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बिहार में राजभवन Vs राज्य सरकार:आंसरशीट घोटाले में फंसे LNMU के कुलपति को चांसलर अवॉर्ड; गुस्साए शिक्षा मंत्री कार्यक्रम में नहीं पहुंचे

पटना6 दिन पहले
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बिहार में राजभवन और शिक्षा विभाग के बीच तनातनी बढ़ गई है। मंगलवार को राजभवन में आयोजित चांसलर्स अवॉर्ड कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी नहीं गए थे। इस आयोजन में ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी (LNMU) के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र प्रताप सिंह को सर्वश्रेष्ठ कुलपति का चांसलर अवॉर्ड दिया गया। सुरेंद्र प्रताप पर वित्तीय अनियमितता का आरोप है। कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए शिक्षा मंत्री ने बयान दिया कि चांसलर अवार्ड की स्थापना से लेकर चयन तक में शिक्षा विभाग शामिल नहीं है। शिक्षा मंत्री ने सुरेन्द्र प्रताप सिंह पर लगे आरोपों की उच्चस्तरीय जांच की भी मांग की।

इसकी खूब चर्चा है कि....
इस तनातनी के बीच मंगलवार की रात कुलाधिपति/राज्यपाल फागू चौहान दिल्ली गए हैं। वे बुधवार यानी आज गृह मंत्री अमित शाह और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से मिलेंगे। इसकी खूब चर्चा है कि बिहार के विश्वविद्यालय में गड़बड़ियां उजागर होने और राज्य सरकार से तनातनी होने के बाद तो उन्हें बुलाया गया है। चांसलर अवॉर्ड के बाद यह तनातनी और बढ़ गई है।

LNMU के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र प्रताप सिंह।
LNMU के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र प्रताप सिंह।

शिक्षा मंत्री ने कहा चांसलर्स अवार्ड में सरकार शामिल नहीं
शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि- 'विभाग या सरकार का कही से चांसलर अवार्ड में संबद्ध नहीं है। एक कुलपति के यहां विजिलेंस का रेड हुआ है, जो बातें कुलपति को लेकर सामने आई हैं, उससे कुलपति नियुक्ति का जो प्राधिकार है उसे सचेत रहना चाहिए। अगर इस तरह के तत्व VC की कुर्सी तक पहुंच जाते हैं तो कुलपति कार्यालय और सरकार की छवि धूमिल होगी। सरकार पूरे मामले में कहीं जुड़ी हुई नहीं होती है, फिर भी अंत में जिम्मेदारी सरकार पर आ जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों की पहचान होनी चाहिए। ऐसे लोग कुलपति न बन पाएं ऐसी व्यवस्था जरूर होनी चाहिए।'

दो कुलपतियों पर लगे हैं गंभीर आरोप
बता दें कि LNMU के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र प्रताप सिंह पर ज्यादा कीमत पर उत्तर पुस्तिकाओं की खरीद का आरोप लगा है। दूसरा बड़ा आरोप लगा है कि मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेन्द्र प्रसाद पर। इनके यहां निगरानी की छापेमारी भी पिछले दिनों हुई थी। इन पर लगभग 30 करोड़ रुपए की गड़बड़ी का आरोप है। मगध विश्वविद्यालय के कुलपति ने विभूति नारायण सिंह को प्रभार दिया है और खुद चिकित्सा अवकाश पर चले गए हैं।

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