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जातीय जनगणना पर बढ़ेगी सियासी खींचतान:तेजस्वी बोले- लालू प्रसाद की लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे; चिराग भी आ सकते हैं साथ, क्योंकि रामविलास भी चाहते थे जातीय जनगणना हो

पटना4 दिन पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद
तेजस्वी यादव, नेता प्रतिपक्ष।

बिहार में जातीय जनगणना पर सियासत तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) आंदोलन की तैयारी में जुट गया है। गुरुवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि वह जनगणना के सवाल पर लालू यादव की राय से एक इंच भी इधर-उधर नहीं हैं। यानी जातीय जनगणना चाहते हैं। उन्होंने संकेत दे दिया है कि जातीय जनगणना को लेकर लड़ाई लड़ी जाएगी। इस मुद्दे पर रामविलास पासवान भी लालू यादव से सहमत थे। अब उनके बेटे चिराग उनके साथ आएंगे कि नहीं, इसकी घोषणा चिराग ही कर सकते हैं। भाजपा के खिलाफ दोनों राजनीतिक वारिस एकजुट हो सकते हैं। तेजस्वी ने साफ शब्दों में कहा है कि जातीय जनगणना के लिए हमारे दल ने लंबी लड़ाई लड़ी है और लड़ते रहेंगे। यह देश की बहुसंख्यक यानी लगभग 65 फीसदी से अधिक वंचित, उपेक्षित और प्रताड़ित वर्गों के वर्तमान और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।

तेजस्वी ने कहा कि बिहार के दोनों सदनों में BJP जातीय जनगणना का समर्थन करती है, लेकिन संसद में बिहार के ही पिछड़े वर्ग के राज्यमंत्री से जातीय जनगणना नहीं कराने का ऐलान करवाती है। केंद्र सरकार OBC की जनगणना क्यों नहीं कराना चाहती? BJP को पिछड़े /अतिपिछड़े वर्गों से इतनी नफरत क्यों है?

जनगणना का जिक्र करते हुए तेजस्वी ने कहा कि जनगणना में जानवरों की गिनती होती है। कुत्ता-बिल्ली, हाथी-घोड़ा, शेर-सियार, साइकिल-स्कूटर सबकी गिनती होती है। कौन किस धर्म का है। उस धर्म की संख्या कितनी है। इसकी गिनती होती है। उस धर्म में निहित वंचित, उपेक्षित और पिछड़े समूहों की संख्या गिनने में क्या परेशानी है? उनकी गणना के लिए जनगणना किए जाने वाले फॉर्म में महज एक कॉलम जोड़ना है। उसके लिए कोई अतिरिक्त खर्च भी नहीं होना है अर्थात् सरकार पर कोई वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ेगा।

पिछड़े वर्गों की वास्तविक संख्या जानने के बाद ही योजना बननी चाहिए

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब तक पिछड़े वर्गों की वास्तविक संख्या ज्ञात नहीं होगी उनके कल्यानार्थ योजनाएं कैसे बनेंगी? उनकी शैक्षणिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक बेहतरी कैसे होगी? उनकी संख्या के अनुपात में बजट कैसे आवंटित होगा? वो कौन लोग हैं जो नहीं चाहते कि देश के संसाधनों में से सबको बराबर का हिस्सा मिले? मोदी सरकार पिछड़े वर्गों के हिंदुओं को क्यों नहीं गिनना चाहती? क्या उन पिछड़े वर्गों के 70-80 करोड़ लोग हिंदू नहीं है?

पार्टियां अपना आधार वोट बैंक देख रही हैं

जातीय जनगणना से सबसे बड़ा लाभ पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों को होगा। उसी अनुसार आरक्षण बढ़ भी सकता है। इसलिए राष्ट्रीय जनता दल जैसी पार्टियां जिसका आधार वोट यही जातियां हैं, वह जातीय जनगणना पर जोर दे रही हैं। नीतीश कुमार के अति पिछड़ा वोट बैंक को भी इससे लाभ होगा, इसलिए भाजपा के साथ सरकार में रहने के बावजूद नीतीश कुमार जातीय जनगणना का पक्ष ले रहे हैं। बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद, रामविलास पासवान और नीतीश कुमार का आधार वोट बैंक दलित और पिछड़ी-अतिपिछड़ी जातियां रही हैं।

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