उदासीनता:22 साल से बिहार होमगार्ड में बहाली बंद आधा जवान रिटायर्ड, नई नियुक्ति भी नहीं

आराएक महीने पहलेलेखक: दीपक शास्त्री
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लगातार होमगार्ड जवान हो रहे रिटायर्ड, नहीं हो रही नई बहाली - Dainik Bhaskar
लगातार होमगार्ड जवान हो रहे रिटायर्ड, नहीं हो रही नई बहाली
  • अपराध नियंत्रण पर बुरा असर पड़ रहा है, पर जिम्मेदार नहीं दिखा रहे हैं दिलचस्पी

22 वर्ष से बिहार होमगार्ड में बहाली बंद है। वर्ष 1989 में अंतिम बार बहाली हुई थी। वर्ष 1990 में 1500 होमगार्ड जवान थे। हर साल करीब 40 जवान रिटायर होते हैं। बीते 22 वर्ष में करीब आधे जवान रिटायर हो चुके। वर्तमान में 800 होमगार्ड कार्यरत है। इनमें भी कई जवान कुछ वक्त बाद रिटायर होंगे। कुछ की तबीयत खराब हो जाती है। लेकिन, नई बहाली नहीं हो रही। यह हाल है उस भोजपुर जिले में, जहां अपराध के आंकड़े अधिक होते हैं। शराब, अवैध खनन, बालू तस्करी में सफेदपोश-अधिकारी व बालू माफिया का अंतर्राज्जीय सिंडिकेट है। अपराध व विधि-व्यवस्था में बिहार होमगार्ड की महत्ती भूमिका होती है।

इसके बावजूद 22 वर्ष से होमगार्ड की बहाली बंद होेने से अपराध नियंत्रण पर बुरा असर पड़ रहा है। भोजपुर जिले में होमगार्ड की बहाली नहीं होने से कार्यरत जवानों की संख्या लगातार कम हो रही है। जिले में 1990 के बाद एक भी होमगार्ड जवान की बहाली नहीं हुई है। जिससे होमगार्ड्स की ड्यूटी में करने में काफी परेशानी होती है। कम संख्या होने की वजह से होमगार्ड को दुगुनी ड्यूटी करनी पड़ती है। इससे विभाग और होमगार्ड के जवानों को काफी परेशानी हो रही है।

होमगार्ड जवान को विभिन्न सेक्टरों में ड्यूटी करनी पड़ती है। जिसमें वाहन चेकिंग, अग्निशमन दल, थाना, सरकारी आवास, सरकारी कार्यालय, गार्ड, वीआईपी अधिकारियों का स्कॉट, स्वास्थ्य केंद्र, चुनाव, आपदा, कैदी लाने और पकड़ने व अन्य स्थानों पर ड्यूटी लगाई जाती है।

दिसंबर को भोजपुर जिले में 72 होमगार्ड जवान होंगे सेवानिवृत्त
विभागीय जानकारी के अनुसार भोजपुर जिले में हर साल दिसंबर माह में करीब 40 से अधिक होमगार्ड जवान रिटायर होते हैं। इस साल करीब 72 जवान रिटायर हो सकते हैं। जिसके वजह से होमगार्ड विभाग में रिक्तियां धीरे-धीरे काफी बढ़ने लगी है। हालांकि, होमगार्ड विभाग में नए सिरे से बहाली करने की योजना प्रक्रियारत बताई जाती है।

वर्ष 1990 में एक प्रखंड में 70-70 जवान कार्यरत थे
वर्ष 1990 में एक प्रखंड में होमगार्ड के जवान करीब 70-70 कार्यरत रहते थे। धीरे-धीरे समय बीतता गया। अब संख्या सिमटकर 20-30 के बीच हो गया है। अभी जिले में उपलब्ध होमगार्ड कार्यबल के अनुपात में इनकी प्रतिनियुक्ति प्रखंडों में की गई है। उपलब्ध कार्यबल में उदवंतनगर, अगिआंव, कोईलवर और बड़हरा प्रखंडों में अभी सबसे अधिक होमगार्ड के जवान नियुक्त हैं। सबसे सबसे कम संख्या चरपोखरी, शाहपुर, बिहिया और जगदीशपुर प्रखंडों में है।

कई स्थानों पर होती है तैनाती
होमगार्ड में कई स्तर पर जवान और अधिकारी पदस्थापित होते हैं। जिसमें वालंटियर, सिपाही, सेक्शन लीडर, प्लाटून कमांडर, पेड स्टाफ, सिपाही, हवलदार, कंपनी कमांडर, इंस्पेक्टर और डीएसपी रैंक होता है। बहाली के समय एक ही पोस्ट पर सभी होते हैं। ट्रेनिंग के बाद अनुभव पर इनको अलग-अलग पोस्ट दिया जाता है। होमगार्ड जिला संघ के अनुसार वर्ष 2005 और वर्ष 2009 में सरकार ने विज्ञापन के माध्यम से वैकेंसी निकाली थी। करीब 22 हजार आवेदक थे। लेकिन, कतिपय कारण से होमगार्ड विभाग में बहाली नहीं हो सकी।

डीएसपी बोले- हाईकोर्ट का आदेश छह माह के अंदर होगी बहाली,
गृहरक्षा वाहिनी संघ का दर्द सरकार समस्याओं का नहीं करती निदान
गृह रक्षा वाहिनी जिला संघ के अनुसार बहाली और कार्यरत जवानों की समस्याओं के बारे में कई बार सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखा गया। लेकिन किसी भी तरह की सुनवाई नहीं हुई। संघ के जिला अध्यक्ष नंद कुमार सिंह ने बताया कि पहले जितने भी होमगार्ड के जवान रिटायर हुए उनको भी अब तक पीएफ वा रिटायरमेंट का पैसा नहीं मिला है। इसको लेकर कई बार आंदोलन भी किया गया। लेकिन, सरकार की तरफ से हर बार तारीख पर तारीख का एेलान किया जाता है, पर दिया नहीं जाता। हाेमगार्ड जवानों का वेतन भी कम है और ड्यूटी ज्यादा लिया जाता है। हम लोग सरकार से यही मांग करते हैं कि जिस अनुसार ड्यूटी करते हैं, उस अनुसार वेतन दिया जाए।​​​​​​​

फरवरी से बहाली शुरू होने की उम्मीद : होमगार्ड डीएसपी

  • जिले में होमगार्ड जवान की संख्या काफी कम है। वर्ष 2009 में बहाली होने वाली थी। किसी कारणवश नहीं हो पाई है। संगठन हाईकोर्ट में गए थे। हाईकोर्ट से बहाली का प्राप्त हो गया है। इसको लेकर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के साथ बैठक कर रोस्टर तैयार करना है। छह माह के अंदर होमगार्ड जवान की बहाली होगी। उम्मीद है कि फरवरी तक यह काम शुरू हो जाएगा। - अनिल कुमार सिंह, डीएसपी, होमगार्ड विभाग, भोजपुर
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