भैया-दूज:भाइयों की लंबी आयु के लिए बहनों ने गोधन को कूटकर खिलाई बजरी

अकबरपुरएक महीने पहले
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  • सुबह में कांटा चुभाकर भाइयों के दीर्घायु होने की भगवान से कामना की

अकबरपुर प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में शनिवार की सुबह से ही विधि विधान के साथ बहनों ने अपनी भाई की लंबी उम्र के लिए गोधन कूटकर भैया दूज मनाया। वैसे तो हिन्दू संस्कृति में ऐसे तो सभी पर्व और त्योहार मनाने की अलग-अलग परंपरा है, लेकिन बिहार और झारखंड में भैयादूज के दिन भाइयों की मंगलकामना के लिए गोधन कूटने की अनोखी परंपरा है। कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाए जाने वाले पर्व भैयादूज का दिन इन क्षेत्रों में ‘गोधन’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन बहन अपने भाइयों को ‘शाप’ (श्राप) देकर उनकी मंगलकामना करती हैं।

मान्यता है कि इस शाप से भाइयों को मृत्यु का डर नहीं होता। बिहार और झारखंड में गोधन के मौके पर बहन द्वारा भाइयों को जी भर कर कोसा जाता है और गालियां दी जाती है, यहां तक की भाइयों की मृत्यु हो जाने का भी शाप दिया जाता है। इस क्रम में ‘रेंगनी’ (एक प्रकार का पौधा) के कांटों को बहनें अपनी जीभ में चुभाती हैं।

इस क्रिया को ‘शापना’ कहा जाता है। इस पर्व में कई महिलाएं एक ही स्थान पर एकत्रित होकर गोधन कूटती हैं। गोधन पर्व करने वाली सभी उम्र की महिलाएं होती हैं। इस दिन मोहल्ले में एक घर के बाहर महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से गोबर से चौकोर आकृति बनाई जाती है, जिसमें यम और यमी की गोबर की ही प्रतिमा बनाई जाती है। इसके अलावा सांप, बिच्छु आदि की आकृतियां भी बनाई जाती हैं।
निभाई गई सदियों पुरानी परंपरा
प्रारंभ में वहां एकत्र हुई मोहल्ले की महिलाएं इसकी पूजा करती हैं और फिर इन्हें डंडे से कूटा जाता है। बहनें इस कूटे हुए चना को वहां से निकाल लेती हैं और अपने-अपने भाइयों को तिलक लगाकर इसे खिलाती हैं। इस दिन भाइयों द्वारा बहन को उपहार देने की भी परंपरा है। महिलाओं का कहना है कि यह परंपरा काफी पुरानी है, जिसे परंपरानुसार पूरी आस्था के साथ मनाया जाता है।

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