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बिहार में स्कूल खुले, नहीं आ रहे स्टूडेंट्स:पैरेंट्स पर कोरोना का खौफ हावी, बच्चों को भेजने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे, स्कूलों में उपस्थिति 10% भी नहीं

पटना3 महीने पहले
स्कूल में छात्रों की संख्या बेहद कम।

देश में सबसे पहले बिहार में 10वीं से ऊपर के स्कूल कॉलेज खोल दिए गए हैं। ताकि बच्चों की पढ़ाई ज्यादा प्रभावित नहीं हो। सरकार की चिंताओं के बीच अभिभावक अभी बच्चों को स्कूल भेजने के मूड में नहीं है। यही कारण है कि स्कूलों में 10% बच्चे भी नहीं आ रहे हैं।

बुधवार को स्कूल खुलने का तीसरा दिन रहा। इस दिन सोमवार को आने वाले स्टूडेंट्स को अल्टरनेट डे आना था, लेकिन बहुत कम स्टूडेंट्स पहुंचे। पटना के मिलर हाई स्कूल, बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, गर्दनीबाग हाई स्कूल, शास्त्री नगर बालिका विद्यालय, शास्त्रीनगर हाई स्कूल के साथ अन्य विद्यालयों में स्टूडेंट्स की उपस्थिति काफी कम रही।

कोरोना के डर से लोग बच्चों को नहीं भेज रहे हैं स्कूल।
कोरोना के डर से लोग बच्चों को नहीं भेज रहे हैं स्कूल।

420 में आए सिर्फ 20 स्टूडेंट्स

मिलर हाई स्कूल में काॅमर्स और आट्‌र्स का दो-दो बैच चलता है, जिसमें 60-60 स्टूडेंट्स हैं। जबकि, साइंस 60-60 स्टूडेंट्स का 3 बीच चलता है। स्कूल में 12वीं क्लास के सभी सेक्शन मिलाकर कुल 420 छात्र है। इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की उपस्थिति मात्र 20 ही रही।

बुधवार को बच्चों की कम संख्या को लेकर स्कूल के प्रिंसिपल डॉक्टर आजाद चन्द्र शेखर प्रसाद का कहना है कि कोरोना काल में प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। बच्चों की उपस्थिति कम है। पैरेंट्स बच्चों को स्कूल भेजने में थोड़ा डर रहे हैं। जबकि, कोरोना को लेकर हर तरह से विद्यालय में अलर्ट है।

स्कूल में सैनिटाइजेशन की भी व्यवस्था नहीं।
स्कूल में सैनिटाइजेशन की भी व्यवस्था नहीं।

संक्रमण के खतरे से नहीं उबर पाए पैरेंट्स

कोरोना की दूसरी लहर में जिस तरह से कोरोना ने तबाही मचाई है। उससे पैरेंट्स भी काफी दहशत में हैं। पटना के राजीव नगर की रहने वाली सुमन का कहना है कि स्कूलों में बच्चों की सिक्योरिटी को लेकर कितना भी दावा किया जाए गडबड़ी हो जाती है। शास्त्री नगर के राकेश कुमार का भी कुछ ऐसा ही मानना है। उनका कहना है दूसरी लहर का दर्द देखा है। किस तरह से लोग इलाज के लिए तड़पे हैं। ऐसे में स्कूलों को खोलने में जल्दबाजी की गई है। स्कूलों को लेकर भले ही दवा किए जाए, लेकिन सरकारी में आज भी व्यवस्था नहीं हो पा रही है।

राज्य के सभी स्कूलों का एक जैसा हाल

राज्य में सभी स्कूलों का एक जैसा हाल है। पटना में संख्या तो अधिक है, लेकिन बिहार में अन्य जिलों के स्कूलों में बच्चों की उपस्थित नहीं हो पा रही है। ग्रामीण एरिया में गार्जियंस और अवेयर नहीं हैं। इस कारण यहां स्कूलों में बच्चों की संख्या कम है। इसके अलावा बढ़ प्रभावित जिलों में तो कोई भी विद्यालय नहीं खुल रहे हैं। इसके अलावा जहां स्कूल खुल रहे, वहां भी बच्चों की संख्या काफी कम है।

स्कूलों में स्टूडेंट्स की उपस्थिति कम होने के पीछे बड़ा कारण कोरोना की संभावित तीसरी लहर में बच्चों पर इफेक्ट को लेकर है। पैरेंट्स इस दहशत से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। इस कारण पटना से लेकर बिहार के अन्य जिलों में स्कूलों में स्टूडेंट्स की उपस्थिति कम है। हालांकि प्राइवेट स्कूल में बच्चों की संख्या सरकारी स्कूलों की अपेक्षा कुछ अधिक है।

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