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  • The Chain Of Corona Infection Has Been Discovered Since 6 October, Where The Infected Have Gone… No One Knows Anything In Patna

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महामारी के कहर के साथ लापरवाही भी जारी:कोरोना संक्रमण की चेन 6 अक्टूबर से खोजनी कर दी बंद, संक्रमित कहां-कहां घूमे… किसी को कुछ पता नहीं

पटनाएक महीने पहलेलेखक: मनीष मिश्रा
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पटना के गार्डिनर अस्पताल में कोविड जांच के इंतजार में खड़े लोग।
  • जिला प्रशासन की पूरी टीम इस काम को छोड़ लग गई चुनाव कराने में
  • अब सिर्फ जिला स्वास्थ्य समिति को जिम्मा, जिसके पास कर्मी ही नहीं

संक्रमित लोग कहां-कहां गए और किनसे मिले, इसकी पूछताछ और जांच के पूरे नेटवर्क ने बिहार में कोरोना संक्रमण को काफी हद तक रोका, लेकिन 6 अक्टूबर से इसे बंद कर दिया गया है। जिला प्रशासन की पूरी टीम एनजीओ की मदद से यह काम कर रही थी, जो अब चुनावी सरगर्मी के बीच बंद है। अब कोरोना संक्रमण की चेन ढूंढ़ने का काम जिला स्वास्थ्य समिति के भरोसे छोड़ दिया गया है, जो सड़क पर मास्क बांटकर 50 रुपए लेने का काम भी कर्मचारियों की कमी के कारण नहीं कर पा रहा है।

चुनाव प्रचार के बीच उमड़ती भीड़ के साथ कोरोना संक्रमितों के सरकारी आंकड़े भी डरा रहे हैं, लेकिन इस बीच कोरोना से लड़ाई को बिहार के सरकारी सिस्टम ने पूरी तरह बंद कर दिया है। दैनिक भास्कर ने संक्रमितों की चेन निकालने के लिए सरकारी सिस्टम के पूरे आंकड़ों और जिला प्रशासन के रोजाना के कार्यों की गहराई से पड़ताल की तो सामने आया कि इस महीने के पहले हफ्ते तक किसी तरह संक्रमण चेन तक पहुंचने की कोशिश की गई, लेकिन चुनावी कार्यों में व्यस्तता के कारण इसकी ओर किसी का ध्यान नहीं गया या इसे जान-बूझकर छोड़ दिया गया।

पुलिस तफ्तीश की तरह होता था कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग का काम
कोरोना संक्रमितों की कांटेक्ट ट्रेसिंग का काम पुलिस की तफ्तीश से कम नहीं होता था। बिहार में कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग के लिए बड़ी टीम लगाई गई थी। पटना में कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग की टीम को डीएम लीड करते थे, इसके साथ ही डीडीसी को प्रभार दिया गया था। तीन एडीएम रैंक के अफसर इसमें लगाए गए थे। केयर इंडिया से लगभग 10 से अधिक लोगों की टीम थी। इसके बाद टीचर्स को लगाया गया था। पूरी टीम में 70 से लेकर 100 लोगों को लगाया गया था।

प्रदेश के अन्य जिलों में भी यही व्यवस्था बनाई गई थी। इसके साथ जिला स्वास्थ्य समिति की टीम को भी लगाया गया था, लेकिन 6 अक्टूबर से चुनाव व्यस्तता के कारण जिला प्रशासन की टीम कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग का काम नहीं कर पा रही है। अब पूरी जिम्मेदारी जिला स्वास्थ्य समिति की है। एक संक्रमित से 25-25 लोगों की जांच कराई जाती थी, लेकिन अब तो संक्रमित के परिवार के सदस्यों की भी बिना लक्षण के जांच नहीं कराई जा रही है।
बड़ी टीम कर रही थी कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग
बिहार में कोरोना संक्रमितों की कॉन्टेक्ट हिस्ट्री निकालने के लिए स्वास्थ्य विभाग अलग काम करता था और जिला प्रशासन की टीम अलग छानबीन कर रही थी। जिला प्रशासन इसकी निगरानी कर रहा था और हर दिन डेटा तैयार करता था। संक्रमित से पहले पूरी छानबीन करने के बाद उसके संपर्क में आए लोगों की पूरी सूची तैयार की जाती थी। फिर एक-एक कर लोगों की जांच कराई जाती थी, ऐसे ही जांच की कड़ी जुड़ती चली जाती थी। इसमें कई बैंक और कई निजी सरकारी अस्पतालों को भी बंद कराया गया था। बिहार में कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग के काम में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के साथ एक बड़ी स्वयंसेवी संस्था को जिम्मेदारी दी गई थी। टेली कॉलिंग के माध्यम से भी ट्रेसिंग की जाती थी। हर केस की 15 दिनों तक मानिटरिंग की जाती थी लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है।

खाजपुरा में कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग से टूटा था कोरोना का चक्र
पटना के खाजपुरा में कोरोना का ऐसा चक्र तैया हुआ था कि पूरा मोहल्ला लॉक करना पड़ता था। आसपास के लोगों को काफी समस्या हो गई थी। संक्रमण तेजी से फैला था और बीएमपी तक पहुंच गया। लेकिन कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग से ही संक्रमण को काबू में किया गया। एक व्यक्ति से कम से कम चार लोगों का कॉन्टेक्ट किया जाता था। खाजपुरा में 200 से अधिक लोगों की कॉन्टेक्ट हिस्ट्री खंगालने के बाद वायरस का चक्र टूटा था।

चुनाव के प्रभाव में संक्रमण का खतरा हवा
मौजूदा समय में सब कुछ अनलॉक है। सिनेमा घरों से लेकर अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ बढ़ गई है। चुनाव सबसे बड़ा भीड़ का कारण है। गांव से लेकर शहर तक सभा में भीड़ है। एक तरफ चुनाव के प्रभाव में जिला प्रशासन व एनजीओ कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग से दूर हो गए, दूसरी तरफ संक्रमितों को खोजकर उनके संपर्क को तलाशना भी अब पुरानी बात हो गई है। अब मरीजों को पॉजिटिव आने पर होम आइसोलेशन की बात कह दी जाती है लेकिन उनकी कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग नहीं हो पाती है। प्रदेश में हर दिन औसतन 1000 मामले आ रहे हैं।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
सिविल सर्जन डॉ. विभा कुमारी का कहना है कि कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग का काम डीएसएच कर रहा है। पूर्व में डीआईओ कराता था लेकिन जिला प्रशासन की भी बड़ी टीम थी। अब जिला प्रशासन नहीं करा रहा है, सिर्फ डीएसएच ही करा रहा है। कोशिश की जाती है कि सभी संक्रमितों की कॉन्टेक्ट हिस्ट्री खंगाली जाए।

बिहार में कोरोना का कहर
बिहार में संक्रमितों की संख्या 204241 से ज्यादा है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इसमें 192594 लोग ठीक हो चुके हैं। इस आधार पर रिकवरी रेट 94.77 बताई जा रही है। प्रदेश में मौत का आंकड़ा 996 है। बात 24 घंटे में नए संक्रमितों की करें तो 1152 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है जबकि 24 घंटे में 6 लोगों की मौत हुई है।

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