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काला कारोबार:रोक के बावजूद बालू का अवैध खनन जारी तस्करों का गठजोड़ प्रशासन पर पड़ रहा भारी

आरा/कोईलवरएक महीने पहले
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  • सोन नद के इलाके में खनन विभाग और पुलिस की छापेमारी के बाद भी नहीं रुक रहा खनन
  • सरकार और ग्रीन ट्रिब्यूनल ने बालू के उत्खनन पर लगा रखा है रोक, पर नहीं मान रहे तस्कर

सरकार का प्रतिबंध। ग्रीन ट्रिब्यूनल का निर्देश।  पुलिस का पहरा। खनन विभाग और प्रशासन की छापेमारी। इसके बावजूद सोन नदी में दिन-रात अवैध बालू का खनन हो रहा है। बालू तस्करों और सफेदपोशों के संरक्षण में भोजपुर, सारण, पटना और वैशाली जिले से प्रतिदिन सैकड़ों नावें सोन नदी में पहुंचती हैं।...और सैकड़ों मजदूर खुलेआम अवैध बालू का खनन करते हैं। जबकि, सरकार ने 1 जुलाई से ही 30 सितंबर तक नदियों में बालू खनन पर रोक लगा दिया है।

इसके बावजूद सोन के जलस्तर वृद्धि के साथ ही खुला खेल फर्रुखाबादी की तर्ज पर अवैध बालू खनन किया जा रहा है। इससे बिहार सरकार को भारी राजस्व का घाटा उठाना पड़ रहा है। साथ ही गैंगवार की घटनाओं के कारण विधि व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। इधर, कोईलवर से बिंदगांवा तक आठ किलोमीटर के नदी के क्षेत्र में तस्कर नावों से बालू का अवैध उत्खनन कर रहे हैं। ये सुबह होने से पहले ही नावों को सोन नद के रास्ते गंगा नदी होते हुये अवैध बालू को बलिया (यूपी) सारण, वैशाली, पटना के घाटों पर पहुंचा रहे हैं।

जवान तैनात, पर नहीं लग रही लगाम
हालांकि सूर्योदय होते ही खनन विभाग द्वारा तैनात सैप जवान हाथों में डंडे लिए नये निर्माणाधीन पुल के समीप पहुंचकर अवैध खनन में जुटी नावों व मजदूरों को खदेड़ने का प्रयास करते हैं। इस दौरान कम संख्या होने पर नाविक और मजदूर सैप जवानों के डर से पुल के पास नहीं आते हैं। लेकिन अधिक संख्या होने पर कभी-कभार बात नही मानते हैं। इसके अतिरिक्त आधा किलोमीटर के क्षेत्र में सुरौंधा टापू, नार्थ क्लब घाट, हरिपुर घाट के सामने अवैध उत्खनन शुरू कर देते हैं। 
दिन के उजाले में भी जारी रहता है बालू का गोरखधंध

अवैध बालू खनन सिर्फ दिन में ही नहीं हो रहा। जब शाम ढलते ही सैप जवान वापस लौट जाते हैं, तब अवैध बालू खनन शुरू हो जाता है।  अब्दुलबारी रेल सह सड़क पुल व निर्माणाधीन सिक्सलेन पुल के बीच पूरी रात बालू का अवैध उत्खनन में लग जाते हैं। इधर, स्थानीय लोग इसमें सैप जवान की संलिप्तता की बात भी कहते हैं। ग्रामीणों के अनुसार सैप जवान नावों से अवैध वसूली करते हैं। जिसका पहले वीडियो भी वायरल हो चुका है। लेकिन, अवैध उत्खनन करने वाले नावों से सैप जवान की वसूली बंद नहीं हुई है।
1 जुलाई से 30 सितम्बर तक नदियों से बालू उत्खनन पर है रोक
जिला प्रशासन द्वारा 1 जुलाई से 30 सितंबर तीन महीनों के लिए नदियों से बालू उत्खनन पर रोक है। इसके बावजूद बालू तस्करों के ऊपर इस फरमान का कोई असर नहीं है। जबकि इन तीन महीनों में बालू कम्पनी का स्टॉक से बालू बेचने की अनुमति मिली है। मालूम हो पर्यावरण व जलीय जीव जंतु को बचाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने बालू उत्खनन पर रोक लगा रखा है।

ट्रिव्यूनल का मानना है कि नदी में बाढ़ का पानी आने के साथ मछलियां या अन्य जलीय जीव अंडे, बच्चे देते हैं। जिनका संरक्षण जरूरी है। लेकिन सोन नद में एक साथ तस्कर के सैकड़ों नावों के चलने जलीय जीव के सामने भी संकट आ गया है। जिस कारण सोन नद का प्रसिद्ध सोनबचवा मछली, चेलहिया, बोआरी, झींगा मछली विलुप्त होने के कगार पर हैं।

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