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पटना की एक कॉलोनी हर साल डूबती है:गंगा के रास्ते पर 6 साल पहले सरकार ने बिंद टोली को बसाया, अब हर साल बाढ़ उजाड़ देती है आशियाना

पटना5 महीने पहले
उफनती गंगा में डूब गया बिंद टोली इलाका।

पटना में बाढ़ के पानी से गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है। प्रशासन ने नालों को बंद कर दिया है, ताकि शहर में पानी नहीं घुसे। जिला प्रशासन दिन-रात गंगा बांध की निगरानी कर रहा है, लेकिन पटना की एक कॉलोनी ऐसी भी जो हर साल बाढ़ से बेहाल रहती है। कॉलोनी को 6 साल पहले सरकार ने बड़े ताम-झाम से बसाया था। यह है बिंद टोली। यह टोला गंगा के बीचों-बीच बसा है। आबादी करीब एक हजार है। इससे पहले यह लोग दीघा में रहते थे। 2015 में दीघा रेल पुल निर्माण के लिए इन्हें अपने पुराने घर को छोड़ना पड़ा।

नाव से बिंद टोली जाती महिलाएं।
नाव से बिंद टोली जाती महिलाएं।

विस्थापितों को जिला प्रशासन की तरफ से बसने के लिए नई जगह दी गई। और वह जगह थी गंगा का रास्ता। गंगा के पटना से दूर होने से निकले इस भू-भाग पर यूं तो साल के 9 महीने सब सामान्य रहता है, लेकिन जैसे ही बरसात के दिनों में गंगा में पानी बढ़ता है बिंद टोली जलसमाधि ले लेती है। यहां के लोग बांध पर प्लास्टिक शेड के नीचे रात गुजारते हैं।

आटा की बोरी लेकर नाव में जाती बिंट टोली की दरमी देवी।
आटा की बोरी लेकर नाव में जाती बिंट टोली की दरमी देवी।

नाव पर सवारी करने को मजबूर हैं बिंद टोली के लोग
बिंद टोली की दरमी देवी 20 किलो के आटा की बोरी लेकर नाव में सवार दिखी। भास्कर ने जब उनसे पूछा- डर नहीं लगता ?, तो उनका जवाब था- 'क्या करें सरकार ने बहने के लिए ही बसा दिया है तो कितना डरें'। दरमी अपने पूरे परिवार के साथ गंगा के बीचों बीच बांध पर रह रही हैं। पशु , इंसान सब प्लास्टिक के शेड के नीचे हैं।

पीने का पानी भरने के लिए नदी को पार कर आना पड़ रहा है। जो चल फिर सकते हैं वो तो नाव से आना-जाना कर लेते हैं, लेकिन जो चलने से मजबूर हैं। वो इसी तरह रोड पर जिंदगी गुजार रहे हैं। जयकिशुन राय बीते 1 सप्ताह से दीघा-कुर्जी रोड पर खड़े ऑटो में रात गुजारते हैं। कहते हैं- 'करें तो क्या दोनों पैरों में फाइलेरिया है। झोपड़ी में कमर तक पानी भरा है। बेटा-बहू तो उसी झोपड़ी में लकड़ी पर सो लेते हैं, लेकिन मैं कैसे जाऊं उसमें। इसलिए ऑटों में रहता हूं'।

ऑटो में रहने को मजबूर हैं बुजुर्ग जयकिशुन राय।
ऑटो में रहने को मजबूर हैं बुजुर्ग जयकिशुन राय।

हर साल डूबती है बिंद टोली, लेकिन मुआवजा मिलता है कभी-कभी
बिंद टोली का डूबना कोई एक साल की कहानी नहीं, हर साल यहां यही होता है। बाढ़ आने पर बिंद टोली के लोग ऐसे ही अपने-अपने घरों को छोड़कर बांध पर शरण लेते हैं। जब पानी ज्यादा बढ़ता है तो जिला प्रशासन बाढ़ राहत का काम शुरू करता है। सामूहिक किचेन में खाने की व्यवस्था होती है और बाढ़ राहत का मुआवजा मिलता है, लेकिन कुछ साल ऐसे भी रहे जब मुआवजा नहीं मिल सका। इसकी वजह यह है कि प्रशासन बाढ़ घोषित तभी करता है जब गंगा का पानी खतरे के निशान से ऊपर हों। बिंद टोली के घरों में कई साल तब भी पानी घुस जाता है जब गंगा खतरे के निशान से नीचे होती है।

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