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बिहार की पहली महिला DG हैं शोभा अहोटकर:22 साल की उम्र में IPS बनीं, खौफ से अपराधी भी इन्हें कहते हैं 'हंटर वाली'

पटना2 महीने पहलेलेखक: अमित जायसवाल
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2020 के अंतिम हफ्ते में बिहार पुलिस के नाम नया रिकॉर्ड जुड़ा। पहली महिला महानिदेशक (DG) बनीं। एक ऐसी महिला पुलिस अधिकारी, जिनके संघर्ष के बारे में जानकर अच्छा लगेगा, बल्कि प्रेरणा भी मिलेगी। पुलिस में नौकरी कैसे की जाती है? अपराधियों के मन में कानून का खौफ कैसे पैदा किया जाता है? पब्लिक का विश्वास कैसे जीता जा सकता है? सीमित संसाधनों के बीच एक महिला SP कैसे किडनैपर्स पर नकेल कसती है? यह सब शोभा अहोटकर को DG बनाने का नोटिफिकेशन आते ही उस रिकॉर्ड में जुड़ गया। भास्कर ने शोभा अहोटकर से उनकी उपलब्धियों और संघर्ष पर लंबी बातचीत की है। उसे पढ़ने से पहले थोड़ा उनके बारे में जान लें-

मन से बिहारी हैं मराठी अहोटकर

भारतीय पुलिस सेवा (IPS) 1990 बैच की सीनियर अधिकारी अहोटकर जन्म से मराठी, शिक्षा से हैदराबादी और मन से बिहारी हैं। पिता बलराम अहोटकर हैदराबाद में एक्साइज कमिश्नर थे। इस कारण प्राइमरी से लेकर हायर एजुकेशन तक की इनकी पूरी पढ़ाई वहीं हुई। सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद से साल 1989 में पॉलिटिकल साइंस से MA किया। फिर पहले अटेम्प्ट में ही UPSC की परीक्षा पास की। इनके पिता का भी सपना था कि उनकी बेटी हर हाल में पुलिस सर्विस को ज्वाइन करे, चाहे कैडर कोई भी मिले। शोभा अहोटकर ने भी अपने पिता से किए वायदे को पूरा कर दिखाया। भारतीय पुलिस सेवा में आने के बाद इन्हें बिहार कैडर मिला।

बात तब कि है, जब बिहार और झारखंड एक था। अपराध का ग्राफ काफी ऊपर था। हत्या, लूट, डकैती, अपहरण और रंगदारी जैसी आपराधिक वारदातें चरम पर थीं। उस वक्त टेक्निकल सर्विलांस का दौर नहीं था। ह्यूमन इंटेलिजेंस के जरिए ही पुलिस काम करती थी। इस कारण शोभा अहोटकर जिस जिले में SP बनकर जाती थीं, वहां पब्लिक का विश्वास जीतने में कामयाब हो जातीं। फील्ड में इनकी सबसे पहली पोस्टिंग पटना सिटी में बतौर ASP हुई थी। क्राइम कंट्रोल करने के लिए अपराधियों में खौफ पैदा करना इनकी प्रायोरिटी थी। इस कारण शोभा अहोटकर का बिहार में दूसरा नाम 'हंटरवाली' पड़ा। अपराधी भी इन्हें यही कहते हैं। बीच में 7 साल महाराष्ट्र में काम करने के बाद 5 साल के लिए सेंट्रल डेप्यूटेशन पर रहीं। उस दरम्यान एयर इंडिया में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सिक्योरिटी के पोस्ट पर थीं। अपने कैडर में वापस लौटने के बाद बिहार सरकार ने दिसंबर 2020 में शोभा अहोटकर का प्रमोशन कर DG बनाया। वर्तमान में वो होमगार्ड व फायर सर्विसेज में नंबर 1 की कमान संभाल रही हैं। अब पढ़िए शोभा अहोटकर से भास्कर की बातचीत:

सवाल: बिहार की पहली महिला DG बन कैसा लगा?
जवाब: बहुत खुशी मिली, सरकार ने चांस दिया। DG हाइएस्ट लेवल है। पहली महिला DG होकर अच्छा तो लगा ही।

सवाल: अब तक का कैरियर कैसा रहा?
जवाब: हर जन्म में पुलिस ऑफिसर ही बनना चाहूंगी। एक महिला वर्दी में रहकर सोसायटी के लिए काफी कुछ कर सकती है। मैं दरभंगा, हजारीबाग, छपरा, वैशाली, देवघर सहित 6 जिलों में SP रह चुकी हूं। ड्यूटी के दौरान महिलाओं में आत्मविश्वास जगाने की कोशिश की। SP से मिलने में दिक्कत न हो, इसलिए मन से डर निकालना जरूरी होता था। जितनी अधिक महिलाएं पुलिस में आएंगी, महिलाओं को सुरक्षा देंगी। महाराष्ट्र में डेप्यूटेशन के दौरान एक कमिटी में थी तो महिला सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन बनाया था। ह्यूमन ट्रैफिकिंग की नोडल ऑफिसर भी रही।

सवाल: कभी आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला?
जवाब: नहीं, ऐसा कभी नहीं हुआ।

सवाल: कभी डिमोशन हुआ?
जवाब: नहीं, बिल्कुल नहीं।

सवाल: कैसे अवरोध खड़े हुए, मुकाबला कैसे किया?
जवाब: 18 घंटा काम करती हूं। इसलिए सहकर्मियों से भी उम्मीद होती है कि वे अच्छे से काम करें। कामकाज के दौरान ऑफिस में टाइम पास न हो, वर्क कल्चर क्रिएट करना चाहिए। पुलिस को पब्लिक के साथ डायरेक्ट लिंक बनाना चाहिए। किसी भी SP को जिले में तभी सफलता मिलेगी, जब पब्लिक से सीधे जुड़ेंगे। तब उन्हें इलाके की क्राइम की सूचना मिलेगी। पब्लिक का विश्वास जीतना जरूरी है। मैं जहां भी रही, वहां पब्लिक का पूरा साथ मिला।

सवाल: व्यवस्था बदलने के लिए क्या कदम उठाए?
जवाब: SP की इमेज अच्छी होनी चाहिए, वह मैंने अपने लिए जरूर किया। काम का माहौल बनाया। क्राइम कंट्रोल करना होगा। लॉ एंड ऑर्डर संभालना होगा। महिला, बच्चे और बुजुर्गों की सुरक्षा करनी होगी। अपनी ड्यूटी के दौरान मैंने ऐसा करने की पूरी कोशिश की।

सवाल: बिहार में कैसे चैलेंज मिले?
जवाब: जिस जिले में गई, वहां काम करने का पूरा स्कोप था। जब मेरा ट्रांसफर वैशाली किया गया, उस वक्त वहां क्राइम बहुत ज्यादा था। सबसे पहले बाइक पर ट्रिपल राइडिंग बंद कराई। इस कारण 50 प्रतिशत क्राइम घट गया। क्रिमिनल के मन में खौफ रखा। पुलिस का डर मन में बैठाया। वैशाली के राघोपुर में बहुत घटनाएं होती थीं। 16-17 अपराधियों का एक गैंग एक्टिव था। दियारा इलाका था। पुलिस के पास इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत कम था। लाठी के बल पर पुलिसिंग कर लेते थे। उस वक्त क्रिमिनल में पुलिस का डर और पब्लिक में पुलिस के प्रति विश्वास बनाना मेरा मूल मंत्र होता था। इस मंत्र के सहारे कई बड़े केस को सुलझाया गया। उस पीरियड में हजारीबाग भी एक डिस्टर्ब एरिया था। साल 2000 में मेरा ट्रांसफर वहां हुआ था। कुल 40 कोयला माफिया को पकड़ा, उन्हें जेल भेजा। अपने आप में यह एक रिकॉर्ड है, जिसे उस वक्त गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था।

सवाल: बतौर SP सबसे टफ जिला?
जवाब: सबसे टफ जिला दरभंगा रहा। साल 1998 में मेरी पोस्टिंग वहां हुई थी। उस वक्त वहां किडनैपिंग की वारदात बहुत हुआ करती थी। इनवैस्टिगेशन के जरिए केस की जांच को अंत तक पहुंचाती गई तो ऐसी वारदातों पर काबू पा लिया। मेरा मानना है कि एक IPS को सभी तरह का अनुभव होना चाहिए। CID, स्पेशल ब्रांच और 15 साल के फील्ड का अनुभव जरूर होना चाहिए।

सवाल: सबसे चैलेंजिग केस?
जवाब: जब डेप्यूटेशन पर थी तो महाराष्ट्र के अहमद नगर में एक बड़ा सेक्स स्कैंडल केस हुआ था। दो माइनर लड़कियों के साथ रेप हुआ था। मामला साल 2006 का है। उस वक्त आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में SP थी। इस केस में काफी बड़े और पावरफुल 26 लोगों को गिरफ्तार किया था। इस केस में 90 दिन के अंदर सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई थी।

सवाल: हंटरवाली नाम क्यों पड़ा?
जवाब: 22 साल की उम्र में ही पुलिस की नौकरी में आ गई थी। जब मेरी पोस्टिंग देवघर में हुई तो उस टाइम वहां महिलाओं का रेप होता था। वह भी उनका, जो मंदिर में दर्शन करने जाती थीं। इस मामले में जो भी अपराधी पकड़े जाते थे उनकी जमकर पिटाई के कारण लोगों ने नाम दे दिया।

सवाल: बिहार कैडर मिलने पर कैसा लगा?

जवाब: बिहार के नाम पर मां घबराई थी, लेकिन मुझे कोई दिक्कत नहीं थी। पिता ने कह दिया था जो भी कैडर मिलेगा, वहां जाना होगा। पुलिस ही ज्वाइन करना है, यह तय था। सिलेक्शन होने के बाद ट्रेनिंग के दौरान बहुत कुछ सिखाया गया। बिहार में बहुत अच्छे ट्रेनर्स मिले। IPS एके मल्लिक सर ने काफी कुछ सिखाया था। IPS डॉक्टर अजय कुमार ने टफ ट्रेनिंग दी थी। पटना सिटी की पहली महिला ASP थी। उस वक्त मेरी पोस्टिंग पर सवाल उठा था तो उस वक्त के DGP वीपी जैन सर ने मुझ पर भरोसा जताया था। यह बात 1992-93 के दरम्यान की है। कैरियर की शुरुआत पटना सिटी से हुई थी, वही काफी चैलेंजिग था।

सवाल: ड्यूटी-परिवार कैसे मैनेज करती हैं?
जवाब: हर लेडी अफसर को मैनेज करना पड़ता है। कैरियर ज्यादा मायने रखता है। 15 साल फील्ड में रह गए। लेडी ऑफिसर को डबल एफर्ट लगाना पड़ता है। कैरियर और परिवार दोनों देखना पड़ता है।

सवाल: रिटायरमेंट के बाद का प्लान?
जवाब: इसके बाद भी काम करूंगी। बैठी नहीं रहूंगी, प्राइवेट सेक्टर में काम करूंगी। सोशल सर्विस करूंगी। सामाजिक तौर पर महिलाओं को आगे बढ़ाने को लेकर काम करने की इच्छा है, जिसे पूरा करूंगी।

सवाल: युवतियों के लिए खास संदेश?
जवाब: पुलिस सर्विसेज महिलाओं के लिए बहुत अच्छा है। वर्दी आत्मविश्वास देती है। पुलिस सर्विस के जरिए महिलाएं काफी कुछ कर सकती हैं, जितना बेस्ट हो कर सकती हैं। पुलिस की नौकरी में जितनी अधिक संख्या में महिलाएं आएंगी, समाज के लिए उतना अच्छा होगा।

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