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वन विभाग हुआ सक्रिय:भोजपुर में शाहिलों का हो रहा गैरकानूनी शिकार, अब वन विभाग करेगा छापेमारी

आरा7 दिन पहले
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बबुरा गांव के पास बांध में शाहिलों की मांद। - Dainik Bhaskar
बबुरा गांव के पास बांध में शाहिलों की मांद।

स्थानीय बड़हरा प्रखंड में धड़ल्ले से शाहिल जीवों का शिकार किया जा रहा है। शिकार करने बाहर से शिकारी बड़हरा प्रखंड में आते हैं और शाहिलों को जान से मारकर या पकड़कर ले जाते हैं। शाहिलों का शिकार मांस और उनके शरीर पर नोंकदार कांटों के लिए किया जा रहा है।

शिकारी शाहिलों को जान से मारने या पकड़ने के बाद मांस व कांटों के लिए चंद रुपये के लिए बेच देते हैं। बाहर भेजने पर शिकारियों को अधिक कीमत मिलता है। ये शिकारी स्थानीय या बड़हरा प्रखंड के नहीं हैं। ये शिकारी बिहिया प्रखंड के बताया जा रहे हैं।

जो शिकार करने के उपकरण लेकर झूंड के झूंड आते और शाहिलों का शिकार कर चले जाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बक्सर-कोईलवर गंगा तटबंध पर बबुरा और पड़रिया के बीच कई साल पहले वन विभाग ने काफी संख्या में जंगली पेड़ लगाये थे।

समय के साथ उन पेड़-पौधों और बांसों को ग्रामीण काटते चले गए। इसके बावजूद काफी संख्या में पेड़-पौधे बचे हुए हैं। इन पेड़- पौधों के झुरमुट और झांड़-झंखार के बीच शाहिल बांध या जमीन के अंदर मांद/ बिल (छिद्र) बनाकर रहते हैं। शिकार करने के लिए शिकारी सबसे पहले मांद और बिल की तलाश करते हैं।

इसके बाद अपने साथ लाए पाइप के सहारे में मांद/छिद्र में पानी भरने लगते हैं। मांद या बिल में पानी भरने के बाद जान बचाने के लिए शाहिल उससे बाहर निकलने लगते हैं। इसके बाद ताक में लगे शिकारी केला का थंब या फंदा फंसाकर शिकार को पकड़ लेते हैं।

गैरकानूनी है शाहिलों का शिकार करना: फॉरेस्टर

  • शाहिलों का शिकार करना गैरकानूनी है। यह अपराध है। इसके खिलाफ छापेमारी कर शिकार करने वालों को पकड़ा जाएगा। - मिहिर कुमार झा, फॉरेस्टर, भोजपुर।
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