर लेटे बाबा नागेश्वर के पैर छूने अब बड़े-बड़े लोग आते हैं। वजह है उनका कठिन उपवास, जिसने उन्हें आम से खास बना दिया है। कभी नौलखा मंदिर की सफाई करने वाले और मंदिर के आस-पास की दुकानों में पानी देने का काम करने वाले बाबा नागेश्वर अपने कठिन व्रत को माता के आशीर्वाद का परिणाम मानते हैं। बाबा नागेश्वर ने 25 साल पहले छाती पर 7 कलश रखकर नवरात्र का उपवास शुरू किया था। बताते हैं, तब इतने पैसे भी नही थे कि कलश खरीद सकूं। तब जन सहयोग से कलश लिया और उपवास शुरू किया।

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