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अब PK का मिशन, बिहार में बदलाव:प्रशांत किशोर बोले- 30 साल से लालू-नीतीश का राज, बदलाव के लिए 3 हजार किमी पदयात्रा करूंगा

पटना20 दिन पहले

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की और साफ संकेत दिए कि वे पॉलिटिक्स में एंट्री करेंगे। पीके ने कहा कि बिहार में बदलाव और नई सोच की जरूरत है। उन्होंने किसी पार्टी का ऐलान नहीं किया, लेकिन अपना प्लान बताया। कहा कि पिछले कुछ दिनों में समाज के हर तबके से बात हुई है। वह बिहार में नई सोच, बदलाव और सुराज का हिमायती है।

पीके बोले कि वे अगले 3-4 महीनों में 3 हजार किलोमीटर पदयात्रा करेंगे। इसकी शुरुआत चंपारण से होगी। करीब 17 हजार लोगों से बात करेंगे। अगर ज्यादातर लोग सुराज और नई सोच के पक्ष में रहते हैं और किसी राजनीतिक पार्टी के ऐलान की जरूरत पड़ती है तो उसका ऐलान भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ये पार्टी प्रशांत किशोर की नहीं होगी।

बिहार में बदलाव के लिए नई सोच की जरूरत।
बिहार में बदलाव के लिए नई सोच की जरूरत।

लालू-नीतीश के राज में बिहार पिछड़ा
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार आज लालू और नीतीश के 30 साल के राज के बाद भी बिहार देश का सबसे पिछड़ा और सबसे गरीब राज्य है। इस सच्चाई को कोई झुठला नहीं सकता है। स्वास्थ्य, शिक्षा समेत कई मानकों पर बिहार आज भी देश के सबसे निचले पायदान पर है। बिहार अगर आने वाले समय में अग्रणी राज्यों की सूची में आना चाहता है तो इसके लिए नई सोच और नए प्रयास की जरूरत है।

बिहार गलत रास्ते पर है
प्रशांत किशोर ने कहा कि आने वाले 10 से 15 सालों में अगर बिहार में बदलाव लाना है तो जिन रास्तों पर बिहार चल रहा है उससे नहीं पहुंच सकते हैं। इसके लिए नई सोच और नई कोशिशों की जरूरत है। कोई भी व्यक्ति यह दावा नहीं कर सकता है कि यह सोच और नई प्रयास की क्षमता किसी एक व्यक्ति के पास है। बिहार के हर नागरिक को आगे आने की जरूरत है तभी जाकर प्रदेश की स्थिति सुधरेगी।

लालू और नीतीश के 30 साल के राज में बिहार पिछड़ा।
लालू और नीतीश के 30 साल के राज में बिहार पिछड़ा।

17 हजार से ज्यादा लोगों से मिलने की तैयारी
प्रशांत किशोर ने कहा कि मैंने पिछले दिनों समाज के हर तबके से बात की है। करीब 150 लोगों से मेरी चर्चा हुई। इनमें से ज्यादातर चाहते हैं कि बिहार में नई सोच और बदलाव आए। आने वाले 3-4 महीनों में बिहार के करीब 17 हजार लोगों से बातचीत करूंगा। सुराज और नई सोच के बारे में उनसे चर्चा होगी। चंपारण से 3 हजार किलोमीटर यात्रा करूंगा। अगर इस यात्रा में ज्यादातर लोगों ने सुराज और नई सोच की बात पर हामी भरी और लगा कि किसी पॉलिटिकल पार्टी के ऐलान की जरूरत है तो उसका ऐलान भी किया जाएगा।

जाति नहीं समाज को जोड़ूंगा
पीके ने कहा कि कई लोगों का मानना है कि बिहार में केवल जाति के आधार पर वोट मिलता है। मैं जाति नहीं बल्कि समाज के सभी लोगों को जोड़ने की कोशिश कर रहा हूं। मैं कोरोना के खत्म होने का इंतजार कर रहा था ताकि किसी नई योजना पर काम कर सकूं। अगर मैं कोरोना के दौरान यात्रा की शुरुआत करता तो लोग मुझपर सवाल खड़ा करते।

मुझे पॉलिटिकल एक्टिविस्ट के तौर पर देखें
अगर राजनीतिक पार्टी का ऐलान हुआ तो वह प्रशांत किशोर की पार्टी नहीं होगी। वह उन लोगों की पार्टी होगी, जो बिहार में बदलाव, सुराज और नई सोच की बात का समर्थन करते हैं। अभी कोई पार्टी नहीं है और न ही कोई मंच। आप मुझे बिहार में एक पॉलिटिकल एक्टिविस्ट के तौर पर देख सकते हैं। मेरा नीतीश कुमार से कोई निजी मतभेद नहीं है। नीतीश कुमार दिल्ली आते हैं और लोग कहने लगते हैं कि मैं जदयू जॉइन करूंगा। लेकिन, यह खाली अफवाहे हैं।

भास्कर से कहा था- 35 दिन में पर्दा उठेगा
दैनिक भास्कर के एडिटर प्रसून मिश्रा ने एक महीना पहले प्रशांत किशोर से विशेष बातचीत की। बातचीत मोदी की खूबी और काबिलियत पर हुई तो विपक्ष की मासूमियत पर भी। पॉलिटिकल एंट्री पर कहा था- अगले 35 दिन में पर्दा उठा देंगे। पढ़िए प्रशांत किशोर का पूरा इंटरव्यू... लिंक पर क्लिक करिए

मोदी को सत्ता में लाकर चर्चा में आए थे PK
प्रशांत किशोर का जन्म 1977 में बिहार के बक्सर जिले में हुआ था। उनकी मां उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की हैं, वहीं पिता बिहार सरकार में डॉक्टर हैं। उनकी पत्नी का नाम जाह्नवी दास है, जो असम के गुवाहाटी में डॉक्टर हैं। प्रशांत किशोर और जाह्नवी का एक बेटा है। PK के राजनीतिक करियर की बात करें, तो वे 2014 में मोदी सरकार को सत्ता में लाने की वजह से चर्चा में आए थे। उन्हें एक बेहतरीन चुनावी रणनीतिकार के तौर पर जाना जाता है। हमेशा से वह पर्दे के पीछे रहकर अपनी चुनावी रणनीति को अंजाम देते आए हैं।

प्रशांत किशोर ने मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान चुनावी रणनीति बनाने की शुरुआत की थी।
प्रशांत किशोर ने मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान चुनावी रणनीति बनाने की शुरुआत की थी।

संयुक्त राष्ट्र की नौकरी छोड़ मोदी की टीम से जुड़े थे
34 साल की उम्र में अफ्रीका से संयुक्त राष्ट्र (UN) की नौकरी छोड़कर किशोर 2011 में गुजरात के तत्कालीन CM नरेंद्र मोदी की टीम से जुड़े थे। इसके बाद ही राजनीति में ब्रांडिंग का दौर शुरू हुआ था। PK को मोदी की उन्नत मार्केटिंग और चाय पे चर्चा, 3डी रैली, रन फॉर यूनिटी, मंथन जैसे विज्ञापन अभियान का श्रेय दिया जाता है। वह इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) नाम का संगठन चलाते हैं। यह लीडरशिप, सियासी रणनीति, मैसेज कैंपेन और भाषणों की ब्रांडिंग करता है।