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विवश:झुग्गी-झोपड़ी मलिन बस्तियों में रहने वाले बच्चों की जिंदगी भगवान भरोसे

अमनौर6 दिन पहले
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  • माता-पिता एक वक्त के भोजन की तलाश में गए होते

प्रखण्ड के कई ऐसे गांव है, जहां लोग आज भी झुग्गी-झोपड़ी में रहने को विवश है। इस गांव के बच्चों में न तन पर कपड़ा है न ही शुद्ध भोजन पानी इन्हें मिलता है। वायरल बुखार से इनका जीवन भगवान भरोसे है। बात हम अपहर पंचायत के विशुनपुरा मुशहर टोली, धर्मपुर जाफर पंचायत के हाता ,अमनौर हरनारायण के डोम टोली,धोबाही के नट बस्ती की बात कर रहे है। शिक्षा स्वास्थ्य कोसों दूर नहीं दिखाई पड़ती है।

बच्चे बिन कपड़ा के खेलते नजर आएंगे। माता-पिता एक वक्त के भोजन की तलाश में गए होते है। सभी कुपोषण के शिकार तथा मिट्टी में लिपटे दिखते है। कोरोना की तीसरी लहर हो या कॉमन कोल्ड फीवर कैसे बचेगी? इनकी जिंदगी,आज भी कई बच्चे इन बस्ती में बुखार से पीड़ित है। ग्रामीण चिकित्सक के भरोसे चल रहे है। बस्ती के हिरामन मुसहर,बबन मुसहर,सतन मुसहर, बच्चन मुसहर सोना देवी वार्ड सदस्य ने बताया कि गांव में कई बच्चे बीमार है कोई कुपोषण के शिकार है तो कोई पेट की बीमारी से ग्रसित कोई बुखार से पीड़ित है। इन बस्ती में नहीं कोई अधिकारी आते है नहीं कोई स्वस्थ्य कर्मी, चुनाव में वोट लेने नेता जी जरूर आते है। इनका जीवन अपने हालात पर ही निर्भर रहता है। इन बस्ती के बच्चों का सही ढंग स्वास्थ्य परीक्षण नहीं किया गया तो आने वाले महामारी के दौर में बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

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