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विश्वकर्मा अवार्ड पाने वाली आकांक्षा से खास बातचीत:पटना की बेटी के 'मेडी रोबोट' को मिला नेशनल अवार्ड, दैनिक भास्कर ने सबसे पहले आकांक्षा के इस आविष्कार को दिखाया था

पटनाएक महीने पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद
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केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने आकांक्षा के आविष्कार को 'नर्स रोबोट' नाम दिया। - Dainik Bhaskar
केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने आकांक्षा के आविष्कार को 'नर्स रोबोट' नाम दिया।

पटना की बेटी आकांक्षा श्रीवास्तव को शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन की ओर से 'छात्र विश्वकर्मा अवार्ड' से नवाजा गया। देश के शिक्षा मंत्री धमेन्द्र प्रधान ने उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया। इस भव्य समारोह में केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के साथ ही शिक्षा राज्य मंत्री राज कुमार रंजन, शिक्षा सेक्रेटरी अमित खरे, AICTE के चेयरमैन अनिल सहस्त्रबुद्धे आदि मौजूद रहे। सभी ने आकांक्षा के आविष्कार को देखा भी। दैनिक भास्कर ने पहली बार 19 मई को आकांक्षा के आविष्कार के बारे में बताया था।

आकांक्षा का परिवार पटेल नगर में रहता है। उनके पिता योगेश कुमार हॉकी के चर्चित कोच रहे हैं और अभी एजी ऑफिस, पटना में ऑडिटर के पद पर हैं। खुद योगेश की पहचान इन्वेन्शन मैन की रही है। 38 हजार प्रतिभागियों में से आकांक्षा का चयन किया गया। आकांक्षा को भी यह नहीं पता था कि उनका चयन किस अवार्ड के लिए किया गया। मंच पर इसकी घोषणा की गई। अवार्ड में प्रशस्ति पत्र और 51 हजार रुपए नगद दिए गए।

धर्मेन्द्र प्रधान ने महामारी को याद किया
AICTE, दिल्ली के ऑडिटोरियम में अवार्ड देते हुए केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि जब मुझे कोविड हुआ, उस समय डॉक्टरों और नर्सों के लिए कितना कठिन था मरीजों का इलाज करना, लेकिन इंडिया अपनी टेक्नोलॉजी से समाधान खोज रहा है। प्रधान ने आकांक्षा के आविष्कार को 'नर्स रोबोट' नाम दिया।

मरीज के पास पहुंचे बिना इलाज
कोविड से जब बड़ी संख्या में डॉक्टरों की मौत हो रही थी, उस दौर में आकांक्षा ने एक ऐसा रोबोट बनाया जो मरीज के पास पहुंचे बिना मरीज का ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन लेवल, पल्स रेट, ECG आदि कई तरह की जांच करता था। आकांक्षा BIT इंजीनियरिंग की छात्रा रही हैं।

स्टाल पर बिहार की बेटी के आविष्कार को हर किसी ने सराहा
आकांक्षा ने दिल्ली में अपने आविष्कार 'मेडी रोबोट' का प्रदर्शन भी किया। उनके स्टॉल पर आकर लोगों ने जाना कि बिहार की बेटी ने देश-दुनिया को कितनी जरूरी चीज दी है। आप मेडी रोबोट को अपने मोबाइल से कनेक्ट करके संचालित कर सकते हैं। इसमें लगे टैब पर मरीज को डॉक्टर का लाइव वीडियो भी दिखता रहता है। डॉक्टर दूर बैठकर ही मरीज का इलाज कर सकते हैं।

बिना डॉक्टर के नजदीक गए हो जाएगा आपका इलाज
बिना डॉक्टर के नजदीक गए हो जाएगा आपका इलाज

पिता की हॉबी को बच्चे अपनाने लगे तो बहुत खुशी होती है
भारत सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (भारत सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद्) के छात्र विश्वकर्मा अवार्ड के लिए आकांक्षा के इस रोबोट का चयन बहुत जांच-परख के बाद किया गया। आकांक्षा के पिता योगेश कुमार ने भास्कर से बातचीत में कहा कि पिता की हॉबी को बच्चे अपना लें और उसके लिए नेशनल अवार्ड पा लें तो इससे बड़ी बात क्या होगी। बेटी ने मेरी छाती देश-दुनिया में चौड़ी कर दी।

आकांक्षा श्रीवास्तव से भास्कर की बातचीत

सवाल- आपने इतनी मेहनत से मेडी रोबोट तैयार किया। अब इसकी वजह से आपको छात्र विश्वकर्मा एवार्ड मिला है। अपनी फीलिंग बताएं ?
जवाब- बहुत खुशी हो रही है नेशनल अवार्ड पाकर।

सवाल- मेडी रोबोट को बनाने में कितना समय लगा?
जवाब- यह दो फेज में बना। कुल चार से पांच महीने का समय इसमें लगा।

सवाल- इससे क्या-क्या फायदा हो सकता है लोगों को?
जवाब- पहले तो इसे कोविड महामारी को ध्यान में रखते हुए हमने बनाया था लेकिन अब इसे इंप्रूव करते हुए टेलीमेडिसिन के रुप में बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।

सवाल- वह कैसे? विस्तार से बताएंगीं ?
जवाब- कोरोना काल में डॉक्टर और नर्स को काफी कठिनाई मरीजों की जांच से लेकर इलाज तक में हो रही थी। मरीजों तक खाना आदि तक पहुंचाना तक मुश्किल था। यह रोबोट तमाम तरह के बेसिक कार्य करने के अलावा कई हेल्थ जांच भी करता है। अब टेलीमेडिसिन के तहत गांव के मरीज का इलाज दिल्ली या पटना में बैठे हुए डॉक्टर भी कर सकते हैं, जांच भी कर सकते हैं। दवा भी बता सकते हैं। इससे बहुत जरूरी मरीजों की भीड़ ही डॉक्टर के चैम्बर तक होगी। बाकी लोगों का खर्च और समय भी बचेगा और डॉक्टरों को भी आसानी होगी। खास तौर से दिव्यांग मरीजों और ओल्ड एज मरीजों को काफी राहत मिलेगी।

सवाल- जब आप इस अवार्ड की प्रक्रिया से गुजर रही थीं तो उसका अनुभव बताएं?
जवाब- इसकी प्रक्रिया पिछले नौ महीने से चल रही थी। 38 हजार प्रतिभागी देश भर से इसमें शामिल थे अपने-अपने आविष्कार के साथ। मुझे यह अवार्ड हेल्थ केयर कैटोगरी में दिया गया है। कई स्तरों पर मेडी रोबोट को जांचा परखा गया।

सवाल- आपने पढ़ाई कहां से की और अभी क्या कर रही हैं?
जवाब- मैंने नोट्रेडम पटना से क्लास वन से लेकर ट्वेल्व तक की पढ़ाई की। इसके बाद बीआईटी दुर्ग से बी.टेक. किया। अभी मैं टी.सी. एस. में जॉब कर रही हूं। ब्रिटिश टेलिकॉम का प्रोजेक्ट मुझे मिला है।

सवाल- आपको इस आविष्कार की प्रेरणा कहां से मिली?
जवाब- कोविड महामारी के दौर में पीपीई किट की कमी थी, मास्क की कमी थी, वेटिंलेटर की कमी थी। वह कमी तो धीरे-धीरे दूर हो रही थी लेकिन जब डॉक्टरों और नर्सों की मौत, मरीजों का इलाज करते-करते होने लगी तो वह बहुत क्रिटिकल सिचुएशन था। मेडी रोबोट बनाने का ख्याल मुझे डॉक्टरों और नर्सों की जान बचाने के बारे में सोचते हुए ही आया। जब यह बन गया तो इसका कॉमर्सियल इस्तेमाल भी मैंने नहीं किया। इसे मानवता के लिए सौंप दिया। मेरी मां अलका वर्मा और पिता योगेश कुमार ने मुझे खूब प्रोत्साहित किया। कहीं कोई कठिनाई होती तो पिता जी चीजों को अच्छे से समझाते हैं।

पटना के पिता-पुत्री ने बनाया मेडी रोबोट, हर तरह की जांच कर डॉक्टर के पास भेज देगा आपकी रिपोर्ट

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