PU ने अतिथि शिक्षकों को दिया 11 माह का एक्सटेंशन:4 जून को प्रक्रिया शुरू, 18 जून को अधिसूचना जारी, भास्कर ने पहले ही बताया था कि एक्सटेंशन नहीं मिला तो बेपटरी हो जाएगी शैक्षणिक व्यवस्था

पटना6 महीने पहले
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पटना यूनिविर्सटी। - Dainik Bhaskar
पटना यूनिविर्सटी।

शिक्षा विभाग द्वारा 13 अप्रैल 2021 को जारी किए गए नए संकल्प के आधार पर बिहार के विश्वविद्यालयों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों को 11 महीने के एक्सटेंशन के साथ अधिकतम 50 हजार मानदेय का भुगतान करना है। इस बीच पटना विश्वविद्यालय ने 4 जून को प्रक्रिया शुरू कर दी और 18 जून को अधिसूचना जारी कर दी। यानी, 14 दिनों के अंदर मानकों के अनुरूप चयन समिति की अनुशंसा के आधार पर प्रक्रिया पूरी करने वाला बिहार का पहला विश्वविद्यालय बना गया। भास्कर ने अपनी खबर में बताया था कि पटना विश्वविद्यालय में शिक्षकों के 70 फीसदी पद रिक्त हैं और अगर समय रहते यहां अतिथि शिक्षकों को एक्सटेंशन नहीं मिला तो पीयू के शैक्षणिक माहौल को पटरी पर लाना बेहद मुश्किल होगा।

भास्कर ने 29 मई को प्रकाशित की थी खबर

भास्कर ने 29 मई को खबर प्रकाशित की थी कि अतिथि शिक्षकों को जल्द एक्सटेंशन नहीं मिला तो शैक्षणिक माहौल बनाए रखना मुश्किल होगा। खबर प्रकाशित होने के बाद एक्सटेंशन देने की प्रक्रिया तेज हो गई और 18 जून को अधिसूचना जारी कर दी गई। पटना विश्वविद्यालय में काम करने वाले अतिथि शिक्षकों का टर्म 30 अप्रैल को पूरा हो चुका था। इसलिए नियमत: मई में गर्मी छुट्टी होने के साथ लॉकडाउन होने की वजह से इन्हें एक्सटेंशन नहीं दिया जा सकता था।

पीयू को छोड़ बाकी में एक्सटेंशन का इंतजार

बिहार के अन्य विश्वविद्यालय अपने यहां कार्यरत अतिथि शिक्षकों को एक्सटेंशन देने में अभी भी पीछे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द सभी विश्वविद्यालय भी प्रक्रिया पूरी कर लेंगे। गौरतलब है कि बिहार के पारंपरिक विश्वविद्यायलों का संचालन बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 और समय-समय पर होने वाले उनमें संशोधन के आधार पर होता है, जबकि पटना विश्वविद्यालय के लिए अलग एक्ट है।

असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती प्रक्रिया में देर पर देर

बिहार के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के ज्यादातर पद रिक्त हैं। बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग अब तक असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए आवेदन की स्क्रूटनी भी पूरी तरह से नहीं कर पाया है। लॉकडाउन से इसमें लगातार देर हो रही है। न्यायिक मामले भी इसमें देर कर सकते हैं। ऐसे में सभी विश्वविद्यालयों के लिए जरूरी है कि वे अतिथि शिक्षकों को एक्सटेंशन दें।

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