सर, आपके अंडर में काम नहीं कर सकता...:छठी क्लास के सोनू की दो टूक जवाब सुन तेज प्रताप ने काटा फोन

पटना7 महीने पहले

CM नीतीश कुमार से अच्छी स्कूल में पढ़ाई करवाने की गुहार लगाने वाले हरनौत के सोनू ने तेज प्रताप की बोलती बंद कर दी है। लालू के बड़े लाल ने सोनू (11) से बात करने के लिए वीडियो कॉल किया था। उसी दौरान उन्होंने सोनू से कहा कि IAS बनना तो मेरे अंडर काम करना। इस पर सोनू ने कह दिया कि मैं किसी के अंडर में काम नहीं करूंगा। यह सुनते ही तेज प्रताप ने फोन काट दिया। पूरी बातचीत का वीडियो भी सामने आया है।

दरअसल, तेज प्रताप यादव ने सोनू से कार पर चलते हुए उस समय बातचीत की जब वे एक कार्यक्रम में जा रहे थे। सोनू ने उनसे पूछा कि सर आप हमारे गांव में कब आएंगे? इस पर तेज ने कहा, 'जब तुम बुलाओगे तब आ जाऊंगा। हम तुम्हारे फैन हो गए हैं। तुम बहुत बहादुर बच्चे हो। स्मार्ट हो। तुम मेरे बिहार के स्टार हो।' सोनू ने तेजप्रताप से हाथ जोड़कर कहा कि एक चाचा की हैसियत से मेरा एडमिशन स्कूल में करवा दीजिए सर।

IAS बनना चाहते हैं लेकिन किसी के अंडर काम नहीं करेंगे

तेजप्रताप ने सोनू को स्कूल में दाखिला देने का आश्वासन दिया। साथ ही छात्र जनशक्ति परिषद को ज्वाइन करने का भी न्योता दिया, लेकिन तेज प्रताप यादव ने सोनू से जब यह पूछा कि तुम बड़े होकर क्या बनना चाहते हो? डॉक्टर या इंजीनियर? इस पर सोनू ने कहा कि वह IAS बनना चाहता है। फिर क्या था तेज प्रताप यादव ने कहा, 'जब हम बिहार सरकार में आएंगे तब तुम मेरे अंडर में IAS बन कर काम करना।' इतना सुनना था कि सोनू को बुरा लग गया। सोनू ने तपाक से कहा, 'नहीं सर! हम किसी के अंडर में काम नहीं कर सकते हैं।'

CM नीतीश को रोककर बोला था- पापा रोज दारू पीते हैं...

बता दें कि सोनू तब चर्चा में आया था जब उसने CM नीतीश से हाथ जोड़ कर पढ़ाई करवाने की गुहार लगाई थी। सोनू ने कहा था, 'पिता रणविजय यादव दही बेचने का काम करते हैं। उसी कमाई का रुपए से शराब पी जाते हैं। गरीब परिवार से होने के कारण मध्य विद्यालय नीमा कौल के सरकारी स्कूल में पढ़ता हूं। वहां शिक्षकों को भी अच्छी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने नहीं आता है।

सोनू ने कहा, 'पापा शराब पीते हैं, मैं जो पढ़ाकर पैसा लाता हूं, वो सब खत्म हो जाता है, सरकारी स्कूल में सर को कुछ नहीं आता है। अगर सरकार हमें मदद करे तो मैं भी पढ़ लिखकर IAS-IPS बनना चाहता हूं।' सोनू 5वीं कक्षा तक के 40 बच्चों को शिक्षा देकर अपनी पढ़ाई का खर्च निकालता है। बच्चे की बात सुन मुख्यमंत्री ने तुरंत अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए थे।