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इलाज नहीं दिया, कफ़न तो दे दो साहब!:बिहार की 8 हजार पंचायतों में कबीर अंत्येष्टि के14 हजार से ज्यादा आवेदन लंबित, मात्र 1887 के परिवारों को मिला लाभ

पटनाएक वर्ष पहलेलेखक: शालिनी सिंह
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कबीर अंत्येष्टि योजना। - Dainik Bhaskar
कबीर अंत्येष्टि योजना।

राज्य सरकार कोरोना से मौत के सभी मामलों में सरकारी खर्चे पर अंत्येष्टि कराने का ऐलान कर चुकी है, लेकिन सच यह है कि केवल BPL परिवारों को दी जानेवाली अंत्येष्टि योजना में भी सरकारी सिस्टम राहत देने में फेल साबित हो रहा है। कोरोना त्रासदी के बीच कबीर अंत्येष्टि योजना में अब तक सिर्फ 1887 को मदद मिल पाई है।

मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक में सामने आई हकीकत
कोरोना त्रासदी में कबीर अंतेष्ठी योजना की सुस्त रफ्तार का मामला मुख्य सचिव की बैठक में सामने आया। समाज कल्याण विभाग से जुड़ीं योजनाओं की समीक्षा के दौरान बैठक में कबीर अंत्येष्टि योजना से जुड़ी रिपोर्ट रखी गई। इसमें विभाग ने इस योजना के तहत 1887 मृतकों के परिवारों को इसका लाभ दिए जाने की बात कही। योजना का यह हाल तब है, जब सरकार ने सभी कोरोना मृतकों की अंत्येष्टि सरकारी खर्चे पर की जाने ऐलान कर दिया है, लेकिन कोरोना काल में BPL परिवारों को भी योजनाओं का सही से लाभ नहीं मिल पा रहा है।

दो साल से पंचायतों को नहीं दी जा रही अग्रिम राशि
कबीर अंत्येष्टि योजना में मृतक के परिवार को जल्द से जल्द मदद की राशि दी जाने का प्रावधान है। मृतक के परिवार को अंत्येष्टि के लिए 3 हजार रुपए दिये जाते हैं। इस योजना के अंतर्गत राज्य की तरफ से हर पंचायत को पहले से ही 5 अनुदान भुगतान के लिए 15 हजार रुपए की राशि भेज दी जाती है, ताकि जरूरत के समय ये राशि पात्र लोगों को दी जा सके। ऐसे ही नगर पंचायत में 30 हजार रुपए, नगर परिषद में 60 हजार और नगर निगम में 90 हजार रुपए पहले से ही उपलब्ध रहती हैं, ताकि समय से परिवारों को योजना का लाभ दिया जा सके, लेकिन 2 साल से इस पूरी प्रक्रिया को ही बदल दिया गया है। अग्रिम राशि पंचायतों को नहीं दी जा रही है, लिहाजा पंचायतों में मामले लंबित पड़े हैं।

हर पंचायत में 20 से 25 मामले हैं लंबित

  • बक्सर की चौसा पंचायत के मुखिया बृजबिहारी के अनुसार सरकार की कबीर अंत्येष्टि योजना 2 साल से पूरी तरह ठप है। वजह यह है कि पंचायतों को इस मद में अग्रिम राशि नहीं दी जा रही। आवेदन इकट्‌ठे अब सबसे पहले जिला प्रशासन को भेजा जाता है। वहां से आवेदनों को स्वीकृति दी जाती है। इसके बाद राशि ग्राम पंचायत के खाते में भेजी जाती है, जहां से राशि मृतक के परिवार के खाते में भेजी जाती है। बृजबिहारी कहते हैं सिर्फ हमारी पंचायत में 22 आवेदन अभी लंबित हैं।
  • कुछ ऐसा ही हाल बक्सर की चुन्नी पंचायत का भी है, जहां कबीर अंत्येष्ठी के 20 आवेदन लंबित हैं।
  • पटना जिले की पुनपुर पंचायत के मुखिया जयप्रकाश पासवान के मुताबिक उनकी पंचायत में 36 आवेदन लंबित हैं।
  • सारण जिले के जलालपुर प्रखंड की नवादा पंचायत के मुखिया अशोक कुमार सिंह के मुताबिक उनकी पंचायत में 28 आवेदन लंबित हैं।
  • अशोक कुमार सिंह खुद बिहार राज्य मुखिया महासंघ के अध्यक्ष भी हैं। अशोक कुमार सिंह की मानें तो बिहार की 8 हजार पंचायतों में 14 हजार से ज्यादा आवेदन कबीर अंत्येष्टि योजना में लंबित हैं। कोरोना काल में हालात और भी गंभीर हो गए हैं।
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