• Hindi News
  • Local
  • Bihar
  • Patna
  • Ara
  • Jayakumar, Rishikesh, Dr. Maneka And Jayaprakash Safal; Sutra Success Achieved Through Concentration, Time management And Self study

बीपीएससी परीक्षा में आदित्य को मिली आठवीं रैंक:जयकुमार, ऋषिकेश, डॉ. मेनका और जयप्रकाश सफल; सूत्र- एकाग्रता, समय-प्रबंधन व स्वाध्याय से मिली सफलता

आरा17 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

65 वीं, बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में जिले के कई युवा सफल हुए। पढ़ाई पर एकाग्रता, समय-प्रबंधन, स्व-अध्ययन, पारिवारिक सहयोग व करियर के लिए उचित मार्गदर्शन इनकी सफलता का कारण बना। साधारण परिवारों के इन युवाओं के सफलता की अलग-अलग दास्तां है।

आदित्य को बीपीएससी परीक्षा में मिली 8वीं रैंक

​​​​​​​बीपीएससी परीक्षा में टॉप-10 में शामिल हैं कोईलवर प्रखंड के चांदी गांव निवासी आदित्य कुमार। आदित्य को बीपीएससी की परीक्षा में आठवां रैंक मिला है। इनका चयन एडिशन डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (एडीएम) पद पर हुआ है। इनकी प्रारंभिक पढ़ाई सरस्वती शिशु मंदिर, चांदी में हुई है। इंटरमीडियट आरा के एचडी जैन से वर्ष 2015 में किया। इसके बाद उनका चयन आईआईटी रुड़की में हुआ, जहां इंजीनियरिंग डिंग्री हासिल किया।

अभी वह भारत सरकार के मंत्रालय में एक अधिकारी के पद पर वर्ष 2020 से कार्यरत है। उन्होंने बताया कि मैं एक साधारण परिवार से तालुक रखता हूंं। मेरे पिता प्रकाशचंद का चांदी में एक छोटा सा हार्डवेयर की दुकान था। भारत सरकार के मंत्रालय में जॉब होने के बाद गांव का दुकान अब बंद कर दिया गया है। दादा शिवपूजन साह एवं मां रागिनी देवी ने मेरी सफलता में काफी योगदान दिया है।

बिहार लोक सेवा आयोग के सभी सफल प्रतिभागियों ने कड़ी मेहनत को ही बताया सफलता का रास्ता, कहा- शॉर्टकट के चक्कर में न पड़ें, गंभीर होकर पढ़ाई करें

जय कुमार बोले- सेल्फ स्टडी जरुरी, हर दिन 6-7 घंटा पढ़ा

आरा शहर के केजी रोड निवासी डॉ अरूण कुमार सिंह के पुत्र जय कुमार ने बीपीएससी परीक्षा दूसरी बार उत्तीर्ण किया है। जय कुमार ने 101 रैंक प्राप्त किया है। बिहार शिक्षा संवर्ग में पदस्थापना होगी। जय कुमार ने 10 वीं और 12 वीं की पढ़ाई डीएवी स्कूल, आरा से किया है। वर्ष 2013 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीआईटी, मेसरा से किया।

उनके पिता डॉ अरूण कुमार सिंह आरा शहर के एचडी जैन कॉलेज में रसायन-शास्त्र विभाग में शिक्षक हैं। जय ने बताया कि 64 वीं बीपीएससी में 681 रैंक आया था। मेरी सफलता का मूल-मंत्र सेल्फ-स्टडी है। प्रतिदिन से छह से सात घंटे की पढ़ाई करता था।

पिता फेरी कर बेचते थे मसाला; ट्यूशन पढ़ाकर ऋषिकेश बने अधिकारी

कभी गरीबी के कारण फेरी कर मसाला बेचते थे पिता विजय कुमार साह। आज उनका बेटा ऋषिकेश कुमार बीपीएसएस की परीक्षा उत्तीर्ण कर ग्रामीण विकास पदाधिकारी बन गये। बड़हरा प्रखंड के फहरदा गांव निवासी ऋषिकेश ने बताया कि जीवन में विकट परिस्तिथि रही है।

मेरे पिता विजय कुमार साह मजदूरी करने के लिए राजकोट, गुजरात वर्ष 2008 में चले गए। मैं आठवी क्लास से ही ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई करता रहा। मां रीता देवी के निधन के बाद भी पढ़ाई से कोई समझौता नहीं किया। सुबह व शांम में ट्यूशन पढ़ाना और रात में खुद पढ़ाई करना, मेरी सफलता का आधार है।

जय प्रकाश ने बीपीएससी की परीक्षा में प्राप्त किया 229वीं रैंक

जवाहर नवोदय विद्यालय, बिहिया के पूर्ववर्ती छात्र जय प्रकाश ने 65 वीं बीपीएससी परीक्षा में सफलता पायी है। उन्हें 229 वां रैंक मिला है। इनका चयन ग्रामीण विकास पदाधिकारी के पद पर हुआ है। ये बक्सर जिले के बह्मपुर प्रखंड के एकरासी गांव निवासी हैं। पिता वीरेन्द्र कुमार सिंह, किसान और माता माधुरी देवी गृहिणी है।

जय प्रकाश ने वर्ष 2007 में नवोदय विद्यालय, बिहिया से मैट्रिक की परीक्षा उतीर्ण किया था। जय प्रकाश ने बताया कि दूसरी बार में सफलता मिली है। पहली बार 64 वीं बीपीएससी परीक्षा में साक्षात्कार तक पहुंचा था। मेरा लक्ष्य यूपीएससी करना है।

निर्वाचन पदाधिकारी बनेंगी डॉ मेनका, अभी दरभंगा में प्राध्यापिका

​​​​​​​डॉ. मेनका कुमारी ने 65 वीं बीपीएससी परीक्षा में 310 वां रैंक हासिल किया है। वह जगदीशपुर प्रखंड के आयर थाना क्षेत्र के बरनाव गांव के उतरवारी मठिया निवासी है। इनका चयन चुनाव आयोग अवर निर्वाचन पदाधिकारी के पद हुआ है। मेनका की मां रेणु देवी शिक्षक और पिता प्रभुनाथ गिरी अधिवक्ता है।

पांच बहनों में सबसे बड़ी मेनका ने पटना विश्वविद्यालय से हिंदी में स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल कर ‘’’’उत्तर औपनिवेशिक पूंजीवाद और जनसंचार की हिंदी विषय पर डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की है। इसी नाम से इनकी किताब भी प्रकाशित हो चुकी है।

खबरें और भी हैं...