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शहाबुद्दीन की कब्र को मकबरा बनाने पर विवाद:दिल्ली में कब्र को चुपके से पक्का करा रहे थे परिजन, कमेटी ने रोका; कहा- यहां इसकी इजाजत नहीं

पटना17 दिन पहलेलेखक: बृजम पांडेय
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बिहार के बाहुबली रहे शहाबुद्दीन की मौत के बाद भी विवाद थम नहीं रहा है। अब उनकी कब्र सुर्खियों में हैं। उस पर विवाद भी हो गया है। दरअसल, उनके शव को दिल्ली गेट स्थित जदीद कब्रिस्तान में दफनाया गया है। कब्र को यादगार बनाने के लिए परिजनों ने चुपके से मकबरा बनाने की कोशिश की। इसकी जानकारी मिलते ही जदीद कब्रिस्तान कमेटी ने विरोध कर दिया।

उन्होंने कब्रिस्तान में पक्कीकरण पर रोक लगा दी। कमेटी का कहना है कि यहां जमीन की कमी होने की वजह से पक्की कब्र बनाने की मनाही है।

दिल्ली के जदीद कब्रिस्तान में शहाबुद्दीन को दफनाया गया है।
दिल्ली के जदीद कब्रिस्तान में शहाबुद्दीन को दफनाया गया है।

परिजनों ने मंजूरी नहीं ली थी

कमेटी की ओर से कहा गया है कि कोरोना संक्रमण के कारण लगातार हो रही मौतों की वजह से भी पक्कीकरण पर भी रोक लगा दी गई है। कुछ दिन पहले शहाबुद्दीन के परिजनों ने पक्की कब्र बनाने के लिए बालू-गिट्टी-सीमेंट-ईंट-सरिया वहां लाकर रख दिया था। तब तक किसी को भनक तक नहीं लगी। जब निर्माण शुरू हुआ तो कब्रिस्तान कमिटी को पता चला कि बिना मंजूरी लिए उनके परिजन पक्की कब्र बना रहे हैं। तब तक कब्र के चारों तरफ दीवारें बना गई थी। फिर, कमिटी के सदस्यों ने शहाबुद्दीन के परिजनों से पक्की कब्र बनाने के लिए परमिशन की मांग की। लेकिन, उनके परिजनों के पास परमिशन की कॉपी नहीं थी। फिर कब्रिस्तान कमिटी ने इस पर रोक लगा दी।

हंगामे के बाद काम रोका गया

रोक के बाद भी शहाबुद्दीन के कब्र का पक्कीकरण का काम चलता रहा। कब्रिस्तान की कमेटी ने उसे रुकवाने की भी कोशिश की। लेकिन, शहाबुद्दीन के परिजन नहीं मानें। इसके बाद पुलिस भी बुलाई गई, लेकिन काम जारी रहा। बाद में हंगामे के बाद काम को रोक दिया गया। फिलहाल इस पर कमेटी का कोई सदस्य कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हो रहा है। 1992 में ही कब्रिस्तान कमेटी ने एक कानून बनाकर जदीद कब्रिस्तान में कब्र को पक्की करने पर रोक लगा दी थी।

कोरोना संक्रमण से हुई थी मौत

दिल्ली के तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे शहाबुद्दीन कोविड-19 से संक्रमित हो गए थे। 1 मई को शहाबुद्दीन की मौत इलाज के दौरान हो गई थी। उनके परिजन शव को बिहार के सीवान में पैतृक गांव प्रतापपुर में दफनाना चाहते थे। लेकिन कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए इसकी इजाजत नहीं दी गई थी। आखिर में शहाबुद्दीन के शव को दिल्ली गेट के जदीद कब्रिस्तान में दफना दिया गया था। बाद में इस पर खूब राजनीति भी हुई थी।

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