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कटिहार में नाव पर चल रहा स्कूल:बाढ़ की वजह से गांव में सूखी जमीन नहीं बची, सरकारी स्कूल बंद हुए तो प्राइवेट टीचर ने बच्चों को नाव पर पढ़ाना शुरू कर दिया

कटिहार22 दिन पहले
जहां 1 से 2 फीट पानी रहता है वहीं नाव खड़ी कर क्लास लगा लेते हैं।

शिक्षक दिवस के मौके पर कटिहार से शिक्षक की अनोखी तस्वीर सामने आई है। जिले के कई इलाके बाढ़ से प्रभावित हैं। यहां के मनिहारी अनुमंडल की मारालैंड बस्ती में तीन युवक नाव में स्कूल चला रहे हैं। कुंदन, पंकज और रविंद्र बच्चों को नाव में ही शिक्षा दे रहे हैं। बाढ़ की वजह से सरकारी स्कूल बंद होने के कारण बच्चों की पढ़ाई ठप हो गई थी। बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए तीनों शिक्षकों ने नाव में ही छात्रों को पढ़ाना शुरू कर दिया।

पढ़ाई के लिए नाव में बैठे हुए हैं बच्चे।
पढ़ाई के लिए नाव में बैठे हुए हैं बच्चे।

शिक्षा की लौ जलानी जरूरी
तीनों शिक्षक कहते हैं कि वे लोग स्थानीय हैं और इस इलाके के बच्चों को पिछले कई वर्षों से निशुल्क शिक्षा दे रहे हैं। बाढ़ में सरकार अन्य सुविधा मुहैया करवा ही रही है। तो वे लोग अपने स्तर पर जो पाठशाला चलाते थे, वह नाव में चलाकर शिक्षा की लौ जलाकर रखना चाहते हैं।

वहीं, इस अनोखी पाठशाला में पढ़ने आए छात्र-छात्राएं कहते हैं कि पूरा इलाका जलमग्न है। नाव ही सबसे सुरक्षित जगह है। इसलिए उन लोगों को भी नाव वाली पाठशाला में पढ़ने में कोई परेशानी नहीं है। हर दिन नियमित समय पर बच्चे नाव के सहारे नाव पर चल रही क्लास में पहुंचते हैं और पढ़ाई करते हैं। यहां उत्क्रमित मध्य विद्यालय पटनी महेशपुर, गांधी टोला प्राथमिक विद्यालय, प्राथमिक विद्यालय मुसहरी टोला और कन्या बालिका उच्च विद्यालय के छात्र पढ़ने के लिए पहुंचते हैं।

नाव पर बच्चों को पढ़ाते शिक्षक।
नाव पर बच्चों को पढ़ाते शिक्षक।

तीन शिफ्ट में चल रही है क्लास
शिक्षकों का कहना है कि बाढ़ के कारण एक भी ऐसी जगह नहीं है, जहां बच्चों को पढ़ाया जा सके। पिछले 20 दिनों से इलाके में बाढ़ का पानी फैला हुआ है। बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही थी। पढ़ाई बाधित ना हो इसके लिए नाव पर ही बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। शुरुआती दिनों में तीन से चार बच्चे ही पढ़ने आते थे। अब देखते देखते 20 से 30 बच्चे पहुंचने लगे हैं। जिसके कारण 3 शिफ्ट में बच्चे यहां पढ़ाई कर रहे हैं।

नाव पर शिक्षकों ने बच्चों के लिए बोर्ड की भी व्यवस्था की।
नाव पर शिक्षकों ने बच्चों के लिए बोर्ड की भी व्यवस्था की।

जहां पानी सबसे कम, वहीं लगाते हैं नाव
बाढ़ के कारण इन इलाकों में ज्यादातर लोगों के पास नाव है। जिससे लोग आना-जाना भी कर रहे हैं। पानी जहां सबसे कम 1 से 2 फीट है। वहीं, पर नाव खड़ी कर पढ़ाई चलती है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल से ही बच्चों की पढ़ाई विद्यालय में बाधित है। अब विद्यालय खुला है, लेकिन बाढ़ के कारण विद्यालय को बंद करना पड़ा है। ऐसे में नाव के जरिए बच्चों को शिक्षा मिल रही है।

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