बिहार के पानी में यूरेनियम का जहर:महावीर कैंसर संस्थान ने पानी की रैंडम सैंपलिंग से किया चौंकाने वाला खुलासा, अब तलाशा जाएगा यूरेनियम का स्रोत

पटना8 महीने पहले

बिहार के कुछ जिलों के हैंडपंप यूरेनियम उगल रहे हैं। यह चौंकाने वाला खुलासा शोध में हुआ है। महावीर कैंसर संस्थान के शोध में पानी का जहर सामने आने के बाद अब यूरेनियम का स्रोत खंगाला जा रहा है। यूरेनियम का हाई लेवल गंडक नदी के पूर्व दक्षिण गंगा की तरफ पाया गया। बिहार के गोपालगंज, सीवान, सारण, पटना, नालंदा और नवादा में इसका लेवल 30 से 50 माइक्रोन तक पाया गया है। अब पूरी टीम यूरेनियम के स्रोत को खंगालने में जुटी है, क्योंकि यह कैंसर और लीवर डैमेज का बड़ा करण है।

पहली बार यूरेनियम का खुलासा
बिहार के पानी में आर्सेनिक तो मिलता रहा है। लेकिन पहली बार यूरेनियम का खुलासा हुआ है। बिहार में ग्राउंड वाटर पर शोध का काम चल रहा है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद के अध्यक्ष और महावीर कैंसर संस्थान के HOD रिसर्च अशोक घोष का कहना है कि वह काफी दिनों से बिहार में पानी पर शोध कर रहे हैं। 2004-05 में आर्सेनिक पर काम करना शुरू किया गया। अब तक बिहार में लगभग 46 हजार हैंडपंपों की जांच कर चुके हैं। पिछले दो तीन साल के शोध में आर्सेनिक के अलावा दूसरे चीजों को लेकर भी काम शुरू किया गया।

यूरेनियम के लिए की गई इंडो-यूके स्टडी
अशोक घोष का कहना है कि हाल में इंडो-यूके स्टडी की गई है। महावीर कैंसर संस्थान के साथ इस शोध में IIT खड़गपुर, नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी, यूके के यूनिवर्सिटी ऑफ मेन चेस्टर, ब्रिटिश जियोलॉजिकल सोसायटी और यूनिवर्सिटी ऑफ बरमिंघम के साइंटिस्ट शामिल हुए। भारत और यूके के साइंटिस्टों के साथ मिलकर हुए शोध में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है।

बिहार के हैंडपंप से लिया गया सैंपल
पूरे बिहार में आर्सेनिक और यूरेनियम के लिए सर्वे किया गया। पहले यह माना जाता था कि बिहार में यूरेनियम नहीं है। झारखंड में तो था, लेकिन बिहार में यूरेनियम की पुष्टि अब तक नहीं हुई थी। पहली बार एक साथ दो रिपोर्ट रिलीज हुई जिसमें यूरेनियम की पुष्टि हुई है।

चौंकाने वाला मामला तो यह है कि जहां यूरेनियम बहुत हाई लेवल में मिला, वहां आर्सेनिक कम था और जहां आर्सेनिक अधिक था, वहां यूरेनियम कम था। एक हैंडपंप में दोनों साथ नहीं पाए गए हैं। यह भी शोध का विषय है। अभी स्टडी में यह भी पता लगाया जाना है कि यूरेनियम का स्रोत कहां से और क्या है।

इन जिलों के हैंडपंप से पाया गया यूरेनियम

  • गोपालगंज
  • सारण
  • सिवान
  • पटना
  • नालंदा
  • नवादा

10 प्रतिशत हैंड पंप में पाया गया यूरेनियम
अशोक घोष का कहना है कि यूरेनियम का नॉर्मल लेवल 30 माइक्रोन/लीटर है, लेकिन बिहार में इसका लेबल 30 से 50 माइक्रोन के बीच आया है, जो खतरनाक माना जाता है। कई जगह हैंडपंप की जांच में नॉर्मल वैल्यू पार की है। बहुत जगह पर यूरेनियम का लेबल काफी अधिक रहा है, लेकिन 50 माइक्रोन तक ही पाया गया है। हालांकि, सभी हैंडपंप में यूरेनियम नहीं पाया गया है, लेकिन 10 प्रतिशत हैंड पंप में यूरेनियम की मात्रा पाई गई है।

घरों के RO से भी नहीं दूर होगा यूरेनियम
राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद के अध्यक्ष और महावीर कैंसर संस्थान के शोध विभाग के HOD अशोक घोष का कहना है कि घर में सामान्य वाटर फिल्टर से भी यूरेनियम दूर नहीं होगा। इसके लिए अलग से विशेष प्रकार का मेमरेन तैयार किया जाता है। साधारण वाटर फिल्टर और RO में जितना भी दावा किया जाए, लेकिन उसमें यूरेनियम को अलग करने की क्षमता नहीं होती है।

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