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'शराब के असली माफिया नीतीश कुमार':तेजस्वी बोले-शराब मामले में CM सब जानते हैं, गृह विभाग भी उन्हीं के पास, फिर भी मंत्री पर नहीं की कार्रवाई

पटनाएक वर्ष पहले
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प्रेस कॉन्फ्रेंस करते तेजस्वी यादव। - Dainik Bhaskar
प्रेस कॉन्फ्रेंस करते तेजस्वी यादव।

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शराब मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा है। उनहोंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यहां तक कह दिया कि शराब के असली माफिया नीतीश कुमार हैं। बिहार सरकार के मंत्री रामसूरत राय जिस स्कूल के संस्थापक हैं, वहां भारी मात्रा में शराब मिली है, लेकिन CM अनजान बने बैठे हैं। सरकार मंत्री रामसूरत राय को बर्खास्त करे।

तेजस्वी यादव ने कहा कि एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि बिहार में शराबबंदी के बाद 30 लाख लीटर शराब आ चुकी है, लेकिन मैं कहता हूं कि 50 लाख लीटर से अधिक शराब बिहार में आ चुकी है और पुलिस बता रही है कि 9 लाख लीटर शराब बरामद की गई है। JDU के कई विधायक शराब के नशे में ठुमके लगाते दिख चुके हैं, लेकिन अब तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई। नीतीश कुमार सरकार चला रहे हैं और उन्हें इन सब बातों की जानकारी ही नहीं है। बिहार में 20 हजार करोड़ का शराब का काला कारोबार है। इससे ज्यादा मुनाफे का कोई कारोबार बिहार में नहीं है।

ऐसा लाचार मुख्यमंत्री देशभर में नहीं
तेजस्वी ने कहा कि सबसे ज्यादा कमजोर और बेबस मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं। देश में ऐसे थके हुए और बेबस मुख्यमंत्री कोई दूसरा नहीं। इतने प्रमाण के बावजूद रामसूरत राय पर किसी तरह की कार्यवाही नहीं हो रही, जबकि गृह विभाग मुख्यमंत्री के पास है। शराब के मामले में जिन अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो रही है, वह भी वंचित समाज से आते हैं। कहा कि रामसूरत राय स्पष्टीकरण दें कि संस्थान की वह जमीन किसके नाम पर है और जिस संस्थान में शराब मिली है, उसके संस्थापक वे हैं कि नहीं? बिहार में मेवालाल चौधरी, अशोक चौधरी, रामसूरत राय से जुड़े ऐसे कई मामले हैं, जिनके बारे में नीतीश कुमार की जानकारी नहीं रही।

शराब मामले में कार्रवाई सिर्फ गरीबों पर
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि शराब मामले में बड़े लोगों पर कार्रवाई नहीं हो रही है। सिर्फ गरीबों पर कार्रवाई हो रही है। शराब के मामले में सबसे ज्यादा दलित और अतिपिछड़े जेल में हैं। बिहार सरकार में 64 फीसदी मंत्री दागी हैं। इनमें से कई पर बलात्कार, मर्डर और अपहरण के भी मामले दर्ज हैं। रामसूरत राय का मामला सदन में भी रखा, इसके बावजूद कोई कार्यवाही नहीं हो रही।

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