अब नेहा ने गाया- 'UP में का बा?':राठौर का योगी पर तंज, गाया- बाबा के दरबार बा, खत्म रोजगार बा..., किसानन के छाती पर रौगत मोटर कार बा...

पटना8 महीने पहले

'बिहार में का बा' के बाद अब नेहा सिंह राठौर 'UP में का बा' लेकर आईं हैं। इस गीत को लोग खूब पसंद कर रहे हैं। नेहा अपने व्यंग्य गीतों से जनता की पीड़ा दिखती रही है। बताया जाता है कि यह गीत उन्होंने खुद से लिखा हैं। इससे पहले उन्होंने बिहार चुनाव के समय गाया था- 'बिहार में का बा?'

रविवार सुबह सोशल मीडिया पर यह गीत उन्होंने जारी किया है। इस गीत में वह साड़ी पहनी हुई, टिकुली-बिंदी लगाई दिख रही हैं। उन्होंने एक आम नारी वाली वेश-भूषा में यह गीत गाया है। गीत में रोजगार का सवाल उन्होंने उठाया है। साथ ही हाथरस की दर्दनाक घटना, कोरोना से गंगा में तैरती लाशों का जिक्र, मंत्री के बेटे की रंगदारी और किसानों पर कैसे कार चढ़ा दी गई इसका भी जिक्र किया है। मंदिर-मस्जिद में किस तरह रार बा...यह सब उन्होंने गाया है।

ऐ चौकीदार बोलो के जिम्मेवार बा

नेहा सिंह राठौर से नए गीत की शुरुआत बाबा के दरबार से होती है। उन्होंने भोजपुरिया अंदाज में गाया, 'बाबा के दरबार बा.. खत्तम रोजगार बा... हाथरस के निर्णय जोहत लइकी के परिवार बा, कोरोना से लाखन मर गइलन, लाशन से गंगा भर गइलें, टिकठी और कफन नोचत कुकुर और बिलाड़ बा, मंत्री के बेटवा बड़ी रंगदार बा, किसानन के छाती पर रौगत मोटर कार बा, एक चौकीदार, बोलो के जिम्मेदार बा...।' गीत का अंत 'जिंदगी झंड, पर फिर भी घमंड बा!' पंक्ति से किया है।

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