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जिन्होंने हजारों कोरोना शव जलते देखे, वो कब समझेंगे?:पटना के उत्तरी मंदिरी में लोग बोले- यहां 1 KM इलाके में कोई संक्रमित नहीं हुआ, हम वैक्सीन क्यों लें

पटना4 महीने पहलेलेखक: शालिनी सिंह

कोरोना से जिंदगियों को बचाने के लिए बनी वैक्सीन, अंधविश्वास और अफवाहों का शिकार हो चली है। कोरोना से जुड़े अंधविश्वास की पड़ताल करने भास्कर उस मोहल्ले में पहुंचा, जहां के लोगों ने अप्रैल-मई में 2742 कोरोना मृतकों को जलते देखा है। मरने वालों के परिजनों की चीत्कार और सिसकियां सुनी हैं। इस मोहल्ले के लोगों को लगता है कि उन्हें कोरोना नहीं हो सकता।

बांस घाट स्थित उत्तरी मंदिरी में लोग वैक्सीन लेने से कर रहे इंकार

वैक्सीन को लेकर बिहार ही नहीं, पूरे देश में अलग-अलग अफवाहें हैं। हर किसी के पास इसे ना लेने की अपनी वजह है। लेकिन बिहार की राजधानी पटना के उत्तरी मंदिरी इलाके के लोगों का वैक्सीन नहीं लगवाने के पीछे जो तर्क है, वो सुनकर आप चौंक जाएंगे। लेकिन पहले जान लीजिए उत्तरी मंदिरी इलाका है कहां?

उत्तरी मंदिरी इलाका बांस घाट के ठीक सामने है। दोनों के बीच की दूरी बस एक सड़क की है। बांस घाट वही जगह है, जहां कोरोना मरीजों का अंतिम संस्कार सबसे पहले शुरू हुआ था। नगर-निगम के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से मई के दो महीनों में केवल इस घाट पर 2742 कोरोना मृतकों का शव जलाया गया।

इस मोहल्ले के लोग कोरोना से हुई मौतों के गवाह हैं, क्योंकि यहां रहने वालों में ऐसे लोगों की तादाद अच्छी है, जो किसी ना किसी तरह से श्मशान घाट से जुड़े कारोबार का हिस्सा हैं। फूल, रामनामी, लकड़ी बेचने वाले से लेकर शवों की अंत्येष्टी कराने वाले पंडित तक यहां रहते हैं। शवों को उठाकर चिता पर रखने वाले लोग भी यहां रहते हैं। पर सभी यही मानते हैं कि उन्हें कोरोना नहीं होगा, इसलिए वो वैक्सीन लेने को तैयार नहीं।

लोगों का दावा- एक किमी इलाके में नहीं हुआ किसी को कोरोना

उत्तरी मंदिरी के लोगों का दावा है कि उनके इलाके के एक किमी के दायरे में किसी को कोरोना नहीं हुआ। इसके पीछे वो चौंकने वाली वजह बताते हैं। कहते हैं, चूंकि वो लगातार संक्रमितों के संपर्क में रहे हैं, इसलिए अब कोरोना उन पर असर नहीं करेगा।

यहां फूल की दुकान पर बैठने वाले और इसी मोहल्ले में रहने वाले अमित कहते हैं - हम इन सब पर विश्वास नहीं करते... कभी मास्क नहीं लगाए... टीका भी अब तक नहीं लिए। लोग मेरे पास फूल लेने आते हैं। लेकिन आज तक कोरोना नहीं हुआ, अब क्या होगा। इसी तरह का जवाब यहां लकड़ी की दुकान पर खड़ा बिल्लू देता है। कहता है - मैंने कोरोना मरीजों के शव को बिना पीपीई किट पहने उठाया है, तब नहीं हुआ तो अब क्या होगा। इसीलिए टीका नहीं लेंगे।

दुकान पर मालिक के साथ पंडित जी भी मौजूद थे, उनका भी जवाब कुछ ऐसा ही था। श्मशान के बिजनेस से जुड़े लोगों की सोच का असर मोहल्ले के लोगों पर सीधा दिखता है. यही वजह है कि यहां के लोग भी टीका को लेकर उदासीन दिखते हैं।

बीमार नहीं तो क्यों ले टीका

वैक्सीन क्यों नहीं ले रहे, इसका जवाब लेने हम उत्तरी मंदिरी मोहल्ले के अंदर भी गए। यहां जिन लोगों से हमारी बात हुई, उनका कहना था, हम बीमार थोड़े ही हैं... हम टीका क्यों लें? कुछ ने कहा- मोबाइल पर बुकिंग होती है, हमें पता नहीं, कैसे कराएं। कई ने कहा, लॉकडाउन लगा है इसलिए नहीं गए।

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