• Hindi News
  • Local
  • Bihar
  • Women Not Safe In Bihar Hospitals During Covid Pandemic; Bihar Women Safety News

बिहार के हॉस्पिटल में सेफ नहीं महिलाएं:इलाज कराने आई महिलाओं से कभी डॉक्टर तो कभी नाइट इंचार्ज करता है छेड़खानी, केस दर्ज कर कोरम पूरा करती है सुशासन बाबू की पुलिस

पटना5 महीने पहलेलेखक: अमित जायसवाल
  • कॉपी लिंक

सरकार के तमाम दावों के बीच बिहार के हॉस्पिटलों में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। हाल के दिनों में हुई घटनाओं ने समाज को झकझोर दिया है। दैनिक भास्कर आपको तीन केस का जिक्र कर रहा है। जिससे यह पता चल जाएगा कि महिलाओं के लिए बिहार कितना सुरक्षित है?

केस 1, स्थान- पारस हॉस्पिटल, पटना

17 मई को एक सनसनीखेज मामला सामने आया था। ICU के अंदर बनाए गए वीडियो के जरिए एक बेटी ने अपनी कोरोना पीड़ित मां के साथ रेप की कोशिश करने का आरोप लगाया था। यह गंभीर आरोप पटना के बडे़ प्राइवेट हॉस्पिटल पारस के 3 स्टाफ के ऊपर लगाए गए थे। वीडियो वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया था। जांच करने के लिए शास्त्रीनगर थाना की पुलिस भी पहुंच गई थी। हालांकि दो दिन बाद पीड़ित महिला की मौत हो गई। इसके बाद बेटी के बयान पर थाना में छेड़खानी और अभद्रता का केस भी दर्ज किया गया। इस मामले में भी अभी जांच चल रही है।

मीडिया के सामने बेटी ने कहा था- मां ठीक हो जाएं, तो खुद बात करेंगी। लेकिन उससे पहले ही उसकी मां की मौत हो गई।
मीडिया के सामने बेटी ने कहा था- मां ठीक हो जाएं, तो खुद बात करेंगी। लेकिन उससे पहले ही उसकी मां की मौत हो गई।

कोरोना पीड़िता की मौत, सच से कब उठेगा पर्दा

केस 2, स्थान- भागलपुर और पटना

नोएडा की रहने वाली महिला अपने पति के साथ इसी साल होली में घर आए थी। पति कोरोना की दूसरी लहर के शिकार हो गए थे। महिला ने इलाज के लिए पति को पहले भागलपुर के ग्लोकल हॉस्पिटल में एडमिट कराया था। फिर बाद में पटना के राजेश्वर हॉस्पिटल में एडमिट कराया। इन दोनों ही हॉस्पिटल में महिला के साथ बदसलूकी की गई। राजेश्वर अस्पताल के एक डॉक्टर पर आरोप लगाया है कि वह गंदे-गंदे इशारे करता था... चलता था तो शरीर से सटते हुए गुजरता था।

पति भर्ती थे, नहीं तो डॉक्टर को चप्पल से मारती

ग्लोकल में स्टाफ ने बदमाशी की थी तो राजेश्वर हॉस्पिटल में ICU के नाइट शिफ्ट इंचार्ज पर छेड़खानी करने का गंभीर आरोप लगा। पति की मौत के बाद पीड़ित महिला का गुस्सा फुट पड़ा। फिर उसने अपने साथ हुए हर एक घटना को उजागर किया। इसके बाद हड़कंप मच गया था। इस मामले में पटना के पत्रकार नगर थाना में FIR हो चुकी है। पूरे केस की जांच चल रही है।

केस 3, स्थान- मगध मेडिकल कॉलेज

घटना 12 अप्रैल 2020 की है। कोरोना की पहली लहर में गया स्थित मगध मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में एडमिट एक महिला मरीज के साथ रेप की घटना हुई थी। कोरोना पीड़ित महिला के कपड़े खून से सने मिले थे। इस जघन्य कांड को उसी हॉस्पिटल के स्टाफ ने अंजाम दिया था। परिवार वालों के आवाज उठाने के बाद उस वक्त ये मामला सामने आया था। मीडिया में खबर आने के बाद पुलिस एक्टिव हुई। मामले की जांच कर FIR दर्ज की गई थी।्र

महिला आयोग पहुंचा मामला

बिहार में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पटना हाईकोर्ट की एडवोकेट शमा सिन्हा राष्ट्रीय महिला आयोग पहुंच गई है। उन्होंने कई केस का जिक्र करते हुए महिलाओं की सेफ्टी को लेकर बड़े कदम उठाने की मांग की है। भागलपुर और पटना के राजेश्वर हॉस्पिटल में पति के इलाज के दौरान एक महिला के साथ जो कुछ हुआ, उस घटना के को आधार बनाते हुए एक ईमेल के जरिए एक लेटर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष को महिला एडवोकेट ने 15 मई को ही भेजा है। जिस पर आयोग ने संज्ञान भी लिया है। जांच कर कार्रवाई करने की बात कही है।

कई केस ताे दर्ज भी नहीं हो पाते

शमा सिन्हा का कहना है कि बिहार में महिलाओं के साथ होने वाली अभद्रता और छेड़खानी के सिर्फ इतने ही मामले नहीं हैं। कई मामलों में तो पुलिस स्टेशन तक शिकायत पहुंच ही नहीं पाती है। सिर्फ शहरों में ही नहीं, ग्रामीण इलाकों में भी इस तरह की घटनाएं होती हैं। लेकिन, पीड़ित महिलाएं शिकायत भी नहीं कर पाती हैं।

2020 में नवंबर महीने तक महिला उत्पीड़न के 12304 मामले रजिस्टर्ड

राज्य में महिला उत्पीड़न के मामले कम नहीं हैं। हालांकि केस के तौर पर उन मामलों की रिपोर्टिंग बहुत कम होती है। CID के विकर सेक्शन का जो आंकड़ा है उसके अनुसार, 02020 के नवंबर महीने तक कुल 12 हजार 304 केस महिला उत्पीड़न के दर्ज हुए। इसमें रेप के 1330, किडनैपिंग के 6107, मॉलेस्टेशन के 827, दहेज-हत्या के 970, दहेज प्रताड़ना के 2389 और महिलाओं के साथ हुए अत्याचार के 1651 रजिस्टर्ड केस शामिल हैं।

खबरें और भी हैं...