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राजद-कांग्रेस में MLC चुनाव पर भी तनातनी:सबसे ज्यादा 23.11% वोट शेयर वाली पार्टी के नेता हैं तेजस्वी, झुकने को तैयार नहीं

पटना3 दिन पहले
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बिहार विधान परिषद की 24 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर कांग्रेस और राजद के बीच तनातनी है। महागठबंधन में शामिल दोनों पार्टियां उपचुनाव में अलग-अलग उम्मीदवार उतारकर अपना हश्र देख चुकी हैं, फिर भी तनातनी है। उपचुनाव में कांग्रेस-राजद साथ लड़तीं तो कम से कम तारापुर सीट पर महागठबंधन की जीत हो सकती थी।

दरअसल, दोनों पार्टियों के बीच यह तनातनी विधानसभा चुनाव 2020 के परिणाम के बाद से ही दिख रही है। कांग्रेस ने जिद करके 243 में से 70 सीटें ले लीं, लेकिन जीत हासिल कर पाईं महज 19 सीटों पर। इसके बाद राजद के अंदर से गुस्सा भड़का कि कांग्रेस की वजह से ही महागठबंधन की सरकार नहीं बन पाई और तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री नहीं बन सके। वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने तब कहा था, '50 सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ी होती तो महागठबंधन की सरकार बन जाती।'

हालांकि, कांग्रेस के कई नेता यह कहते रहे कि कांग्रेस को कमजोर सीटें दी गईं थीं। सवाल यह है कि जब कांग्रेस को कमजोर सीटें दी जा रही थीं तो इतनी सीटें कांग्रेस ने ली क्यों? मैदान में उतारने से पहले पहलवानी की जांच क्यों नहीं की? इसका जवाब सदाकत आश्रम में तब ही मिल गया था, जब कांग्रेस के ही कई नेताओं ने टिकटों की खरीद-फरोख्त के गंभीर आरोप लगाए थे और नारेबाजी की थी।

वोटिंग शेयर से साफ है राजद के बुलंद इरादों की वजह

विधानसभा चुनाव 2020 में राजद को 23.11%, जबकि कांग्रेस को 9.48% वोट मिले थे। जदयू को 15.39% और भाजपा को 19.46% वोट मिले। यानी सबसे दमदार वोट शेयर राजद का ही रहा था। इस लिहाज से राजद के इरादे बुलंद हैं। इसी के बलबूते राजद अपनी सहयोगी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस के दबाव में झुकने को तैयार नहीं है।

इन बुलंद इरादों पर क्या कहते हैं दोनों पार्टी के नेता

कांग्रेस नेता ऋषि मिश्रा कहते हैं कि पार्टी को अपने मजबूत उम्मीदवारों को सामने ला देना चाहिए। सिर्फ कई सारी सीटें लेने से बात नहीं बनती, बल्कि मजबूत उम्मीदवारों के लिए सीट लेना मायने रखता है। नेता के बच्चों, रिश्तेदारों को विधान परिषद चुनाव का टिकट देने से बात नहीं बनेगी।

वहीं, राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन कहते हैं कि NDA को हराने के लिए महागठबंधन के सभी दलों को अपनी-अपनी जमीनी हकीकत देखकर बात करनी चाहिए। राजद की जमीनी हकीकत यह है कि यह सबसे बड़ी पार्टी है और इसके पास वोट शेयर भी सबसे ज्यादा है। इसी तरह बाकी पार्टियों को भी अपना मूल्यांकन करके सीटों पर बात करनी चाहिए।

विधानसभा चुनाव के समय NDA और महागठबंधन की पार्टी में से किस पार्टी ने कितनी सीट पर चुनाव लड़ा और कितनी सीट पर जीत हासिल की थी, वह देखिए -

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