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जहां बीता लव-कुश का बचपन VIDEO:बिहार के बगहा और नेपाल सीमा के पास है वाल्मीकि आश्रम, माता सीता भी यहीं धरती में समा गईं थीं; 3 नदियों ने बढ़ाई खूबसूरती

बगहा10 महीने पहले
इस आश्रम की खूबसूरती तो गजब की है ही, पौराणिक मान्यता भी काफी है।

तीन नदियों के किनारे स्थित इस स्थान पर रामायण काल में महर्षि वाल्मिकी का आश्रम था। बिहार के बगहा और नेपाल सीमा के पास स्थित वाल्मीकि आश्रम की खूबसूरती गजब की है। वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड के अनुसार, भगवान राम और सीता के आदेश के चलते लक्ष्मण मां सीता को वाल्मीकि आश्रम में छोड़कर अयोध्या लौट गए थे। वाल्मीकि का आश्रम तमसा नदी के तट पर था। इसका वर्णन वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड में मिलता है। वाल्मीकि आश्रम में सीता वनदेवी के नाम से रहती हैं। उस समय वह गर्भवती रहती हैं। वहीं, जुड़वा लव और कुश का जन्म हुआ।

वर्तमान में वाल्मीकि आश्रम वाल्मीकि नगर के भारत और नेपाल सीमा पर स्थित है। यहां आसानी से पहुंचने के लिए नेपाल भी झूला पुल का निर्माण कर रहा है।

लव-कुश ने इसी स्थान पर बांधा था घोड़ा।
लव-कुश ने इसी स्थान पर बांधा था घोड़ा।

तीन नदियों के तट पर है यह आश्रम
इस आश्रम के पास नारायणी, तमसा व सोनभद्र नाम की नदी बहती है। नारायणी को गंगा की तरह ही पवित्र माना जाता है। आश्रम के परिसर में माता सीता का मंदिर स्थित है। यहां माता सीता की रसोई भी बनी है।एक कुआं भी है जिसे लेकर कहा जाता है कि माता सीता इसका प्रयोग पानी के लिए करती थीं। एक पेड़ भी है जिसको लेकर माना जाता है कि यहीं लव-कुश बैठकर ऋषि वाल्मीकि से शिक्षा प्राप्त किया करते थे। वहीं, आश्रम में पेड़ की टहनियों से झूले बने हुए हैं। मान्यता है कि इसी झूले पर वे झूलते थे।

आश्रम स्थित पवित्र कुआं।
आश्रम स्थित पवित्र कुआं।

घोड़े को बांधने का स्थान
भगवान राम ने जब अश्वमेघ यज्ञ कराया था तो कोई भी राजा श्रीराम के घोड़े को पकड़ने की हिम्मत नहीं कर पाया था। रामायण में उल्लेख है कि जब वह घोड़ा यहां पहुंचा तो लव कुश ने उसे बांध लिया था। जब श्रीराम का घोड़ा हनुमान जी छुड़ाने के लिए आए तो लव कुश ने उन्हें परास्त कर बंधक बना लिया था। आज भी यह स्थल यहां बना हुआ है, जहां घोड़े को बांधा गया था। इस जगह पर वाल्मीकि द्वारा बनाए हवन कुंड भी है।

वाल्मीकि आश्रम तक पहुंचने का रास्ता।
वाल्मीकि आश्रम तक पहुंचने का रास्ता।

सीता पाताल प्रवेश
मान्यताओं के मुताबिक, इसी स्थान पर सीता मां पाताल में समा गईं थीं। हनुमान जी और लक्ष्मण की कोई खबर नहीं मिलने पर भगवान राम खुद युद्ध के लिए पहुंचे। तो उन्हें पता चला कि लव- कुश उनके पुत्र हैं। यहीं माता सीता की राम जी से मुलाकात हुई थी। जब राम जी ने माता सीता को स्पर्श किया था तो वे धरती में समा गईं थी।

समाधि स्थल की रखवाली करते हैं हनुमान
ऐसा मान्यता है कि इस समाधि स्थल की रखवाली हनुमान जी करते हैं। आज भी यहां मां सीता पाताल प्रवेश द्वार के ठीक सामने हनुमान जी की मूर्ति है।

नेपाल बना रहा है झूला
वाल्मीकि आश्रम आने के लिए भारत से ही एक मात्र रास्ता है। अगर किसी को भी वाल्मीकि आश्रम आना हो तो उसे भारत ही हो कर आना पड़ेगा। लेकिन, अब नेपाल की तरफ से गंडक नदी में एक झूला पुल का निर्माण किया जा रहा है। इसके द्वारा पर्यटक इस झूला पुल के माध्यम से वाल्मीकि आश्रम पहुंचेंगे। हालांकि, इस पुल के बन जाने से भारत में आ रहे पर्यटकों की संख्या में कुछ कमी आ सकती है। फिलहाल नेपाल का यह प्रोजेक्ट बरसात की वजह से रुका पड़ा है।

रिपोर्ट - आदित्य उपाध्याय।

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