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पंचायत चुनाव के लिए घोड़े तैयार, जानिए इनकी खासियत, VIDEO:जहां नहीं पहुंच पाएगी पुलिस की जीप, वहां लॉ एंड ऑर्डर के लिए पहुंचेगा तेजस्वी, जानिए पुलिस की जांबाज सोनिया और शिवानी को

पटनाएक महीने पहले
लोकसभा और विधानसभा चुनाव के साथ चुनौती वाली हर ड्यूटी में हमेशा आगे रहा अश्वारोही सैन्य पुलिस के अश्व।

पंचायत चुनाव के लिए तेजस्वी से लेकर सोनिया तक तैयार हो रही है। लाजवंती और अंजलि भी इस तैयारी में पीछे नहीं हैं। पवन और कौशल को तो विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है। अंग्रेजी नाम वाले जांबाज ट्वीस्टर और लूकस भी लॉ एंड ऑर्डर की रेस में आगे हैं। यह पुलिस या फौज के जवानों की नहीं बिहार पुलिस के घोड़ों की तैयारी है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव से लेकर हर बड़ी चुनौती में लॉ एंड ऑर्डर पर काम करने वाली बिहार पुलिस की घोड़ा फौज में हर घोड़े की अपनी अलग कहानी और पहचान है। जानिए बिहार पुलिस के अश्वरोही सैन्य के घोड़ों की जांबाजी की कहानी...

बिहार में अश्वारोही सैन्य पुलिस की बड़ी फौज

बिहार पुलिस की अश्वारोही सैन्य पुलिस की बड़ी फौज है। भोजपुर में अश्वारोही सैन्य पुलिस का मुख्यालय बनाया गया है। पटना, भागलपुर और सोनपुर में ट्रूप है जबकि राजगीर में पुलिस ट्रेनिंग सेंटर है। यहां अलग-अलग प्रजाति के घोड़े हैं। इसमें कई चैंपियन हैं जो अपनी जांबाजी का लोहा मनवा चुके हैं। स्पोर्ट्स से लेकर लॉ एंड ऑर्डर के लिए इन घोड़ों को कई बार पुरस्कार भी मिल चुका है।

पटना अश्वारोही सैन्य पुलिस में 14 जांबाज

  • तेजस्वी
  • सोनिया
  • मारगेट
  • लाजवंती
  • कौशल
  • बादल
  • लुकश
  • ट्वीस्टर
  • सागर
  • जांबाज
  • शिवाजी
  • अंजली
  • चांद
  • पवन

पटना में सबसे पुराना लुकश, आज भी 6 लोगों को झटक देगा

अश्वारोही सैन्य पुलिस पटना के हवलदार राजमनी यादव बताते हैं कि अस्तबल के घोड़े एक से बढ़कर एक हैं। हर किसी का अपना अपना इतिहास रहा है। कोई स्पोर्ट्स का चैंपियन है तो कोई गस्ती का मास्टर है। 12 अप्रैल 1992 को जन्मा लुकश 6 मई 1999 को बिहार पुलिस का हिस्सा बना था। स्क्वाड्रन संख्या 106 के इस घोड़े का रंग चेस्ट नट है। यह पटना अश्वारोही सैन्य पुलिस का सबसे पुराना घोड़ा है। बताते हैं कि अधिक उम्र का होने के बाद भी यह आज भी आधा दर्जन लोगों को झटक देगा। स्पोर्ट्स का यह चैंपियन रहा है और रेस में तो इसका कोई पीछा ही नहीं कर सकता है। इस उम्र में भी यह हमेशा एक्टिव रहता है।

पैर में चोट के बाद भी एक्टिव है तेजस्वी

2006 में जन्मा तेजस्वी डार्क बे रंग का है। बिहार अश्वारोही सैन्य पुलिस में 4 फरवरी 2009 को तेजस्वी की एंट्री हुई है। तैयारी में ही तेजस्वी के पैर में चोट आ गई है। इलाज अस्तबल में ही हो रहा है। घायल होने के बाद भी तेजस्वी पूरी तरह से एक्टिव है और पहले के लिए ही तैयार रहता है। चुनाव तक तेजस्वी पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएगा और मोर्चा संभालने को तैयार रहेगा। बादल भी अश्वारोही सैन्य पुलिस का जांबाज है। स्क्वाड्रन 79 नाम के इस घोड़े का जन्म 2013 में हुआ है और 10 सितंबर 2017 को पुलिस अश्वारोही सैन्य पुलिस का हिस्सा बना। पुलिस पदाधिकारी भी इसकी गस्ती की चुस्ती की दांज देते हैं।

ट्वीस्टर ने खूब किया है लॉन्ग जंप

अश्वारोही सैन्य पुलिस पटना के हवलदार राजमनी यादव और कपिल मुनि बताते हैं कि ट्वीस्टर भी शान है। यह लॉन्ग जंप में कई प्रतिभागों में भाग लिया है। मेडल तो नहीं ले पाया लेकिन वाहवाही खूब मिली है। यह जब जंप करता है तो देखते ही बनता है। यह स्पोर्ट्स के साथ गश्त में भी अपना लोहा मनवा चुका है। जांबाज भी गेम में काफी समय तक रहा है। भाला लेकर दौड़ने में इसका कोई मुकाबला नहीं है। यह कई मेडल भी अपने नाम कर चुका है। लास्टिंग करने में काफी मजबूत है। ट्यूटी में अव्वल होता है। स्पोर्ट्स में भी अच्छा प्रदर्शन करता है। स्पोर्ट्स के साथ विधि व्यवस्था में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। हवलदार राजमनी यादव का कहना है कि स्पोर्ट्स हो या विधि व्यवस्था सभी पर पूरा भरोसा रहता है। तेजस्वी, सोनिया, मारगेट, लाजवंती, कौशल, बादल, लुकश, ट्वीस्टर, सागर, जांबाज, शिवाजी, अंजलि, चांद और पवन नाम के अनुसार गुण वाले भी हैं।

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