रुपेश हत्याकांड में दूसरा शूटर भी गिरफ्तार:50 दिन बाद गिरफ्तार हुआ गोली मारने वाला सौरभ उर्फ खरहा, दो अपराधी अब भी फरार

पटनाएक वर्ष पहले
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पुलिस की गिरफ्त में रुपेश को गोली मारने वाला शूटर। - Dainik Bhaskar
पुलिस की गिरफ्त में रुपेश को गोली मारने वाला शूटर।

पटना के इंडिगो स्टेशन हेड रुपेश सिंह को गोली ऋतुराज सिंह के साथ-साथ उसके सबसे खास दोस्त सौरभ कुमार उर्फ पवन उर्फ खरहा ने भी मारी थी। इस हाइप्रोफाइल मर्डर केस का यह दूसरा शूटर है, जिसे वारदात के 50 दिनों के बाद पटना पुलिस गिरफ्तार कर पाई है। राजधानी के ही कुम्हरार इलाके से वह पकड़ा गया है। उसके पास से एक रिवॉल्वर, 5 गोली, 3 खोखा, वारदात में इस्तेमाल की गई दूसरी बाइक और उस दौरान पहना हुआ जूता बरामद किया गया है। बरामद बाइक चोरी की है।

12 जनवरी की देर शाम हुई थी रुपेश की हत्या

12 जनवरी की देर शाम को शास्त्रीनगर थाना के तहत पुनाइचक के कुसुम विलास अपार्टमेंट के नीचे में रुपेश सिंह की गोली मारकर हत्या की गई थी। पटना के SSP उपेंद्र कुमार शर्मा का दावा है कि उनकी टीम की जांच और 72 घंटे के रिमांड के दौरान ऋतुराज से हुई पूछताछ में सौरभ का नाम सामने आया था। CCTV के बरामद फुटेज से भी इसकी पहचान हुई थी। यह मूल रूप से लखीसराय जिले के बड़हिया का रहने वाला है। इसके पिता प्रशांत कुमार का देहांत हो चुका है। पूरा परिवार पटना में पत्रकार नगर थाना के तहत योगीपुर के महादेव मार्केट के पास मकान में रहता है। लेकिन, इसने भी अपने दोस्त ऋतुराज की तरह कुम्हरार के IOCL इलाके में अलग से एक ठिकाना बना रखा था।

सौरभ दो-तीन दिन पर​​​​​​​ ऑन करता था मोबाइल

SSP के अनुसार रुपेश की हत्या के दिन सौरव भी चमनचक गया था। फिर वहां से वारदात को अंजाम देने के लिए अपने साथियों के साथ निकला। हत्या करने के बाद ऋतुराज की तरह ही यह भी वापस अपने घर गया था। कुम्हरार में यह हर दिन पेपर पढ़ा करता था। इसे भी पेपर पढ़ने से पता चला कि घटना बहुत बड़ी हो गई है। वारदात के दिन से इसका भी मोबाइल बंद था और सीधे अगले दिन खुला था। इसका लोकेशन लगातार 10-12 दिनों तक कंकड़बाग और इसके आसपास के इलाके में था। हर दो-तीन दिन पर यह अपना मोबाइल ऑन करता था। जैसे ही ऋतुराज की गिरफ्तारी हुई तो सौरभ सबसे पहले कंकड़बाग में अपनी बहन के घर जाकर रुका। फिर बड़हिया में अपने गांव चला गया। वहां 2-3 दिन रुगा। उसके बाद लखीसराय में अपने एक रिशतेदार के घर 4-5 दिन ठहरा। रुपयों की कमी होने के कारण वह दूसरे शहर में नहीं भागा और न ही होटल में ठहरा। एक बार वह गया मानपुर में अपने चाचा के घर गया था। वहां पर पुलिस टीम ने इसे ट्रेस कर लिया था, पर टीम के पहुंचने से पहले ही वहां से निकल गया। एक बार बनारस गया। फिर दिल्ली गया था, 4-5 दिनों में ही वापस आ गया। इसके बाद ही इसे पकड़ा गया।

ऋतुराज की तरह का ही इसका भी जवाब

जहां तक हत्या के पीछे मोटिव की बात है तो इसने भी वही बात कही, जो ऋतुराज ने बताया था। मोटिव में कहीं कोई बदलाव अब तक नहीं है। सौरभ के ऊपर बिहटा और नौबतपुर में आपराधिक मामला 2018 में दर्ज हुआ था। इससे बरामद रिवॉल्वर को जांच के लिए FSL भेजा जाएगा। फिलहाल सौरभ को आर्म्स एक्ट के तहत अगमकुआं थाना से जेल भेजा जा रहा है, जबकि रुपेश हत्याकांड में इसे रिमांड पर लिया जाएगा। एक बात पूरी तरह से स्पष्ट हो गई है कि रुपेश को गोली ऋतुराज और सौरभ ने मारी थी। ये दोनों अलग-अलग बाइक पर पीछे बैठे थे, जबकि इनके दो साथी बाइक चला रहे थे, जो अब तक फरार हैं। उनकी तलाश में छापेमारी चल रही है। दूसरी तरफ ऋतुराज के पास से बरामद पिस्टल की FSL से बैलिस्टिक रिपोर्ट भी आ गई है। पुलिस सुत्रों के अनुसार जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि ऋतुराज के पास से बरामद पिस्टल से रुपेश को गोली मारी गई थी।

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