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बिहार के सबसे बड़े अस्पताल में तड़प रहे मासूम:PMCH के शिशु वार्ड में बच्चों की पीड़ा देख परिजनों की हालत खराब, कहा- कराहते रहते हैं पेशेंट, लेकिन डॉक्टर नहीं आते देखने

पटनाएक महीने पहले
अस्पताल की खामियां बाहर आने लगीं तो अधीक्षक ने पत्रकारों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी।
  • खामियां छिपाने के लिए फोटो और वीडियो बनाने वालों से मारपीट कर रहे गार्ड

बिहार के सबसे बड़े अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज (PMCH) में बच्चों का वार्ड फुल है। बुखार और निमोनिया से पीड़ित बच्चों की पीड़ा देख परिजनों की हालत खराब हो रही है, लेकिन डॉक्टरों का दिल नहीं पसीज रहा है। बच्चों को वार्ड में भर्ती कराने वाले परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर देखने तक नहीं आते हैं।

बच्चों की हालत बिगड़ती है तो वह स्टाफ को खोजते हैं। दिन और रात दोनों समय परेशानी होती है। आरोप है कि डॉक्टर रिपोर्ट तक देखने नहीं आते हैं।

कोरोना को लेकर यही है तैयारी
पटना मेडिकल कॉलेज बिहार का सबसे बड़ा अस्पताल है। यहां कोरोना के इलाज को लेकर अब तक विशेष तैयारी नहीं की गई है। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों पर खतरे की आशंका थी, लेकिन शिशु वार्ड में व्यवस्था नहीं की गई है। वार्ड में बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या अधिक है, लेकिन व्यवस्था नहीं है।

मधुबनी से इलाज कराने आए एक मासूम के परिजन प्रदीप कुमार का कहना है कि इलाज को लेकर डॉक्टर गंभीर नहीं है। वार्ड में डॉक्टरों के साथ स्टाफ भी मनमानी कर रहे हैं। पटना के कुर्जी के रहने वाले अवधेश का कहना है कि उनका रिश्तेदार PMCH में शिशु वार्ड में भर्ती है, लेकिन डॉक्टर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।

बच्चों की बीमारी से खुली दावों की पोल
सरकार का दावा है कि हर स्तर से तैयारी की गई है, लेकिन बच्चों को बेड तक नहीं मिल पा रहा है। पटना मेडिकल कॉलेज जैसे हॉस्पिटल में बच्चे जमीन पर पड़े हैं। मासूमों में बढ़ते बुखार के संक्रमण और अस्पताल की व्यवस्था से लोगों में काफी आक्रोश है।

परिजनों का कहना है कि बच्चों को लेकर भर्ती होने में वह खुद बीमार हो जाएंगे। वार्ड में गर्मी से बच्चे बेहाल हैं। कोई देखने वाला नहीं है कि ऑक्सीजन का मास्क सही से लग रहा है या नहीं। ऐसे में अगर कोरोना की तीसरी लहर आ गई तो बच्चों का इलाज बड़ी चुनौती होगी।

वीडियो फोटो लेने वालों से मारपीट
पटना मेडिकल कॉलेज में व्यवस्था पर पर्दा डालने का काम चल रहा है। वार्ड में फोटो लेने वाले और वीडियो बनाने वालों से गार्ड मारपीट करने को उतारू हो जा रहे हैं। इतना ही नहीं, जब बिहार के सबसे बड़े अस्पताल की खामियां बाहर आने लगीं तो अधीक्षक ने पत्रकारों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी थी, जो अभी भी जारी है।

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