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जीत के बाद भाजपा में गुटबाजी:विधायक सुशील मोदी पर राय देने बैठे रहे, लेकिन राजनाथ पटना पहुंचकर भी उनसे नहीं मिले

पटना7 महीने पहले
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पटना पहुंचकर सीधे NDA की बैठक में शामिल हुए।
  • सुशील मोदी को डिप्टी सीएम बनाने पर एकमत नहीं हैं भाजपा विधायक
  • भास्कर ने दीपावली की शाम को ही पार्टी में गुटबाजी का खुलासा किया था

बिहार में भाजपा जनता का मन पढ़ने में कामयाब रही, लेकिन अब पार्टी में गुटबाजी की खबरें हैं। पिछली सरकार में डिप्टी सीएम रहे सुशील कुमार मोदी के नाम पर पार्टी के जीते हुए विधायक एकमत नहीं हैं। भास्कर ने दिवाली की शाम को ही पार्टी में जारी गुटबाजी की खबर दे दी थी। रायशुमारी करने पर गुटबाजी उजागर न हो, शायद इसीलिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रविवार को पटना पहुंचकर भी पार्टी विधायकों से नहीं मिले।

भास्कर से बातचीत में पार्टी के सूत्रों ने कहा कि बिहार के जीते हुए विधायकों से पर्ची के जरिए राय ली जाती, तो कई विधायक सुशील कुमार मोदी का विरोध कर सकते थे। शनिवार शाम से ही इसको लेकर प्रदेश भाजपा में गुटबाजी चरम पर थी।

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सुबह से इंतजार में थे भाजपा विधायक
पटना में भाजपा के तमाम जीते हुए विधायक रविवार सुबह 10 बजे से राजनाथ सिंह के आने का इंतजार कर रहे थे। पार्टी के प्रदेश कार्यालय में रायशुमारी को लेकर खासी गहमागहमी थी। लेकिन, दोपहर 12 बजे प्रदेश के सभी बड़े नेता अचानक सीएम आवास में होने वाली NDA की बैठक के लिए रवाना हो गए। विधायकों से दस्तखत लेकर उपस्थिति की औपचारिकता पूरी कर ली गई।

राजनाथ सिंह पार्टी कार्यालय नहीं पहुंचे
विधायकों को बताया गया था कि राजनाथ सिंह सुबह 10 बजे से उनकी बैठक में पहुंचेंगे। इसके बाद साढ़े 11 बजे का समय दिया गया। 11:40 पर राजनाथ पटना पहुंच भी गए, लेकिन उनका काफिला मुख्यमंत्री आवास की तरफ मुड़ गया। राजनाथ के काफिले का रुख एक बार फिर बदला और वे स्टेट गेस्ट हाउस चले गए। इसके बाद साढ़े बारह बजे सीधे NDA की बैठक में शामिल हुए।

20 मिनट में हो सकती थी रायशुमारी
पटना एयरपोर्ट से भाजपा कार्यालय की दूरी महज 5 मिनट की है। रायशुमारी के लिए पहुंचे विधायकों ने कहा कि राजनाथ यहां 12 बजे भी आते, तो 20 मिनट में जीते हुए विधायकों की राय ले सकते थे। लेकिन, उन्होंने ऐसा नहीं किया।

विधायकों ने बदलाव की बात कही
भास्कर से बातचीत में एक विधायक ने सुशील कुमार मोदी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन नेतृत्व में बदलाव और नीतीश की छाया से निकलने की बात जरूर कही। कई विधायकों ने अपनी कुर्सी पर बैठे हुए ही आवाज लगाई कि बदलाव तो होना ही चाहिए। इधर, संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि NDA की बैठक ज्यादा महत्वपूर्ण थी, इसलिए कार्यक्रम में बदलाव हुआ।