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CM नीतीश डरे हुए हैं, नहीं छोड़ेंगे BJP का साथ!:RJD उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी बोले- मुख्यमंत्री को भय, मोदी सरकार बदला लेने वाली है

पटना5 महीने पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद

बिहार की सत्ता पर काबिज BJP और JDU के बीच तनाव है। कभी सम्राट अशोक के सवाल पर तो कभी जाति जनगणना और विशेष राज्य के दर्जे के सवाल पर दोनों पार्टियां एक-दूसरे को घेर रही हैं। यूपी में दोनों पार्टियों का गठबंधन टूट गया। यही नहीं JDU के अंदर केन्द्रीय मंत्री RCP सिंह और JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के बीच तनाव है। तीसरी स्थिति है जिसमें राज्य की सबसे बड़ी पार्टी RJD, JDU को आमंत्रण दे रही है। इस सब के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चुप हैं।

उनकी चुप्पी क्या किसी नए राजनीतिक परिवर्तन का संकेत है? क्या वे BJP का साथ छोड़ RJD-कांग्रेस के साथ फिर से चले जाएंगे? क्या नीतीश सरकार गिर जाएगी? इन सवालों के साथ प्रणय प्रियंवद ने वरिष्ठ समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी से बात की। एक तरफ जहां RJD के कई नेता नीतीश कुमार को आमंत्रण दे रहे हैं। वहीं, शिवानंद तिवारी कहते हैं कि नीतीश, BJP का साथ नहीं छोडे़ंगे। बता दें कि शिवानंद तिवारी, नीतीश कुमार और लालू प्रसाद दोनों के काफी करीब रहे हैं। अभी वे RJD के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। नीतीश BJP का साथ क्यों नहीं छोडे़ंगे पढ़िए एक्सक्लूसिव इंटव्यू-

सवाल- नीतीश कुमार की वर्तमान चुप्पी को आप किस नजरिए से देखते हैं ?
जवाब- अभी आरसीपी सिंह और ललन सिंह के बीच जैसी स्थिति है इसके अलावा भाजपा के नेता भी जिस तरह से टिप्पणी कर रहे हैं वह बताती है कि नीतीश कुमार की ऑथोरिटी खत्म हो गई है। पहले सुशील मोदी की टीम थी लेकिन अब भाजपा में एक नई टीम है। यह अनुभवहीन लोगों की टीम है। लंबी राजनीति का विजन इनके पास नहीं है। आरसीपी सिंह और ललन सिंह के बीच तनाव चुनाव के बाद ही शुरू हो गया था। दिखने लगा था कि आरसीपी सिंह, नीतीश कुमार से दूर जा रहे हैं। वे मंत्री भी बन गए।

उस समय ही मैंने कहा था कि आरसीपी सिंह, भाजपा के हो चुके हैं, टेक्निकली भले वे नीतीश कुमार के साथ हों। राज्य सभा में भी वे इस तरह से बोल रहे थे तो लग रहा था कि भाजपा के सांसदों से ज्यादा लॉयल वे BJP के प्रति हैं। इसके बाद आरसीपी सिंह को JDU के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। ललन सिंह को अध्यक्ष बना दिया गया। अब यूपी चुनाव को लेकर ललन सिंह का बयान आया है। इससे स्पष्ट है कि सब ठीक ठाक नहीं चल रहा है।

सवाल- यह नीतीश कुमार के साथ अक्सर देखा जाता है कि वे राजनीति में एक साथ दो- तीन दरवाजे खोल कर रखते हैं और जनता असमंजस में रहती है। राजनीतिक कार्यकर्ताओं को भी लग रहा है कि कहीं नीतीश कुमार राजद के साथ तो नहीं चले जाएंगे?
जवाब- हमें राजद के लोग भी फोन करके पूछते हैं कि हम लोगों की सरकार बन जाएगी क्या? यानी नीतीश कुमार भाजपा का साथ छोड़ कर राजद के साथ सरकार बना लेंगे क्या? यह बात लोगों के दिमाग में है। सार्वजनिक रुप से जिस तरह से बाताबाती चल रही है, सरकार का बहुमत बहुत कर्मफर्टेबल नहीं है। ऐसे में जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी हट जाएं तो सरकार गिर जाएगी। हालांकि सहनी की पकड़ अपने विधायकों पर उस तरह से नहीं है क्योंकि भाजपा के लोग उनके सिंबल पर चुनाव लड़े थे।लेकिन ये हट जाते हैं तो सरकार गिर जाएगी।

ज्यादातर लोग मान कर चल रहे हैं कि बिहार में मध्यावधि चुनाव हो जाएगा। इस पूरे माहौल के बीच नीतीश कुमार चुप हैं। नीतीश के प्रवक्ता बहुत आक्रामक नहीं है। जहां तक आपका कहना है कि नीतीश कुमार कई दरवाजा खोल कर रखते हैं तो वह दरवाजा है कहां?

सवाल- दरवाजा राजद की तरफ नहीं है क्या?
जवाब- हम जितना नीतीश कुमार को समझते हैं, हमें नहीं लगता है कि नीतीश कुमार छोड़ने वाले हैं। वे महागठबंधन छोड़ कर वहां गए। जब NDA या BJP को छोड़ कर आए तब उन्होंने क्या कहा था। संकल्प लिया था कि मिट्टी में मिल जाएंगे पर भाजपा के साथ नहीं जाएंगे, लेकिन वे गए।

सवाल- उसी संकल्प की हालत को देखते हुए शंका होती है कि कहीं नीतीश कुमार आप लोगों के साथ तो नहीं चले जाएंगे ?
जवाब- वे क्यों चले गए? क्या वजह थी? जितना हम जानते हैं वह यह कि तेजस्वी का नाम एफआईआर में आ गया था और तेजस्वी से नीतीश सफाई मांग रहे थे। यह तो फालतू बात है ना। हमने उस समय भी कहा था कि इसका क्या मतलब है। सफाई अदालत में दी जाती है। जनता के बीच सफाई की बात है तो जनता बंटी हुई है। जो तेजस्वी के समर्थक हैं या लालू यादव की समर्थक है वह सब जानते हुए भी नहीं मानेंगे कि तेजस्वी ने गलती की है। जो विरोधी जनता है वह दोषी मानेगी।

सवाल- नीतीश कुमार की चुप्पी बिहार में किसी पॉलिटिकल चेंज की तरफ इशारा है क्या?
जवाब- हमको कहीं से नहीं लग रहा है। क्या नीतीश कुमार मूर्ख थे जो वहां चले गए। उन्हें मालूम था कि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में जो कुछ भी अर्जित किया है वह खत्म हो जाएगा। प्रधानमंत्री या नरेन्द्र मोदी के विकल्प के रुप में लोग उन्हें देखने लगे थे। यह साधारण बात नहीं थी। बिहार में जगजीवन राम के बाद नीतीश कुमार ही ऐसे हुए जिनके व्यक्तित्व में लोग प्रधानमंत्री की क्षमता देख रहे थे। लेकिन वह धूल धूसरित हो गया।

उनके इस नुकसान के पीछे लालू यादव या तेजस्वी यादव कारण नहीं थे। हमको ऐसा लगता है कि नीतीश कुमार के मन में भय हो गया कि मोदी की सरकार बदला लेने वाली है। सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स है।

सवाल- नीतीश कुमार के अंदर वह डर अब भी बना हुआ है क्या ?
जवाब- हमको ऐसा लगता है कि नीतीश कुमार के अंदर भाजपा से वह डर अभी भी बना हुआ है। भला बताइए कि आप खुद ही देख रहे हैं कि वे महात्मा गांधी का नाम सबसे ज्यादा लेते हैं। सात पाप का बोर्ड बनवाकर टंगवाते हैं। रायपुर में एक पहलवान साधु जो गुंडा ज्यादा लगता है ने महात्मा गांधी के बारे में जो शब्द इस्तेमाल किया उस पर नीतीश कुमार चुप रह गए यह तो बिल्कुल नपुंसकता है या सत्तालोलुपता है कि गांधी के लिए इस तरह के शब्द का इस्तेमाल हो रहा है और जो नीतीश कुमार, गांधी का नाम सबसे ज्यादा लेते हैं वे चुप हैं।