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आत्महत्या करने का प्रयास:जिंदगी से हारी मौत, चलती ट्रेन के आगे कूदा विक्षिप्त, पर जान बची

आरा10 दिन पहले
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श्रमजीवी एक्सप्रेस के आगे रेलवे ट्रैक पर लेटे अजीत चौहान को उठाकर ले जाते पुलिसकर्मी। - Dainik Bhaskar
श्रमजीवी एक्सप्रेस के आगे रेलवे ट्रैक पर लेटे अजीत चौहान को उठाकर ले जाते पुलिसकर्मी।
  • चालक ने आपातकालीन ब्रेक मारकर ट्रेन रोकी, आरपीएफ और मैट्रिक के छात्रों ने बचायी जान, वर्ष 2013 से था तनाव में

गुरुवार को आरा रेलवे स्टेशन पर एक मानसिक रुप से विक्षिप्त व्यक्ति ने चलती ट्रेन श्रमजीवी एक्सप्रेस के सामने कूद कर आत्महत्या करने की कोशिश की। पटरी पर अचानक विक्षिप्त के कूदने से ट्रेन के पायलट ने आपातकालीन ब्रेक लगाया।

ब्रेक लगने से विक्षिप्त की जान बच गयी। इसके बाद मैट्रिक की परीक्षा देने जा रहे छात्रों और स्टेशन पर तैनात आरपीएफ के जवानों ने विक्षिप्त को पटरी से उठाकर प्लेटफाॅर्म पर रखा। आरपीएफ के जवान ने विक्षिप्त से पूछताछ की। काफी देर पूछताछ करने के बाद विक्षिप्त ने अपना नाम और पता बताया। विक्षिप्त अजित चौहान, पिता सर्वानंद चौहान मौलाबाग का निवासी है। इसकी सूचना विक्षिप्त के परिजनों को दिया गया। सूचना मिलने के बाद परिजन आरा रेलवे स्टेशन पहुंचे और सारी प्रक्रिया होने के बाद उसे घर ले जाया गया।

परिजनों ने बताया कि अजित चौहान 2013 में पुश्तैनी जमीन जायदाद को लेकर टेंशन में रहते थे। इसके वजह से उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया था। इनका इलाज कोईलवर मनोचिकित्सालय में चल रहा है। दवा लेते है तब ठीक रहता है। बीच-बीच में तबियत खराब हो जाता है। विक्षिप्त पकड़ी चौक पर खैनी का दुकान चलाते थे। कोरोना काल में लॉकडाउन लगने से खैनी का दुकान लगातार 4 महिनों तक बंद रहा। इसके बाद इनका स्थिति और खराब हो गया। आज सुबह घर से निकले थे पता नही कहां गए थे। अचानक मेरे माेबाइल पर फोन आया कि तुम्हारा भाई स्टेशन पर है। आरपीएफ के जवान पकड़े हुए हंै। तब हमलोग स्टेशन आएं और अपने भाई और भतीजा के साथ उनको घर ले जा रहे है।

  • हर महीने इलाज के लिए जाता है मनोचिकित्सालय
  • पूर्व में शहर के पकड़ी चौक पर चलाता था दुकान
  • लॉकडाउन के दौरान 4 महीने बंद थी दुकान

लॉकडाउन के दौरान खैनी की दुकान बंद हो गई तो और बिगड़ गई मानसिक हालत
कोरोना संक्रमण के वजह से जिले में लॉकडाउन लगा था। जिसके वजह से बाजार की सभी दुकानें बंद हो गयी थी। जिसका गहरा असर अजित चौहान पर पड़ा। जिससे उनकी तबियत और खराब होने लगी। अजित चौहान अपने परिवार में पांच भाई है। जिसमें अजित तीसरा स्थान पर आता है। अजित चौहान के दो पुत्र और एक पुत्री है। प्रथम पुत्र रविकांत चौहान स्नातक पार्ट वन में, दूसरा चंद्रकांत चाैहान हाल ही में इंटर का परीक्षा दिया है। पुत्री संध्या चौहान की शादी हो चुकी है। अजित चौहान को प्रत्येक महीना में एक बार कोईलवर मनोचिकित्सालय में ट्रीटमेंट के लिए ले जाया है और दवा दी जाती है।

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