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पुलिस विधेयक पर हंगामा है क्यों बरपा:'बिना वारंट किसी को भी शक के आधार पर गिरफ्तार कर सकती है पुलिस', विपक्ष इसे बता रहा काला कानून

पटनाएक वर्ष पहले
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विपक्ष ने पुलिस बिल के खिलाफ सदन में किया हंगामा। - Dainik Bhaskar
विपक्ष ने पुलिस बिल के खिलाफ सदन में किया हंगामा।

बिहार विधानसभा के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि स्पीकर को ही बंधक बना लिया गया हो। हंगामे के कारण मार्शल के द्वारा विपक्ष के विधायकों को उठा-उठा कर सदन के बाहर फेंका गया। नए पुलिस बिल को लेकर सड़क से लेकर सदन तक बवाल हुआ। दोपहर में तेजस्वी-तेजप्रताप के साथ सड़क पर उतरे विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर पत्थर चलाए, कई पुलिसकर्मी घायल हुए। जवाब में पुलिस ने भी खूब धुना। यहां मामला ठंडा पड़ा तो विधानसभा में हालात बेकाबू हो गए। यह सारा बवाल मंगलवार को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक को नहीं पास होने देने को लेकर किया गया। राजद और कांग्रेस की महिला विधायकों ने तो अध्यक्ष के आसन को ही घेर लिया, ताकि बिना स्पीकर के सदन की कार्यवाही चल ही नहीं सके।

डाकबंगला चौराहे पर प्रदर्शन करते तेजप्रताप।
डाकबंगला चौराहे पर प्रदर्शन करते तेजप्रताप।

समझें क्या है नया पुलिस बिल

  • विपक्ष का कहना है कि यह बिल नीतीश के राज में पुलिस की मनमानी को बढ़ावा देने के लिए है। अगर बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में यह पास हो जाता है तो बिहार पुलिस के पास पूरा अधिकार होगा कि वह किसी भी व्यक्ति को बिना वारंट के हिरासत में ले सकती है। किसी के घर या प्रतिष्ठान की तलाशी के लिए भी वारंट की जरूरत नहीं होगी। गिरफ्तारी के बाद आरोपित के साथ जो कानूनी प्रक्रिया जाती है, उसके लिए भी पुलिस स्वतंत्र होगी। जघन्य अपराध लिए दंड देने का अधिकार पुलिस के पास होगा। कोर्ट भी किसी मामले में तभी दखल दे सकेगी, जब पुलिस उनसे ऐसा करने को कहेगी।

तेजस्वी यादव ने इसे फाड़ने लायक कहा था

  • विरोधी दल के नेता तेजस्वी यादव ने इस काले कानून को फाड़ने लायक कह दिया। सदन में इसकी कॉपी फाड़ कर फेंकी भी कई। इस विधेयक पर विपक्ष का कहना है कि राज्य के विकास की जरूरत और हवाई अड्डा, मेट्रो आदि प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के नाम पर यह लाया जा रहा है। बिहार सैन्य पुलिस (BMP) को इस विधेयक के जरिए पुनर्गठित करने की योजना है। किसी गलत कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट को भी संज्ञान लेने का अधिकार नहीं होगा। इसके लिए कोर्ट को सरकार से अनुमति लेनी होगी। स्थापित नियम है कि 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार व्यक्ति की सूचना कोर्ट को दी जाती है। विधेयक में इसकी कोई चर्चा नहीं है।
प्रदर्शन के दौरान डाकबंगला चौराहे पर हुई रोड़ेबाजी।
प्रदर्शन के दौरान डाकबंगला चौराहे पर हुई रोड़ेबाजी।

किन धाराओं के तहत क्या शक्ति होगी

  • इस विधेयक की धारा 8 के तहत बिना वारंट के तलाशी लेने और धारा 9 में यह बात उल्लखित है कि कोई विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी, अनावश्यक विलंब के बिना गिरफ्तार व्यक्ति को किसी पुलिस अधिकारी को सौंप देगा या पुलिस अधिकारी की अनुपस्थिति में ऐसे गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के प्रसंग से संबंधित परिस्थितियों के प्रतिवेदन के साथ नजदीकी पुलिस स्टेशन तक ले जाएगा या भिजवाएगा। धारा 15 में उल्लिखित है कि किसी भी अपराध का संज्ञान कोई भी न्यायालय नहीं ले सकता है।

विधायकों ने स्पीकर को बंधक बनाया, मार्शल ने उठाकर सदन से बाहर फेंका

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