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UPSC टॉपर शुभम कुमार से लीजिए, तैयारी के टिप्स:भास्कर से एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया- बड़े टारगेट को मंथली और दैनिक आधार पर बांटा, हर दिन खुद का किया रिव्यू; गलतियों से सीखा

पटना4 महीने पहलेलेखक: मनीष मिश्रा

UPSC टॉप करने वाले शुभम ने दैनिक भास्कर से एक्सक्लूसिव बातचीत में अपनी सफलता का राज बताया है। उनका मानना है कि UPSC की सफलता के लिए खुद से टारगेट बनाना और खुद से ही रिव्यू करना होता है। गलतियों को नजरअंदाज करने के बजाए उनसे सीखना और फिर ईमानदारी से लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ना होता है। शुभम ने कहा- 'तैयारी करने वाला हर स्टूडेंट ऐसे ही इतिहास रच सकता है, बस आत्मविश्वास के साथ लक्ष्य पाने के लिए पूरी ईमानदरी से समर्पित होना होगा। अब शुभम से जानिए सफलता के मंत्र

भास्कर - ऑनलाइन और ऑफलाइन में किसे तैयारी के लिए बेहतर मानते हैं?

शुभम - ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों के अलग अलग फायदे हैं। अगर सारी सुविधा है तो गांव के लिए ऑनलाइन काफी अच्छा है। पढ़ाई का जो भी मटीरियल चाहिए, वह सभी इंटरनेट के जरिए मिल जाएंगे। तैयारी के लिए बड़ा शहर और बड़ी कोचिंग नहीं चाहिए।

भास्कर - आपने कैसे तैयारी की है, ऑफलाइन या ऑनलाइन?

शुभम - मैं दिल्ली के राजेंद्र नगर में रहता था और मेरी दुनिया एक फ्लैट में ही सीमित थी। UPSC के प्री और मेन एग्जाम के बीच 4 माह तक बाहर एक दो बार ही निकला। बस फ्लैट में रहकर सारी तैयारी ऑनलाइन ही की।

भास्कर - गांव में रहने वाले कैसे तैयारी करें?

शुभम - अब तो गांव में भी इंटरनेट की बेहतर सुविधा है। स्टडी का सारा मटीरियल इंटरनेट के जरिए मिल जाता है। NCERT की सारी बुक ऑनलाइन मिल जाती है, न्यूज पेपर का सब्सक्रिप्शन भी ऑनलाइन मिल जाता है। यूट्यूब पर बहुत सारा स्टडी मटीरियल हैं। बस खुद को लक्ष्य के लिए समर्पित कर तैयारी में ईमानदारी से लगना होगा।

भास्कर - आप अपनी सफलता का राज बताएं?

शुभम - मैंने फ्लैट में एक दोस्त जो सर्विस करते हैं, उनके साथ रहकर तैयारी किया। मेरा दो-तीन लेवल पर प्लान होता था। प्री से लेकर मेन की तैयारी को लेकर बड़े प्लान बनाए। इसके बाद मंथली प्लान बनाया और फिर डेली का प्लान था। मैं सुबह 7-8 बजे से रात के 8-9 बजे तक पढ़ाई का प्लान बनाया था। इसमें बीच में ब्रेक भी होता था। हर सब्जेक्ट की पढ़ाई का अलग-अलग समय तय किया। ऐसा ही प्लान बनाकर एवरेज हर दिन 7 से 8 घंटे की पढ़ाई की है। प्री और मेंस के बीच यह समय बढ़कर 8 से 10 घंटे हो गया था।

भास्कर - आपकी तैयारी का रिव्यू कैसे होता था ?

शुभम - बहुत जरूरी है कि आप जो कर रहे हैं, उसका खुद से मूल्यांकन भी करते रहें। आप जो प्लान तैयार किए हैं, जिस टारगेट पर आप काम कर रहे हैं, उसे कितना अचीव कर पा रहे हैं। डेली का टास्क हो और उसे पूरा किया जाए। बड़े और मंथली, फिर डेली प्लान का टारगेट व अचीवमेंट के रिव्यू के साथ तैयारी करनी है।

भास्कर - आप अपने टारगेट को कितना अचीव कर पाते थे?

शुभम - मैं मोटे तौर पर मंथली और डेली के टारगेट को कभी भी 100% अचीव नहीं कर पाया। मैं 70 से 80% तक ही अचीव किया। यह मानता था कि यह मेरा सक्सेस रहा है। मैं जब लक्ष्य पर टारगेट कर काम करता था तो कुछ भी नहीं सोचता था।

भासकर - कई कारण से बिहार की छवि प्रभावित हुई है, आपका बिहार को लेकर क्या विचार है?

शुभम - बिहार इकॉनामिकली फास्ट ग्रोइंग स्टेट है। कोविड के दौरान भी बिहार की आर्थिक स्थिति ठीक रही है। बिहार के यूथ में असीम ऊर्जा होती है। पहले की जो धारणा बिहार को लेकर लोगों में थी, वह बदल रही है। मैं सोचता हूं, यह अच्छा संदेश है, आने वाले दिनों में हर फील्ड में बदलाव होगा।

भास्कर - पढ़ाई के अलावा खेल-कूद में क्या रुचि रही?

शुभम - तैयारी के साथ मैं टेबल टेनिस के साथ फुटबाल और बॉलीबाल का शौकीन हूं। इसे अच्छे से खेलता हूं।

भास्कर - आप सफलता में टर्निंग प्वाइंट किसे मानते हैं, क्या अनुभव रहा तैयारी का?

शुभम - कभी ऐसा सोचा नहीं था कि रैंक वन आएगा। बस यही था कि IAS के लिए तैयारी कर रहा था। UPSC की पूरी तैयारी के दौरान काफी उतार-चढ़ाव आए। इसमें खुद पर भरोसा रख्ना होता है। जो भी चाहने वाले हैं, परिवार वाले हैं, उनके टच में रहना। जो पॉजिटिव एनर्जी और आत्मविश्वास से भर पाएं, उनके टच में हमेशा रहा।

भासकर - कुछ ऐसे लोग जो निगेटिव रहे हों, कैसे खुद को पॉजिटव बनाएं?

शुभम - हां ऐसे लोगों से दूर रहना होता है और कभी भी निगेटिव लोगों के बारे में नहीं सोचना होता है। आत्म विश्वास और पॉजिटिविटी ही तैयारी का आधार है। इससे कभी भटकना नहीं है।

भास्कर - आपको सबसे अधिक मोटिवेट किसने किया?

शुभम - मुझे सबसे अधिक मोटिवेट मेरे पापा ने किया। वह हमेशा आत्मविश्वास की बात करते थे। कभी अच्छे मार्क्स नहीं आते, तो भी वह आत्मविश्वास भरने का काम करते रहे। वह हमेशा यही विश्वास दिलाते थे कि तुम कर सकते हो, तुमने अच्छे से पढ़ाई की है तो कोई चांस ही नहीं तुम्हें कम मार्क्स मिले। हमेशा निगेटिव एनर्जी से दूर करने का प्रयास करते थे। घर की कोई समस्या हो, वह बताते भी नहीं थे। कोई समस्या शेयर नहीं करते थे। यह मेरे लिए शील्ड की तरह था। कोई रिलेटिव भी बात करना चाहता था तो पापा उन्हें रोकते थे। हर किसी का पॉजिटिव सपोर्ट था, कोई कभी किसी बात या किसी समस्या से कभी डिस्टर्व नहीं करता था।

भास्कर - कभी तैयारी के दौरान घर की बड़ी समस्या जो आपसे छिपाई गई?

शुभम- मेरी मां काफी बीमार हो गई थीं। वह सीरियस हो गई थी। मेंस का एग्जाम था, इस कारण से घर वाले इस बड़ी समस्या को भी नहीं बताए। जब मेंस खत्म हो गया तब मां की बीमारी के बारे में मुझे बताया गया।

भास्कर - बिहार के बारे में और कुछ बताएं जो आप सीख पाएं?

शुभम - मै बचपन से काफी ऑब्जर्व करता रहा हूं, बिहार में गांव की जो चीजें होती हैं, उनको गौर से देखा और गांव से ही काफी मोटिवेशन भी मिला है। गांव की समस्या और गांव के लोगों को देखा तो मुझे लगा कि मै IAS बनकर गांव की समस्या दूर कर अपनी सोसाइटी के लिए कुछ कर पाउंगा। मेरा बड़ा मोटिवेशन मुझे मेरे गांव से ही मिला है।

भास्कर - पूरे देश से बच्चे आए, लेकिन बिहार का एक बच्चा टॉप किया, क्या अलग था आप में?

शुभम - मैं यह नहीं समझता कि मुझमें कुछ ऐसा अलग हैं जो और स्टूडेंट्स में नहीं है। मै भी अन्य की तरह सामान्य छात्र रहा हूं। बस एकाग्रता के साथ संकल्प था कि अच्छा ही करना है। हर दिन को अच्छा बनाने का प्रयास किया। आज का शुभम है, वह कल के शुभम से अच्छा हो और उससे अधिक तैयार हो। मतलब आज का शुभम, कल के शुभम से काफी अलग और आत्मविश्वास वाला हो। मुझे नहीं लगता है कि ऐसा कोई और नहीं कर सकता है। मैं कर सकता हूं तो कोई भी यह कर सकता है।

भास्कर - सोशल मीडिया के किस किस प्लेटफार्म से आप जुड़े हैं?

शुभम - मैं सोशल मीडिया के किसी भी प्लेटफॉर्म से नहीं जुड़ा हूं। मैं सोशल मीडिया पर कहीं भी नहीं हूं। फिल्म का भी मुझे कोई शौक नहीं रहा है।

भास्कर - आपका शौक क्या रहा है?

शुभम - मेरा शौक फोटोग्राफी और शॉर्ट वीडियो बनाकर उसे एडिट करने का है। इसे मैं करता रहता हूं। मोबाइल पर ही वीडियो बनाना, फोटो शूट करना फिर उसे एडिट करना मुझे काफी अच्छा लगता है। बस इसी के लिए फिल्म बनाता हूं।

भास्कर - आप बिहार कैडर चुन रहे हैं, बिहार में कैसे काम करेंगे?

शुभम - मेरी पहली प्राथमिकता बिहार कैडर की है। मैं रूलर डेवलपमेंट के लिए काम करुंगा। बिहार गांव में बसता है, अधिक आबादी गांव की है। सोशल और आर्थिक रूप से गांव के लोगों को कैसे मजबूत बनाया जाए, इस पर काम करना होगा। गांव में रहने वालों के हेल्थ और इनकम के साथ उन्हें हर तरह से आगे बढ़ाने के लिए काम करने का इच्छा रखता हूं। बिहार के गांव के लिए बहुत कुछ करने की इच्छा है, क्योंकि गांव ने मुझे बहुत प्रभावित और मोटिवेट किया है।

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