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हाहाकार:अज्ञात बीमारी से 5 दिन में 13 गाय-भैंसों की मौत, हांफने के बाद सांस लेने में होती है दिक्कत, पशुपालकों में मचा हाहाकार

आरा/उदवंतनगरएक महीने पहले
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भोजपुर जिले के मिल्की गांव में पांच दिन के अंदर अज्ञात बीमारी से 13 मवेशियों की मौत हो गई है। अचानक एक-एक कर इन मवेशियों के मरने से पशुपालकों में हाहाकार मच गया है। मरने वाले वाले पशुओं में 12 भैंस व 1 गाय है। मवेशियों को कौन सी बीमारी है, यह अभी पता नहीं चल सका है। आश्चर्य की बात यह कि पशुपालन विभाग को इस घटना का पता नहीं था। दैनिक भास्कर की टीम के मुआयना करने के बाद पशुपालन विभाग सक्रिय हुआ है। मिल्की गांव उदवंतनगर प्रखंड की बकरी पंचायत में है।

इस गांव के पशुपालकों के अनुसार मवेशियों को कौन सी बीमारी है, हमें नहीं मालूम। इस बीमारी में पीड़ित मवेशियों का गर्दन फूल जाता है। मवेशी हांफने लगते हैं उसके बाद सुस्त पड़ जाते हैं। बाद में उनको सांस लेने में दिक्कत आती है। हमलोग अपनी समझ से दवा देते हैं। इसके बाद भी लक्षण आने एक से दो दिन में मवेशी की मौत हो जाती है। गांव में अब तक गाय व भैसों की कीमत लगभग 5 लाख रुपए का नुकसान हो चुका है। साथ ही साथ हमलोग अपने स्तर से जो बचाव कर रहे हैं, वह विफल साबित हो रहा है।

गांव के अन्य मवेशियों को भी मरने का खतरा हो गया है। अभी भी इस गांव में तीन मवेशी बीमार है। इस जानलेवा बिमारी पर रोक नहीं लगाने पर अन्य इलाके में भी फैलने की आशंका हो गई है। ग्रामीणों ने आगे बताया कि पहली घटना 25 जून गुरुवार को हुई थी। इसकी जानकारी देते हुए मिल्की गांव के वार्ड संख्या- 10 के सदस्य राजू ने बताया कि इस बात की जानकारी बकरी पंचायत के कृषि सलाहकार संजू कुमारी को दिया था।
गांव में ही दफनाया गया पशुओं का शव
इस संबंध में ग्रामीणों ने बताया कि पशुओं को बधार में दफनाया गया है। इसके अलावा हमारे पास कोई उपाय नहीं था। लेकिन अभी तक पशुपालन विभाग से संबंधित मेडिकल टीम गांव में देखने तक नहीं आई है।
इन पशुपालकों के पशुओं की हुई है मौत
लालधारी: 1 भैंस,  लालमोहर: 2 भैंंस, महेश: 2 भैंस, गोविंद चौकीदार: 2 भैंस, रमेश: 1 भैंस, नमी: 1 भैंस, योगेन्द्र सिंह: 1 भैंस, गणेशी यादव: 2 व विनय सिंह: 1 गाय
जिला पशुपालन पदाधिकारी बोले; नहीं है हमको जानकारी
जिला पशुपालन पदाधिकारी सिद्धनाथ राय ने बताया कि इस घटना से संबंधित कोई भी जानकारी मुझे नहीं थी। अब दैनिक भास्कर से मिला है। मैं तुरंत संबंधित प्रखंड पशुपालन को सूचना दे रहा हूं। वह मिल्की गांव जाकर वहां की स्थिति को देखेंगे।
रोग के बाद समुचित नहीं हुआ इलाज
बताया जाता है कि पशुओं की जब तबियत बिगड़ी तो ग्रामीणों ने अंधविश्वास का सहारा लिया। गांव के समीप मवेशियों को इकट्ठा कर टोटका भी किया था, ताकि वे स्वस्थ रहें। लालमोहर ने बताया कि दस वर्ष पहले भी ऐसी घटना हुई थी। जिसमें 20 पशुओं की मौत हुई थी। उस समय भी हमने पूजा किया था। 
दूध लेने से परहेज कर रहे लोग
इस बीमारी के असर से कई लोग इस गांव से दूध लेने से परहेज करने लगे हैं। गांव में कुछ ग्रामीणों ने बताया कि हमलोग दूसरे गांव से अपने उपयोग के लिए दूध मंगा रहे हैं।

दहशत में है पशुपालक
पशुओं के मरने के बाद आसपास के कई गांवों के भी पशुपालकों में दहशत व्याप्त हो गया है। पशुपालक अपने स्तर से अपने-अपने मवेशियों को बचाने के लिए प्रयासरत है। लेकिन पशुपालन विभाग के उदासीन रवैये से आक्रोशित पशुपालक हो गए हैं।

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