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सुपर-30 के आनंद कुमार का कॉलम:लक्ष्य वही निर्धारित करें जिसका परिणाम मेहनत पर आधारित हो, भाग्य पर नहीं

2 महीने पहले
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इंसान तमाम कठिनाइयों का सामना करते हुए सफलता के शिखर तक पहुंचने के लिए कठोर परिश्रम करता है। कोई परीक्षा में अच्छे अंकों के साथ उत्तीर्ण होने के लिए, फुटबॉल मैच जीतने के लिए तो कोई पैसे कमाने के लिए दिन-रात मेहनत करता है। अगर ध्यान से सोचा जाए तो सबका एक ही मकसद होता है- सफलता और उसके बाद सफलता से मिलने वाली खुशी।

जाने अनजाने में खुशी और शांति ही जीवन का अंतिम मकसद होता है, लेकिन हर सफलता हमेशा खुशी लेकर आए, यह जरूरी नहीं है। यह भी कोई जरूरी नहीं है कि छोटी सफलता से कम और बड़ी सफलता से ज्यादा खुशी मिले। अगर अपने जीवन में हम कुछ बातों का खयाल रखें तब बहुत छोटी-छोटी सफलताएं भी बहुत खुशियां दे सकती हैं। सफलता के इंतजार के दरम्यान इंसान जो खुशी महसूस करता है, उसका जवाब नहीं। यह खुशी उस समय और भी बढ़ जाती है जब हम अपनी पूरी ताकत लगा देते हैं। मान लीजिए आप लॉटरी का एक टिकट खरीदते हैं और उसका रिजल्ट तीन दिन बाद आना है। रिजल्ट का समय जितना नजदीक आने लगता है, उतनी ही उत्सुकता और लॉटरी लग जाने की खुशी बढ़ती रहती है, लेकिन साथ ही साथ, उस वक्त लॉटरी नहीं लगने का अंदेशा भी दुखी करता रहता है।

वहीं अगर आप खूब मेहनत करते हैं, अपनी पूरी ताकत लगा देते हैं, तब किसी परिणाम के इंतजार में जो खुशाी मिलती है उसकी तो बात ही कुछ और है। हर साल आईआईटी प्रवेश-परीक्षा के रिजल्ट के समय मैं सुपर 30 के बच्चों के चेहरों को पढ़ता रहता हूं। सभी आत्म-विश्वास से भरे होते हैं। अपनी सफलता के लिए आश्वस्त भी होते हैं।

मैं महसूस करता हूं कि जैसे-जैसे रिजल्ट का समय नजदीक आता है उनकी खुशी बढ़ती जाती है। मेरे कहने का मतलब है कि सही तरीके से किसी उद्देश्य के लिए कड़ी मेहनत करने के बाद उसके रिजल्ट के इंतजार के दरम्यान जो खुशी मिलती है उसका कोई जवाब नहीं है। इसलिए इस बात को गांठ बांध लें कि आपको लक्ष्य भी ऐसा ही निर्धारित करना चाहिए जिसका परिणाम आपकी मेहनत पर आधारित हो भाग्य या किसी और के सहारे नहीं। कड़ी मेहनत और फिर लंबे के इंतजार के बाद मिलने वाली सफलता से खुशी आपको उसी वक्त मिलेगी जब आपके पास कुछ ऐसे लोग हों जिनसे आप अपनी सफलता की खुशखबरी बांट सकें। प्रत्येक वर्ष आईआईटी प्रवेश-परीक्षा के रिजल्ट के दिन मैंने अनुभव किया है कि जैसे ही किसी बच्चे को रिजल्ट का पता चलता है, वह बहुत ही खुश हो जाता है। फिर उसके बाद वह खुशखबरी अपने माता-पिता को सुनाता है तब उसके चेहरे पर और ज्यादा खुशी झलकने लगती है।

इसके बाद अपने दूर-दराज के रिश्तेदारों को रिजल्ट बारे में बताता है, दोस्तों से चर्चा करता है। जितने लोगों के साथ अपनी सफलता को शेयर करता है, उतनी ही उसकी खुशी बढ़ती जाती है। एक बहुत ही पुरानी कहावत है कि जंगल में मोर नांचा किसने देखा। देखने वाला, सुनने वाला भी होना चाहिए। जिंदगी में खुशियां मिलतीं रहें, महसूस होतीं रहें इसलिए जरूरी है कि आपके कुछ अच्छे मित्र हों। इसीलिए अच्छे मित्रों को संभल कर रखना चाहिए। कहा भी गया है कि अच्छे मित्रों से अपनी दिल की बातों को शेयर करने से दुःख आधा और खुशी दोगुनी हो जाती है | आप को खुशी मिलती रहे, इसलिए जरूरी है कि आप दूसरों को भी खुशी देते रहें। आपके मित्र, आप-पास रहने वाले जब तक खुश नहीं रहेंगें तब तक आपको भी खुशी की अनुभूति नहीं होगी। मैंने सुपर 30 के बच्चों में भी अनुभव किया है। जो विद्यार्थी दूसरों की मदद करता है। वह ज्यादा खुश रहता है।

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