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विरोध:आईएमए व भाषा के आह्वान पर रामदेव के खिलाफ सरकारी और निजी डॉक्टरों ने अोपीडी सेवा ठप रखी

आराएक महीने पहले
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  • कोरोना संकट के दौरान बाबा रामदेव की ओर से डॉक्टरों के खिलाफ दिए गए बयान पर आक्रोशित दिखे चिकित्सक

आईएमए व भाषा के आह्वान पर पुरे भोजपुर जिले में बाबा रामदेव के खिलाफ आक्रोशित डॉक्टर शुक्रवार को चार घंटे तक हड़ताल पर रहे। जिले में इमरजेंसी सेवा छोड़ सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों की ओपीडी पूरी तरह से सुबह 08:30 से 12:30 तक ठप रखी गई। चार घंटे के इस सांकेतिक विरोध के कारण मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी।

आंदोलन का प्रभाव ग्रामीण इलाकों में कम और शहरी इलाकों में ज्यादा देखा गया। सदर अस्पताल में सुबह 08 बजे से दोपहर 12 बजे तक ओपीडी चलता है। हड़ताल होने से मरीज डॉक्टरों का इंतजार करते अस्पताल परिसर में नजर आए। बता दे कि सदर अस्पताल का ओपीडी अभी पीपीओटी में कार्यरत है। सबसे बड़ी बात यह थी कि इमरजेंसी सेवा बंद नहीं होने के कारण मरीज वहां जाकर अपना इलाज करा रहे थे।

सुबह में आईएमए भवन के समक्ष डॉक्टरों ने धरना-प्रदर्शन काला मास्क लगाकर किया। मौके पर डॉक्टरों की सुरक्षा संबंधित व अन्य मांगों को लेकर नारे भी लगाये। नेतृत्व अाईएमए के जिला सचिव डा मधुकर प्रकाश व भाषा के सचिव डा नरेश प्रसाद ने किया। ऐसे सिविल सर्जन डा ललितेश्वर प्रसाद झा ने हड़ताल को देखते हुए इमरजेंसी में जहां दो डॉक्टर रहते थे वहां 5 डॉक्टर की तैनाती कर दी थी। मौके पर संबोधित करनेवालों में डॉ. पी सिंह, डॉ. कन्हैया सिंह, डॉ. प्रतीक, डॉ. नवीन सिंह, डॉ. विनोद कुमार, डॉ आरआर शर्मा, डॉ. राजीव रंजन, डॉ. विजय गुप्ता व डॉ. महावीर प्रसाद गुप्ता सहित कई डॉक्टर मौजूद थे।

क्लिनिक के चक्कर लगाते रहे मरीज
हड़ताल के कारण सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों को हुई वे कभी सदर अस्पताल तो कभी निजी क्लिनिक के चक्कर लगाते हुए देखे गए। महावीर टोला स्थित कई निजी क्लिनिकों के बाहर व सदर अस्पताल के पीपीओटी के बाहर काफी संख्या में मरीज खड़े थे। अस्पताल के गार्ड से बार-बार वे पुछ रहे थे कि पीपीओटी कब खुलेगा। निजी व सरकारी अस्पताल में ओपीडी सेवा बंद होने के बाद ज्यादा मरीजों की भीड़ इमरजेंसी में देखी गई।

आनंदनगर निवासी गोपाल सिंह ने बताया कि जब देखिए तो डॉक्टर हड़ताल ही कर देते है मरीजों का तो उनको ख्याल ही नहीं है। निजी क्लिनिक में भी अपनी मां को दिखाने ले गया तो वहां भी क्लनिक बंद था, फिर लौटकर सदर अस्पताल ही लेकर आया हूं। इसी तरह कई और लाेग भी परेशान दिखे।

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