भास्कर स्टिंग...कैसे बनती है अवैध बालू ढोने वाली नाव:प्रतिबंध के बावजूद सारण में बनती हैं ये, पुलिस-प्रशासन मेहरबान; 16 लाख से ज्यादा एक की कीमत

पटनाएक वर्ष पहलेलेखक: अमित जायसवाल

बिहार की सोन और गंगा नदी में बालू का अवैध खनन किसी से छिपा नहीं है। माफियाओं के साथ पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत भी सामने आ रही है। कई पुलिसवाले और खनन अधिकारी सस्पेंड भी किए गए, मगर ये अवैध कारोबार बंद नहीं हुआ। बड़ी वजह यह है कि बालू ढोने वाली नावों से सबकी नजरें हटी है। अगर बालू ढोने वाली इन विशेष नावों पर सरकार के नुमाइंदो ने ईमानदारी से नियंत्रण कर लिया तो अवैध बालू के कारोबार को रोका जा सकता है। हालांकि, अभी बालू खनन के लिए ये विशेष नावें सारण जिले में चोरी-छिपे बनाई जा रही हैं।

गंगा किनारे तैयार होती हैं नावें
सारण का जिला मुख्यालय छपरा है। यहां 13 किलोमीटर की दूरी पर डोरीगंज थाना है। इसी इलाके के तिवारी घाट पर लोहे की नाव बनाने का काम होता है। तिवारी घाट पर गंगा नदी के किनारे कई ठेकेदार आपको मिल जाएंगे। इनके पास कोई लाइसेंस नहीं है। अवैध रूप से ये लोहे की नाव बनाते हैं।

एक नाव बनाने में करीब 2 महीने का वक्त
अगर आपको नाव बनवानी है तो तिवारी घाट पर ही जाना होगा, जो डोरी गंज में मेन रोड से डेढ़ किलोमीटर अंदर है। तिवारी घाट पर पहुंचना आसान नहीं है। जगह-जगह पर माफियाओं के गुंडे तैनात हैं जो हर आने-जाने वाले पर नजर रखते हैं। इन सब खतरों के बावजूद भास्कर टीम तिवारी घाट तक पहुंची। स्टिंग के दौरान कैमरे में एक ठेकेदार सुशील शर्मा से बातचीत के पूरे वाकए को रिकॉर्ड किया। इसी बातचीत में पता चला कि एक नाव को बनाने में करीब 15 टन लोहा और दो महीने का वक्त लगता है।

पुलिस का कोई डर नहीं
एक नाव की कीमत 16 से 20 लाख रुपए तक होती है। साल भर में एक ठेकेदार लगभग 50 नावें तैयार करके दे देता है। एक नाव में 15 से 20 ट्रैक्टर ट्रेलर के बराबर बालू लोड की जाती है। ये पूरा काम गैरकानूनी है। लेकिन, इन्हें पुलिस का कोई डर नहीं। क्योंकि, तिवारी घाट की तरफ डोरीगंज थाना पुलिस जाती ही नहीं है। बालू के अवैध खनन और लोहे की नाव बनाने वालों पर पुलिस पूरी तरह से मेहरबान है। यही वजह है कि कुछ दिनों पहले ही डोरीगंज के थानेदार को वहां से हटा दिया गया था।

जानिए, ठेकेदार सुशील और बालू व्यापारी बनकर गए भास्कर रिपोर्टर के बीच की बातचीत:

रिपोर्टर : मोकामा में नाव बनवानी है?

ठेकेदार : कहीं जाकर नहीं बनाते हैं। कंडीशन ये है।

रिपोर्टर : यहीं ऑर्डर देना पड़ेगा?

ठेकेदार : जी हां, यहीं पर हमारा साल भर काम चलता है। कहां घर पड़ेगा आपका?

रिपोर्टर : मोकामा

ठेकेदार : अब तो धीरे-धीरे ऑफ सीजन आएगा। नाव बनते-बनते सीजन ऑफ हो जाएगा।

रिपोर्टर : नाव बनने में कितना टाइम लग जाएगा‌?

ठेकेदार : दो महीने। आप सब सामान खरीद कर दे देंगे तो दो महीना में कंप्लीट करके दे देंगे। A to Z सारा मैटेरियल आपको खरीदकर देना होगा। हम बनाकर दे देंगे।

रिपोर्टर : मैटेरियल हमको कहां मिलेगा?

ठेकेदार : सब मिल जाएगा। यहीं पर बैठे-बैठे। पटना से लोहा आएगा।

रिपोर्टर : खर्चा कितना आएगा?

ठेकेदार : आपको कितनी बड़ी नाव बनवानी है? एस्टीमेट आपका होगा न?

रिपोर्टर : देखिए..हमको कोई आइडिया नहीं है।

ठेकेदार : अच्छा...उसको किस चीज में यूज करना है?

रिपोर्टर : जो चल रहा है।

ठेकेदार : बालू के लिए?

रिपोर्टर : हां।

ठेकेदार : आपको भेजा गया है तो ये तो बताएंगे न कि कितना फीट बड़ा बनाना है?

रिपोर्टर : सामने बन रही लोहे की नाव को देखते हुए...ये कितने फीट का है?

ठेकेदार : ये तो 12/13 का है।

रिपोर्टर : इसी तरह का बनवाने में कितना खर्च आएगा?

ठेकेदार : देखिए... 12 का बनवाइए या 18 का, इसमें अंतर 1 लाख रुपए का आएगा। ये जो बन रहा है, इसी का थोड़ी उंचाई और चौड़ाई बढ़ा देंगे तो इसकी कैपेसिटी बढ़ जाएगी। बड़ा-छोटा में रुपया का ज्यादा अंतर नहीं है।

रिपोर्टर : ये कितना बड़ा नाव बना रहे हैं आप?

ठेकेदार : ये तो 12/13 फीट की छोटी नाव है।

रिपोर्टर : ये छोटी नाव है?

ठेकेदार : यहां के लिए ये छोटी नाव है। इससे बड़ी-बड़ी नाव बनती हैं। इसमें कई मेरी पसर्नल बोट है। हमारे पास 20-20 फीट की बोट हैं।

रिपोर्टर : 20 फीट की नाव में कितने टन बालू आ जाएगा?

ठेकेदार : 20 टेलर (ट्रैक्टर का) बालू आ जाएगा।

रिपोर्टर : खर्च कितना आएगा।

ठेकेदार : इस समय लोहे का रेट बढ़ा हुआ है। कम से कम 15 टन लोहा लगेगा। हमको लोहा का रेट पता करना होगा। फिर भी आपको टारगेट 16 लाख से अधिक का लेकर चलना पड़ेगा।

रिपोर्टर : नदी में टकराने पर लोहे की नाव पर क्या असर पड़ता है? लोहा से बना नाव सेफ है?

ठेकेदार : टकरा गया तो पानी में सेफ्टी क्या? इतना मजबूत बनाया जाता है कि टकराने पर इसमें कुछ नहीं होता है। पानी में अगर किसी बड़े पत्थर से टकराता है तो टेढ़ा हो जाता है।

रिपोर्टर : इसकी स्पीड कैसी होती है? मोटर कौन सा लगता है?

ठेकेदार : इसके लिए दो तरह का इंजन लगता है। इसमें एक तीन सिलेंडर, जो 45HP को होता है। चार सिलेंडर की इंजन लेंगे तो उसकी कीमत 3 लाख रुपए हो जाती है। ये इंजन 104HP की होती है। इसमें सक्सेस तीन सिलेंडर वाली इंजन है।

रिपोर्टर : इंजन में इस्तेमाल क्या होता है...डीजल?

ठेकेदार : हां...डीजल, सबसे ज्यादा आयशर का इंजन चलता है। ऐसे इंजन पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है कि बोट 20 फीट का है या 22 फीट का।

रिपोर्टर : लकड़ी वाला नाव बनना बंद हो गया?

ठेकेदार : लकड़ी वाले का क्या करेंगे? लकड़ी वाले नाव को लोहे की ये नाव टक्कर मार दी तो उसका काम खत्म हो जाएगा।

रिपोर्टर : इसमें भी तो जंग वगैरह लगता होगा न?

ठेकेदार : इस नाव को 5-6 साल तक कुछ नहीं होता है। इसमें कोई एक्स्ट्रा खर्चा नहीं है। लकड़ी वाले में क्या है कि वो सूखने लगती है। उसमें दरार आ जाती है। इससे पानी उसके अंदर जाने लगता है। इससे खर्च बढ़ जाता है। अगर अभी लोहे की नाव बनवाने में 15 लाख खर्च हो रहा है तो लकड़ी की नाव बनवाने में 25 से 30 लाख रुपया लग जाएगा। अब नदी में 95 प्रतिशत नाव लोहे से बनी चल रही है।

कुछ देर के बाद...

ठेकेदार: क्या है न सर हमारा बहुत सारा काम यहीं चलता है। एक साल में 50 बोट बना ही देते हैं। हमारे पास आदमी भी रहता है। इसमें लगने वाली जितनी भी चीजें हैं, वो सब हमारे पास उपलब्ध होती है।

रिपोर्टर : साल में अगर 50 नाव बनाते हैं तो बड़ा टेंडर आपके पास आता है?

ठेकेदार : हमारे पास 4 से 6 महीने पहले से एडवांस काम होता है। ये जो भी नाव का काम कर रहे हैं, 4 महीने पहले का ऑर्डर है।

रिपोर्टर : इसका मतलब है कि आपका काम बढ़िया होता होगा तब न इतना ऑर्डर आता है आपके पास?

ठेकेदार : हां, आप जैसा काम चाहेंगे वैसा हो जाएगा।

क्या बोले एसपी

इस मामले पर सारण के SP संतोष कुमार से बात की गई। उन्होंने कहा कि अभी तो तिवारी घाट पर लोहे की नाव नहीं बनती है। अब तो तिवारी घाट पूरा पानी में डूबा हुआ है। वहां पर हम लोगों ने एक बार रेड की थी। वहां पर नाव बन रही थी तो हमने सारा सामान सीज कर दिया था। कई लोगों को जेल भी भेजा गया था। लोहे की नाव बनाने के लिए कहीं कोई लाइसेंस नहीं था।

SP का दावा है कि उनके कार्रवाई के बाद अवैध रूप से बनने वाली लोहे की नाव बननी बंद हो गई। पुलिसिया कार्रवाई के कई दिनों बाद भास्कर की टीम तिवारी घाट गई थी और वहां खुले आसमान के नीचे अवैध रूप से बन रहे एक नहीं, बल्कि कई लोहे के नाव का स्टिंग किया। ठेकेदार से बातचीत की।

इनपुट:- डीएस तोमर

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