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वेटिंग फॉर पोस्टिंग:नीतीश कुमार को पीएम मैटेरियल कहे जाने पर सुशील मोदी की ली गई कुर्बानी, अंतिम ट्वीट पर छलका था दर्द

पटना11 दिन पहलेलेखक: बृजम पांडेय
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सुशील कुमार मोदी को डिप्टी सीएम नहीं बनाया गया। उन्हें केंद्र भेजा जा सकता है।
  • डिप्टी सीएम नहीं बनाए जाने पर कहा था- मुझसे कोई कार्यकर्ता का पद नहीं छीन सकता
  • नीतीश कुमार की तारीफों के पुल बांधना केंद्रीय नेतृत्व को पच नहीं रहा था

'मुझसे कोई कार्यकर्ता का पद नहीं छीन सकता'- सुशील मोदी ने उप मुख्यमंत्री पद से हटते ही यह ट्वीट किया था। इनके 'छीन' शब्द पर गौर करें तो सुशील मोदी ने अपनी वेदना इस एक शब्द में कह दी थी। हालांकि इस पूरी घटना के पीछे की कहानी कुछ और बयां करती है। मामला 2015 के विधानसभा चुनाव से शुरू होता है। भाजपा ने बिहार में अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था। सुशील मोदी को अहम जिम्मेदारी दी गई थी लेकिन भाजपा महज 53 सीटों पर सिमट गई थी।

तब सुशील मोदी के सुझाए सभी चेहरे मंत्री बना दिए गए थे
उसके बाद जब 2017 में नीतीश कुमार महागठबंधन से नाता तोड़ कर एनडीए में शामिल हुए तो उस समय नीतीश कुमार ने भाजपा के सामने सुशील मोदी को डिप्टी सीएम बनाने का प्रस्ताव रखा था। फिर सुशील मोदी के सुझाए लगभग सभी चेहरों को मंत्री बना दिया गया। उस समय भाजपा आलाकमान को यह बात नागवार गुजरी थी लेकिन भाजपा के देशभर में विस्तार के रास्ते में ये अड़चन बहुत मायने नहीं रखती थी। भाजपा आलाकमान ने उस वक्त सही समय आने का इंतजार करना ही बेहतर समझा। इस चुनाव में भाजपा को ज्यादा सीटें मिलीं तो पिछला सभी कसर निकाल लिया गया।

नीतीश तो रहे लेकिन सुशील नप गए
'नीतीश कुमार पीएम मैटेरियल हैं'- 3 सितंबर 2012 को सुशील मोदी के मुंह से निकली ये बात भी भाजपा आलाकमान को चुभ गई थी। समय-समय पर नीतीश कुमार की तारीफ करना और उनके कामों को लेकर तारीफों के पुल बांधना केंद्रीय नेतृत्व को पच नहीं रहा था। इसी बीच 18 सितंबर 2019 को सुशील मोदी ने यहां तक कह दिया कि मझधार में फंसने पर जहाज के कैप्टन को नहीं बदला जाता है। ये बात उन्होंने नीतीश कुमार को फिर से सीएम बनाए जाने को लेकर कही थी। दबी ज़ुबान में भाजपा के नेता कहने लगे थे कि सुशील मोदी भले भाजपा में हों लेकिन वो जदयू के लिए ही काम करते हैं। इन तमाम बातों को एक सूत्र में बांधते हुए बिहार में भाजपा पर एकाधिकार जमाने वाले सुशील मोदी को इस बार पूरी तरह से ठिकाने लगा दिया गया।

भाजपा आलाकमान ने नीतीश के Yesman को किया No
सुशील मोदी, नंदकिशोर यादव, प्रेम कुमार, राम नारायण मंडल समेत पुरानी पूरी टीम को भाजपा आलाकमान ने बदल दिया। सूत्रों की मानें तो सभी मंत्रियों पर ये आरोप है कि उन्होंने मंत्रालय तो ठीक से चलाया लेकिन भाजपा को नीतीश कुमार के सामने झुकाकर रखा। दूसरी ओर भाजपा लगातार पूरे देश में बेहतर प्रदर्शन कर रही थी। केंद्रीय नेतृत्व ने मंगल पांडेय को इसलिए भी दोहरा दिया कि वो संगठन और संघ में तालमेल बनाए रखते हैं। ब्राह्मणों के बड़े चेहरा हैं।

राज्यसभा सांसद बनाया जा सकता है
सुशील मोदी के बारे में भाजपा नेतृत्व को ये पता है कि वो एक काबिल नेता हैं लेकिन भाजपा ने उनको बिहार प्रदेश की राजनीति से बिलकुल अलग करने का मन बनाया हुआ है। ऐसे में सुशील मोदी के लिए केंद्र में जगह बनाई जा रही है। बताया तो ये भी जा रहा है कि उन्हें दिवंगत रामविलास पासवान की जगह राज्यसभा सांसद बनाया जा सकता है और केंद्र में मंत्री का दायित्व दिया जा सकता है। लेकिन इन सभी प्रक्रियाओं में अभी वक्त है और इस दौरान सबकुछ ठीक रहा तब ही सुशील मोदी केंद्र में मंत्री बन सकते हैं। नहीं तो यह राजनीति का चक्र है, उल्टा भी चलता है।

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