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PMCH में खुल रही सिस्टम की पोल:बुखार से तप रहे बच्चों को गोद में लेकर भटक रहे परिजन, इलाज तो दूर मरीजों को ट्रॉली तक नहीं मिल पा रही

पटना4 महीने पहले
PMCH में राज्य के अलग- अलग जिलों से बच्चों को लेकर आने वाले परिजन परेशान हैं।

वायरल बुखार के बढ़ते मामलों के बीच पटना के सबसे बड़े अस्पताल से सिस्टम की पोल खुल रही है। PMCH बिहार के अलग-अलग जिलों से बच्चों को लेकर आने वाले परिजन परेशान हैं। बुखार से तप रहे बच्चों को लेकर परिवार वाले अस्पताल में भटक रहे हैं। इलाज तो दूर बच्चों के लिए न ट्रॉली है और न ही एम्बुलेंस।

वैशाली के राम अलख का दर्द
वैशाली के राम अलख का दर्द भी सिस्टम की पोल खोल रहा है। उनका कहना है कि 10 साल का बेटा राजकुमार को 20 दिन पहले काफी तेज बुखार आ गया था। बुखार के कारण वह बेहोश हो गया। इसके बाद PMCH में 15 दिन पहले इलाज के लिए लाया गया। डॉक्टरों ने चमकी बुखार का अटैक बताया। बताया बच्चा कोमा में चला गया है। कोमा से बच्चा जल्दी भी बाहर आ सकता है और लंबा समय भी लग सकता है। अब डॉक्टर ने एक बार फिर जांच के लिए लिखा, लेकिन ट्रॉली तक की व्यवस्था नहीं हो रही है, जिससे वह बच्चे को लेकर जांच के लिए जाए।

दर्द से खुल रही व्यवस्था की पोल
सोनपुर के शैलेश का कहना है कि उसका 4 माह का बच्चा एक महीने के बुखार से टूट गया है। जन्म के 3 माह बाद तक वह तक वह ठीक रहा, लेकिन अब बुखार से परेशान है। लगातार उसे फीवर आ रहा है। वह पिछले 9 दिन तक PMCH में बच्चे को एडमिट कराया। ठीक होने के बाद जब घर ले गया तो कुछ दिनों बाद फिर से फीवर आने लगा। वह परेशान होकर फिर PMCH आया। वह 5 दिनों से बच्चे को एडमिट कराया है। बच्चे को खांसी-बुखार के साथ-साथ सांस की शिकायत है। अब PMCH के डॉक्टरों का कहना है कि उसे चमकी बुखार है। शैलेश का कहना है कि किस तरह से इलाज हो रहा है, जो बार-बार बच्चे को बुखार हो रहा है, वह समझ नहीं पा रहा है।

250 से अधिक मरीज भर्ती
बिहार के सबसे बड़े अस्पताल PMCH के शिशु वार्ड में 276 बेड है। अस्पताल में लगभग 250 बच्चे भर्ती होने की बात कही जा रही है। इसमें 30 से 35 प्रतिशत मामले तेज बुखार वाले हैं। अस्पताल का शिशु इमरजेंसी वार्ड पूरी तरह से फुल है। वायरल बुखार के मामलों में 3 माह से लेकर 12 साल के बच्चे भर्ती हैं। शिशु वार्ड के कर्मियों की माने तो अस्पताल के शिशु OPD में प्रतिदिन 170 से 200 की संख्या में वायरल बुखार की शिकायत को लेकर मरीज आ रहे हैं। इनमें से 30 से 35 प्रतिशत बच्चों को प्रतिदिन वार्ड में एडमिट करना पड़ रहा है। अस्पताल की बच्चों की बीमारी को लेकर कोई जानकारी भी नहीं दे रहा है।

चमकी बुखार का बड़ा खतरा
वायरल फीवर, डेंगू, निमोनिया, मल्टी सिस्टमैटिक इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम, चमकी, टाइफाइड और सवाइन फ्लू के साथ कई तरह का वायरस लोगों को परेशान किए है। इस बीच में बिहार में चमकी को लेकर बड़ा खतरा है। कोरोना की तीसरी लहर को लेकर भी डर है।

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